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आंकड़ों में गड़बड़ी:कोरोना से हुई मौतों को जिलों ने छिपाया, अब इन्हीं को रोज के आंकड़ों में समायोजित कर रहे तो संख्या बढ़ती दिख रही

रायपुर4 महीने पहले
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राजधानी के मुक्तिधामों में चिताएं रात को भी जल रहीं हैं। - Dainik Bhaskar
राजधानी के मुक्तिधामों में चिताएं रात को भी जल रहीं हैं।
  • 604 मौतें छिपा दीं जो कोरोना से जुलाई-अगस्त में हुई, अब इन्हें कर रहे एडजस्ट
  • 0.98% मृत्यु दर जब मौतें छिपाई गईं, 604 को जोड़ने पर 1.27%

पीलूराम साहू | पिछले 15 दिन से प्रदेश में कोरोना मरीजों की मौत की संख्या अचानक बढ़कर 40-50 के बीच हो जाने से लोगों में दहशत बढ़ी है, लेकिन भास्कर की जांच में खुलासा हुआ कि यह संख्या सही नहीं है। दरअसल कुछ जिलों के हेल्थ अफसरों ने जुलाई-अगस्त में हुई मौतें छिपा दी थीं। दुर्ग और जांजगीर-चांपा जिलों में यह ज्यादा हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि इन्हें मिलाकर कुछ जिलों में कोरोना से हुई 604 मौतें छिपाईं। इन्हें मौतों की कुल संख्या में एडजस्ट करना जरूरी था, इसलिए पिछले 15 दिन से रोजाना 25-30 मौतें अलग से जोड़ी जा रही हैं। इसी वजह से प्रदेश में कुछ दिन से रोजाना होने वाली मौतों का आंकड़ा 40 से 50 के बीच दर्शाना पड़ा है। खुद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी बताया कि पिछले 23 दिन में 733 मरीजों की मौत वास्तविक आंकड़ा नहीं है। बल्कि इनमें लगभग 60 फीसदी लोग जुलाई-अगस्त में ही दम तोड़ चुके थे, लेकिन इन्हें जिलों के रिकार्ड में शामिल नहीं किया गया था। इन्हीं को अब स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में एडजस्ट करने से मौतें बढ़ी नजर आ रही हैं।
भास्कर की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि जुलाई-अगस्त में कुछ जिलों के हेल्थ अफसरों ने मौतों का आंकड़ा कम दिखाने के लिए इन्हें छिपा दिया। इसलिए इन मौतों को स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में शामिल नहीं किया गया। अधिकारियों का तर्क है कि पहले भी जिला मुख्यालयों से मौत की जानकारी आई, लेकिन ब्योरा नहीं होने से के कारण इसे रोजाना जारी होने वाले बुलेटिन में शामिल नहीं कर सके।

अब पूरे दस्तावेज मिल गए हैं, इसलिए इन मौतों को शामिल करना होगा। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि प्रदेश में कोरोना से हुई मौतों का ऑडिट चल रहा है। जो मौतें नहीं बताई जा सकी थीं, उन्हें बारी-बारी से बुलेटिन में शामिल कर रहे हैं। अब तक प्रदेश में कोरोना से मृत्यु दर 0.98 प्रतिशत है। लेकिन छह सौ से ज्यादा शवों को बुलेटिन में शामिल करने के बाद यह दर बढ़कर 1.27 फीसदी तक पहुंच जाएगी। यानी कोरोना की वजह से एक हजार मरीजों में से 12.7 (कुल 13) मरीज ऐसे होंगे, जो बच नहीं पाए।

कई जिलों में बड़ा अंतर
भास्कर ने दस्तावेजों की जांच की तो यह बात भी सामने आई कि रायपुर ही नहीं बल्कि दुर्ग, बिलासपुर, बालोद, धमतरी, रायगढ़ और बस्तर समेत कई जिलों में मौतों के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। अर्थात, मौतों की जो संख्या संबंधित जिलों में सीएमएचओ ने रोजाना जारी की और उसी दिन राज्य के बुलेटिन में मौतों की जो संख्या बताई गई, उसी में खासा अंतर था।

8 दिन के आंकड़ों का अंतर
अक्टूबरकुल मौतेंनई मौतपुरानी मौत
21120408
20501040
19561640
18391029
17140707
16400436
15461630
14331617

10 दिन में 97 मौतें, पर पुरानी जोड़ संख्या 384
प्रदेश में 14 से 23 अक्टूबर तक कोरोना से 384 मौतों का आंकड़ा राज्य के बुलेटिन में जारी किया गया है। पड़ताल के मुताबिक इनमें से वास्तविक मौतों की संख्या केवल 97 है। बाकी 287 मौतें जुलाई-अगस्त की हैं, जिन्हें अब एडजस्ट करते हुए सरकारी बुलेटिन में जोड़ दिया गया।

दुर्ग में सर्वाधिक घालमेल
दुर्ग सीएमएचओ को एनएचएम डायरेक्टर व कोरोना सेल की ओर से मौत की जानकारी सही समय पर देने नोटिस भी जारी किया गया। एसीएस स्वास्थ्य ने भी कलेक्टर के संज्ञान में यह बात लाई थी। इसके बाद भी दुर्ग में जुलाई, अगस्त व सितंबर में हुई मौत का आंकड़ा अभी भी जोड़ा जा रहा है।

"दुर्ग व जांजगीर-जिले के सीएमएचओ मौत की जानकारी नहीं भेज रहे थे। नोटिस के बाद व कलेक्टर को शिकायत के बाद आंकड़े जारी हो रहे हैं। यह कहना संभव नहीं है कि आखिर जानकारी क्यों नहीं भेजी जा रही थी।"
-डॉ. सुभाष पांडेय, मीडिया प्रभारी स्टेट कोरोना सेल

सरकार आंकड़े छिपाना नहीं चाहती, इसलिए आंकड़े एडजस्ट कर रहे
"जो मौतें पहले हो गईं लेकिन रिकार्ड में नहीं लाई गईं, उन्हें अब बुलेटिन में शामिल किया जा रहा है। इससे संख्या ज्यादा दिख रही है। पूर्व में 600 से ज्यादा ऐसी मौतें हुईं, जिन्हें जिलों से सही जानकारी नहीं आने के कारण बुलेटिन में नहीं शामिल किया गया था। सरकार तथ्य छिपाना नहीं चाहती। रिकार्ड सही रहे इसलिए पुराने आंकड़ों को एडजस्ट कर रहे हैं।"
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री

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