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कोरोना के कारोबारी:छत्तीसगढ़ में बिक रही नकली एंटीबायोटिक, इम्युनिटी बढ़ाने की दवाओं में फूड सप्लीमेंट पाउडर

रायपुर10 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में एंटीबायोटिक के नाम पर उत्तराखंड की कंपनी ने फूड सप्लीमेंट मिली बेकार दवाएं सप्लाई कीं। इन दवाओं को खाने से इम्युनिटी सिस्टम के साथ अन्य बीमारियों में कोई फायदा नहीं होगा। खाद्य एवं औषधि विभाग की लैब की जांच में मामला पकड़ में आया है। अब सरकारी एनालिस्ट ने इन दवाओं पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में एंटीबायोटिक के नाम पर उत्तराखंड की कंपनी ने फूड सप्लीमेंट मिली बेकार दवाएं सप्लाई कीं। इन दवाओं को खाने से इम्युनिटी सिस्टम के साथ अन्य बीमारियों में कोई फायदा नहीं होगा। खाद्य एवं औषधि विभाग की लैब की जांच में मामला पकड़ में आया है। अब सरकारी एनालिस्ट ने इन दवाओं पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
  • खाद्य एवं औषधि विभाग की लैब रिपोर्ट : ड्रग की जगह सेल्युलोज व लैक्टोज की मिलावट
  • दो माह पहले लिए गए सभी सैंपल फेल, उत्तराखंड से प्रदेशभर में भेजी गई नकली दवाएं

(विंदेश श्रीवास्तव) कोरोना संक्रमण के बीच छत्तीसगढ़ में नकली एंटीबायोटिक दवाओं की सप्लाई की जा रही है। इम्युनिटी बढ़ाने वाली इन दवाओं में ड्रग की जगह सेल्युलोज व लैक्टोज की मिलावट की गई है, जो कि महज डायट्री सप्लीमेंट यानी कि एक तरह का फूड सप्लीमेंट का पाउडर है। खाद्य एवं औषधि विभाग की लैब रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है। इन दवाओं को उत्तराखंड से प्रदेशभर में सप्लाई किया गया है। 

खाद्य एवं औषधि विभाग ने राज्य के दो जिलों से एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल लेकर जांच कराई। इसकी गुरूवार को रिपोर्ट अाई तो पता चला कि ओ-फ्लॉक्सासिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन नाम की दवा में ड्रग मिला ही नहीं। दवाई बनाने के लिए जो इन्ग्रेडिएंट्स मिलाए जाते हैं, वह उसमें पाए ही नहीं गए। सिर्फ सेल्युलोज और लेक्टोस नाम के पाउडर मिले हैं, जो कि सिर्फ डायट्री सप्लीमेंट हैं। यह दवाई शरीर में जाने के बाद भी किसी काम की नहीं है। 

ओ-फ्लॉक्सासिन और सिप्रो फ्लॉक्सासिन एंटीबायोटिक के सैंपल फेल
ओ-फ्लॉक्सासिन एंटी बायोटिक दवा है, जिसका बैंच नंबर एपी 1003 है। यह दवा श्वसन तंत्र को ठीक करने के काम आती है। इसे खांसने-छींकने की शिकायत पर डॉक्टर उपयोग करने की सलाह देते हैं। 200 एमजी की इस दवा में किसी भी प्रकार के एंटीबायोटिक इन्ग्रेडिएंट्स नहीं मिले हैं। इन दवाओं को डॉक्टर इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने, बुखार के दौरान और निमोनिया में भी देते हैं। वहीं सिप्रो फ्लॉक्सासिन दवा भी एंटीबायोटिक ही है। यह बैंच नंबर एपी 252 की है। इसे चोट लगने पर दी जाती है। 

बच्चों को फूड सप्लीमेंट के लिए देते हैं लैक्टोज और सेल्युलोज
दोनों ही एंटी बायोटिक दवा में सिर्फ लैक्टोज और सेल्युलोज का पाउडर मिला है। जो कि बच्चों को फूड सप्लीमेंट के लिए दिया जाता है। साथ ही इन दवाओं में एक्सीपीएंट भी मिला है, जो कि पाउडर जैसा होता है। ऐसे में यह दवा मिक्सचर होने के बाद भी बॉडी में कोई काम नहीं करेगी। 

उतराखंड की कंपनी ने करवाई है इन दवाओं की सप्लाई
छत्तीसगढ़ में धमतरी और जांजगीर-चांपा जिले से इन दवाओं की सैंपलिंग की गई। एएनपीसी एक्सए फॉर्मो नाम की कंपनी उतराखंड की है। इस कंपनी ने ही दोनों ही एंटीबायोटिक दवा की मैनुफैक्चरिंग की। इसके बाद छत्तीसगढ़ में सप्लाई की। हालांकि लैब रिपोर्ट आने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप है। इन दवाओं पर रोक लगाने के लिए निर्देशित भी किया जा रहा है।

दो दिन पहले ही लैब से रिपोर्ट आई है, जल्द कार्रवाई करेंगे
कुछ दिन पहले एंटी बायोटिक की दवा की सैंपलिंग हुई थी। लैब में उसकी जांच हुई, जिसमें दवा नकली निकली है। इसकी रिपोर्ट कल ही मुझे मिली है। इस पर कार्रवाई की जा रही है। 
- सत्यनारायण राठौर, कंट्रोलर, खाद्य एवं औषधि विभाग

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