GPM में पढ़ाई के नाम पर बाल मजदूरी!:मिड-डे-मील के बर्तन धोने 100 मीटर दूर तालाब पर जाते हैं बच्चे, दुकानदारों के घर का भरते हैं पानी; टीचर बोले- अब नहीं भेजेंगे

पेंड्रा2 महीने पहले
मरवाही ब्लॉक स्थित बगैंहाटोला स्कूल में बच्चों का मिड-डे-मील तो मिलता है, लेकिन बर्तन उन्हें खुद ही धोने पड़ते हैं।

छत्तीसगढ़ में 16 महीने बाद सरकारी स्कूल खुल गए हैं, लेकिन न शिक्षा का स्तर बदला और न बच्चों की स्थिति सुधरी। पढ़ाई और मिड-डे-मील के लिए बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) स्थित सरकारी स्कूल के बच्चे 100 मीटर दूर तालाब पर जाकर बर्तन धोते हैं। स्कूल समय में ही दुकानदारों के घर का पानी भरते हैं। खास बात यह है कि स्कूल प्रबंधन को भी पता है। मामला सामने आने के बाद अब टीचर कह रहे हैं कि गलती हो गई, अब नहीं भेजेंगे।

मामला मरवाही ब्लॉक के सेमरदर्री गांव का है। यहां बगैंहाटोला स्कूल में बच्चों का मिड-डे-मील तो मिलता है, लेकिन बर्तन उन्हें खुद ही धोने पड़ते हैं। यह जिम्मेदारी मिड-डे-मील सप्लाई करने वाली एजेंसी की है। बर्तन भी बच्चे स्कूल में नहीं धो सकते, इसके लिए उन्हें 100 मीटर दूर स्थित तालाब और हैंडपंप के पास भेजा जाता है। वहां लगे हैंडपंप से स्कूल के बच्चे स्थानीय व्यापारियों के लिए उनके घर बाल्टी में पानी भरकर पहुंचाते हैं। जब इस बारे में बच्चों से पूछा गया तो सिर्फ इतना बोले कि महाराज जी के लिए ले जा रहे हैं।

तालाब से बर्तन धोकर लौटते बच्चे।
तालाब से बर्तन धोकर लौटते बच्चे।

स्कूल में हैंडपंप लगा है, लेकिन पानी कम आता है
बगैंहाटोला का यह स्कूल 5वीं तक है। स्कूल में एक हैंडपंप भी लगा है। इसके बाद भी छोटे-छोटे बच्चों को बाहर जाना पड़ रहा है। स्कूल के टीचर कहते हैं कि स्कूल के हैंडपंप से पानी देर से आता है। यानी काफी मशक्कत के बाद निकलता है। इसलिए बच्चों को बाहर भेजना पड़ता है।

सहायक शिक्षक हरनाम सिंह पाव कहते हैं कि दो दिन से ऐसी समस्या है। अब नहीं भेजेंगे। बच्चे जो बर्तन धो रहे हैं वह उनकी स्वयं की थाली है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मनोज राय ने कहा कि मीडिया के जरिए उन्हें इसकी जानकारी मिली है। इस संबंध में आगे की जानकारी लेकर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

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