नक्सलियों पर एयर स्ट्राइक का मामला:सुकमा और बीजापुर के हजारों ग्रामीण सड़क पर उतरे; कहा- इससे उनकी जान को खतरा, खुद को बताया ड्रोन हमला पीड़ित

सुकमा7 महीने पहले
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हाथों में पोस्टर लिए ग्रामीणों ने खुद को ड्रोन हमला पीड़ित भी बताया। कहा कि इससे उनके साथ ही जंगल और वन्य जीवों की भी जान को खतरा है। - Dainik Bhaskar
हाथों में पोस्टर लिए ग्रामीणों ने खुद को ड्रोन हमला पीड़ित भी बताया। कहा कि इससे उनके साथ ही जंगल और वन्य जीवों की भी जान को खतरा है।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एयर स्ट्राइक का दावा करने वाले नक्सलियों को अब दो जिलों के ग्रामीणों का भी समर्थन मिला है। इसके विरोध में मंगलवार को सुकमा में स्थानीय और बीजापुर जिले के आदिवासी हजारों की संख्या में एकत्र हो गए। आदिवासियों ने इस तरह के हमले बंद करने की मांग की। कहा कि इससे उनके साथ ही जंगल और वन्य जीवों की भी जान को खतरा है। हाथों में पोस्टर लिए ग्रामीणों ने खुद को ड्रोन हमला पीड़ित भी बताया।

पोस्टर में ग्रामीणों ने हमले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार बताया।
पोस्टर में ग्रामीणों ने हमले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार बताया।

एक दिन पहले ही गांव में एकत्र होना शुरू हो गए थे ग्रामीण
किस्टाराम के बुर्कलंका गांव में विरोध के लिए ग्रामीण एक दिन पहले से ही एकत्र होना शुरू हो गए थे। उनका यह सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। हाथ में नारे लिखे पोस्टर लेकर हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासी केंद्र और राज्य सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने सरकार पर एयर स्ट्राइक करने और ड्रोन से हमला करने का आरोप लगाया। साथ ही इस तरह के हमले बंद करने की मांग की।

ग्रामीणों ने कहा कि ड्रोन हमले से जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ जंगल में रहने वाले अन्य जीवों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा है।
ग्रामीणों ने कहा कि ड्रोन हमले से जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ जंगल में रहने वाले अन्य जीवों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा है।

आदिवासियों ने कहा- इस तरह के हमले आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा
पोस्टर में ग्रामीणों ने हमले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार बताया। कहा कि वे मछली पकड़ने तालाबों में जाते हैं, महुआ संग्रहण करने जंगलों में जाते हैं। एयर स्ट्राइक जैसी स्थिति से उनकी जान को भी खतरा है। ग्रामीणों ने कहा कि ड्रोन हमले से जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ जंगल में रहने वाले अन्य जीवों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे भी पहुंचे थे।

नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी किया। इसके साथ एयर स्ट्राइक से हुए नुकसान की फोटो भी दी गई।
नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी किया। इसके साथ एयर स्ट्राइक से हुए नुकसान की फोटो भी दी गई।

नक्सलियों ने पर्चा और फोटो जारी कर बीजापुर में किया था ड्रोन हमले का दावा
नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के प्रवक्ता विकल्प ने प्रेस नोट जारी कर एयर स्ट्राइक का दावा किया है। उसने कहा था कि 19 अप्रैल को हेलिकॉप्टर और ड्रोन से बम गिराए गए। हेलिकाप्टर देख नक्सलियों ने अपना ठिकाना बदल लिया और इस वजह से उनको नुकसान नहीं हुआ है। नक्सलियों के मुताबिक, यह हमला बीजापुर जिले के पामेड़ क्षेत्र के बोत्तालंका और पाला गुडेम गांव में किया गया।

फिर यह तस्वीर जारी कर नक्सलियों ने ड्रोन से बम गिराए जाने और IG बस्तर का दावा झूठा बताया।
फिर यह तस्वीर जारी कर नक्सलियों ने ड्रोन से बम गिराए जाने और IG बस्तर का दावा झूठा बताया।

IG बस्तर को चैलेंज कर मध्यस्थ भेजने की मांग रखी थी
पुलिस और CRPF के इस हमले से इनकार करने पर नक्सलियों ने अगले दिन फिर पर्चा जारी कर IG बस्तर सुंदरराज पी. पर निशाना साधा। नक्सलियों ने IG के बयान को चैलेंज किया है और दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया था। इसका वीडियो भी जारी किया। नक्सलियों के दक्षिण सब जोनल ब्यूरो की ओर से जारी पर्चे और ऑडियो में कहा था कि हम प्रमाण के साथ साबित कर देंगे। मध्यस्थ को भेजिए, हम दिखाएंगे कि ड्रोन हमला कहां हुआ है।

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