दफ्तर में फंसे CMO को नाव से निकाला:कर्मचारी नाव चलाकर लेने पहुंचे; जांजगीर में भारी बारिश में अस्पताल तक डूबे, हर साल होता है यही हाल

जांजगीरएक महीने पहले
CMO मोहन विश्वकर्मा ने बताया कि खराब होने वाली चीजें बाहर निकलवा दी गई हैं। प्रयास से कुछ सामान और मशीनें भी बचाई गई हैं। पिछले साल भी प्रशासन को सूचना दी थी। इस साल भी दी है।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की चंद्रपुर नगर पंचायत में एक दिन की बारिश ने स्थिति को बदतर कर दिया है। पंचायत कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग के दफ्तर, अस्पताल और कर्मचारियों के क्वार्टर सब पानी में डूब गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि सड़क पर नाव चलानी पड़ रही है। गुरुवार को नगर पंचायत CMO मोहन विश्वकर्मा दफ्तर में फंस गए। इसके बाद राजस्व अधिकारी और अन्य कर्मचारी नाव चलाते हुए उन्हें लेने के लिए पहुंचे।

दरअसल, जिले में पिछले 4 दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी था। शुक्रवार को इससे जरूर थोड़ी राहत मिल गई, लेकिन एक दिन पहले इसने हालात बिगाड़ दिए। नगर पंचायत चंद्रपुर में जल भराव हो गया। सड़कों पर करीब 4 फीट तक पानी भरा है। इसके चलते वहां स्थित अस्पताल, धर्मशाला और कर्मचारियों के क्वार्टर तक डूब गए। इसके बाद उन्हें सब खाली कर वहां से जाना पड़ा। इस दौरान कार्य कर रहा रहे CMO मोहन विश्वकर्मा वहीं फंस गए थे।

नगर पंचायत चंद्रपुर में जलभराव हो गया। सड़कों पर करीब 4 फीट तक पानी भरा है।
नगर पंचायत चंद्रपुर में जलभराव हो गया। सड़कों पर करीब 4 फीट तक पानी भरा है।

मशीनें, पंप सब बाहर निकाले, कर्मचारियों को किया गया शिफ्ट
CMO विश्वकर्मा के मकान सहित सभी कर्मचारियों के क्वार्टर तक डूब गए हैं। यह देखकर राजस्व अधिकारी और अन्य कर्मचारी नाव लेकर CMO को लेने के लिए निकल पड़े। उन्होंने अफसर को नाव में बिठाकर बाहर निकाला। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने अपने कर्मचारियों को वहां से शिफ्ट कर दिया था। SLRM सेंटर जहां कचरे से खाद बनाने का काम होता है, वह पूरा डूब चुका है। इसके कारण जो खाद बनी थी वह भी बह गई।

अस्पताल, धर्मशाला और कर्मचारियों के क्वार्टर तक डूब गए। इसके बाद उन्हें सब खाली कर वहां से जाना पड़ा।
अस्पताल, धर्मशाला और कर्मचारियों के क्वार्टर तक डूब गए। इसके बाद उन्हें सब खाली कर वहां से जाना पड़ा।

डुबान एरिया में सारा निर्माण कार्य, हर साल परेशानी
यह जगह डुबान एरिया में हैं। हर साल बारिश के दौरान यहां ऐसी ही स्थिति रहती है। कर्मचारी बताते हैं कि यहीं पर स्वास्थ्य विभाग का ऑफिस, क्लिनिक, नगर पंचायत और उनके क्वार्टर बना दिए गए हैं, जो हर साल पानी में डूबते हैं। CMO मोहन विश्वकर्मा ने बताया कि खराब होने वाली चीजें बाहर निकलवा दी गई हैं। प्रयास से कुछ सामान और मशीनें भी बचाई गई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी प्रशासन को सूचना दी थी। इस साल भी दी है, पर अभी तक कुछ हुआ नहीं है।

इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने अपने कर्मचारियों को वहां से शिफ्ट कर दिया था। SLRM सेंटर जहां कचरे से खाद बनाने का काम होता है, वह पूरा डूब चुका है।
इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने अपने कर्मचारियों को वहां से शिफ्ट कर दिया था। SLRM सेंटर जहां कचरे से खाद बनाने का काम होता है, वह पूरा डूब चुका है।
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