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... तो पेड़ के नीचे हो गया आइसोलेट:2 कमरे में रहता है 5 सदस्यों का परिवार, युवक संक्रमित हुआ तो 4 रातें गुजार दीं पेड़ के नीचे; फिर कोविड सेंटर किया शिफ्ट

​​​​​​​गरियाबंद3 महीने पहले

कोरोना संक्रमण के बीच लोगों और मरीजों की मजबूरियों की तमाम कहानियां रोजाना ही सुनने को मिल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के गरियाबंद से महज 30 किमी दूर एक संक्रमित युवक की पेड़ के नीचे ही आइसोलेट होने की तस्वीरें सामने आई हैं। इसे लापरवाही कहिए, बेबसी या फिर परिवार की फिक्र, लेकिन 2 कमरों में रहने वाले 5 सदस्यों के परिवार के इस युवक ने अपनी 4 रातें पेड़ के नीचे ही गुजार दीं। इसके बाद जब प्रशासन को पता चला तो उसे कोविड सेंटर शिफ्ट किया।

दरअसल, छत्तीसगढ़-ओडिशा बार्डर पर खोखसरा ब्लॉक में डालगुमा पंचायत का छिल्पामाल गांव है। यहां रहने वाला खिरोद नायक (30) 28 अप्रैल को अपनी बीमार को लेकर इलाज के लिए भवानीपटना जिला अस्पताल गया था। उसकी मां के चेकअप के दौरान डॉक्टर को खिरोद में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए। इस पर डॉक्टर ने उसे टेस्ट कराने की सलाह दी। इस पर युवक ने टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। उसी दिन दोपहर अलग-अलग संसाधन से मां-बेटा घर लौट आए।

पांचवें दिन सोशल मीडिया के जरिए पता चला तो परला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम पहुंची और उसे कोविड सेंटर शिफ्ट किया।
पांचवें दिन सोशल मीडिया के जरिए पता चला तो परला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम पहुंची और उसे कोविड सेंटर शिफ्ट किया।

एक कमरे में किचन, एक में रहता है पूरा परिवार, तो वट वृक्ष को बना लिया घर
खिरोद अपने माता-पिता और 2 भाइयों के साथ 2 कमरे के मकान में रहता है। एक कमरे में किचन है और दूसरे में सभी सदस्य रहते हैं। ऐसे में घर में आइसोलेट रह पाना उसके लिए संभव नहीं था। यह देख खिरोद ने घर से चटाई व अन्य जरूरी सामान लिया और गांव के बाहर लगे वट वृक्ष के नीचे अपना ठिकाना बना लिया। वहां घर से उसके लिए रोज खाना आ जाता था। पांचवें दिन सोशल मीडिया के जरिए पता चला तो परला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम पहुंची और उसे कोविड सेंटर शिफ्ट किया।

जानकारी का अभाव और सिस्टम की लापरवाही पड़ सकती थी भारी
खिरोद 4 दिन तक पेड़ के नीचे ही आइसोलेट रहा और न प्रशासन, न स्वास्थ्य विभाग को इसका पता चला। युवक के पॉजिटिव होने की रिपोर्ट जिले से ही ब्लॉक को चली जान चाहिए था, लेकिन उन्हें खबर ही नहीं थी। BMO ने कहा कि उन्हें किसी ने सूचना ही नहीं दी। वहीं ग्राम पंचायत स्तर के कर्मियों को भी कोविड प्रोटोकोल मेंटनेंस की जवाबदारी दी गई है, पर उन्होंने ने भी नही बताया। होम आइसोलेशन के तय प्रोटोकोल के मुताबिक कॉल कर लाइनअप करने और अन्य जरूरी प्रक्रिया भी नही पूरी की जा रही थी।

अफसर बोले- युवक ने बताया ही नहीं
रिपोर्ट आने के बाद जिले में ही इसकी फॉरमेलिटी पूरी की गई थी। तब युवक ने होमइसोलेशन में रहने की इच्छा जताई थी। वहां से लौटने के बाद ब्लॉक में किसी को अवगत नहीं कराया था। जैसे ही पता चला उसे परला कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट किया गया है।

- तत्वदर्शी दास, BMO, खोकसरा

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