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छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ पर जांच की आंच:सुकमा डिप्टी कलेक्टर रुपेंद्र पटेल एक माह में देंगे रिपोर्ट, 10 बिंदुओं पर हो सकती है जांच; कमिश्नर बोले- कैंप को दी गई जमीन के रिकॉर्ड भी होंगे चेक

सुकमा/बीजापुर4 महीने पहले
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ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन संभागायुक्त को सौंपा था। इसके बाद SP के प्रस्ताव पर सुकमा कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। - Dainik Bhaskar
ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन संभागायुक्त को सौंपा था। इसके बाद SP के प्रस्ताव पर सुकमा कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर बार्डर पर सिलगेर में 7 दिन पहले हुई फायरिंग मामले की जांच के आदेश सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार ने दे दिए हैं। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर और कार्यपालक दंडाधिकारी रुपेंद्र पटेल को जांच अधिकारी बनाया गया है। वह एक माह में अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगे। जांच संभवत: 10 बिंदुओं पर हो सकती है। वहीं बस्तर संभाग कमिश्नर जीआर चुरेंद्र ने कहा है कि कैंप के लिए दी गई जमीन के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।

रविवार को बस्तर संभाग कमिश्नर जीआर चुरेंद्र, IG बस्तर सुंदराज पी, कलेक्टर सुकमा विनीत नंदनवार, कलेक्टर बीजापुर रितेश कुमार अग्रवाल, SP बीजापुर कमलोचन कश्यप ने सिलगेर में ग्रामीणों के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी।
रविवार को बस्तर संभाग कमिश्नर जीआर चुरेंद्र, IG बस्तर सुंदराज पी, कलेक्टर सुकमा विनीत नंदनवार, कलेक्टर बीजापुर रितेश कुमार अग्रवाल, SP बीजापुर कमलोचन कश्यप ने सिलगेर में ग्रामीणों के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी।

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कलेक्टर ने कहा- जो ग्रामीण बयान दर्ज कराना चाहते हैं, उनके आने-जाने की व्यवस्था करेंगे
दरअसल, जगरगुंडा के सिलेगर में हुई घटना की जांच के लिए सुकमा के SP केएल ध्रुव ने प्रस्ताव रखा था। जिसे कलेक्टर विनीत नंदनवार ने स्वीकार कर लिया। कलेक्टर नंदनवार ने कहा, जो ग्रामीण अपना बयान दर्ज करवाना या पक्ष रखना चाहते हैं, वे आ सकते हैं। उनके आने-जाने की व्यवस्था की जाएगी। संभवत: जिन बिंदुओं पर जांच होगी, उनमें ग्रामीणों के प्रदर्शन से लेकर जवानों की ओर से कार्रवाई शामिल है। वहीं यह भी देखा जाएगा कि क्या ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन को लेकर कोई इनपुट था या नहीं।

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इन बिंदुओं पर हो सकती है जांच

  • क्या 12 मई को ग्राम पंचायत सिलगेर में नक्सल विरोधी अभियान संचालन व क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए CRPF168, CRPF153, CRPF 241, बस्तरिया बटालियन की महिला प्लाटून, DRG, STF और कोबरा बटालियन को तैनात किया गया था?
  • क्या 14 मई को कुछ ग्रामीणों ने तैनात बल के संबंध में जानकारी एकत्र की थी?
  • क्या 15 मई को ग्राम सिलेगर में कैंप के विरोध में बड़ी संख्या में एकत्र ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया था?
  • क्या ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन और नक्सलियों के मौजूद होने की इनपुट पहले से मिला था?
  • क्या घटना के संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई थी?
  • नक्सलियों और सुरक्षा बल के बीच कब और कहां मुठभेड़ हुई ?
  • क्या जवानों की ओर से आत्म सुरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई थी?
  • क्या घटना में सुरक्षा बल, ग्रामीण, नक्सलियों में से किसी व्यक्ति की मौत या घायल हुआ था?
  • घटना स्थल से कब और क्या-क्या सामग्री बरामद की गई?

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कमिश्नर-IG एक दिन पहले गए थे ग्रामीणों से मिलने
इससे पहले रविवार को बस्तर संभाग कमिश्नर जीआर चुरेंद्र, IG बस्तर सुंदराज पी, कलेक्टर सुकमा विनीत नंदनवार, कलेक्टर बीजापुर रितेश कुमार अग्रवाल, SP बीजापुर कमलोचन कश्यप ने सिलगेर में ग्रामीणों के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। अफसरों क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। इस दौरान जिले के सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन भी संभागायुक्त को सौंपा था।

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मुठभेड़ को लेकर ग्रामीणों ने खड़े किए हैं सवाल, जो मारे गए वो नक्सली नहीं
सिलेगर में 17 मई को हुई फायरिंग सवालों के घेरे में है। पुलिस अफसर जहां इसे जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ बता रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि वहां नक्सली थे ही नहीं। इस फायरिंग में 3 लोग मारे गए थे, जबकि कई घायल हुए हैं। मारे गए लोगों की पहचान स्थानीय ग्रामीणों के रूप में हुई। अफसरों ने कहा था कि कैंप बनने के बाद नक्सलियों ने ग्रामीणों को भड़काकर इसका विरोध शुरू किया। ग्रामीण वहां एकत्र हुए थे, तब करीब दोपहर साढ़े 12 बजे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

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