नन्हें-मुन्नों का चुनाव, पांचवी का कृष्णा बना PM:बच्चों को चुनावी प्रक्रिया समझाने टीचर ने आजमाया यूनिक आइडिया, मैथ्स के साइन बने चुनाव चिन्ह; इन्हीं से प्रचार और वोटिंग भी

कोरबाएक महीने पहले
वोट वाली स्माइल इस नन्हें चेहरे पर।

कोरबा के गढ़कटरा गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा 3 से पांचवी के बच्चों के बीच चुनाव हुए हैं। सोमवार को चुनाव के नतीजों के बाद जीतने वाले बच्चों ने मंत्री पदों की शपथ ली। इसमें कक्षा 5वीं के कृष्णा PM बन चुके हैं। रमीला गृहमंत्री, महेंद्र खेलमंत्री, अर्जुन पर्यावरण मंत्री, शालू राजस्व मंत्री, सीद्धि स्वास्थ्य मंत्री और हिरमनिया को शिक्षामंत्री बनाया गया है। इन बच्चों का छोटी क्लास के बच्चों ने स्कूल के बागिचे के फूलों से बुके बनाकर स्वागत किया है।

क्लास में चुनाव जीतने वाले बच्चे।
क्लास में चुनाव जीतने वाले बच्चे।

क्लास में सभी बच्चों ने स्टूडेंट्स के साथ स्कूल के भले के लिए काम करने की शपथ ली। स्कूल के टीचर श्रीकांत ने चुनाव जीतने वाले इन बच्चों को इनका काम भी बताया, जैसे स्कूल में पेड़-पौधों की रखवाली करना, होम वर्क पूरा करने में एक दूसरे की मदद, स्कूल में सभी हाथ धोएं ये देखना वगैरह। श्रीकांत ने बताया कि बच्चों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया समझाने के मकसद ने इस तरह से चुनाव की एक्टिविटी स्कूल में की जाती है। बच्चों को भी इसमें काफी मजा आता है।

ये लगी वोट वाली स्याही।
ये लगी वोट वाली स्याही।

नामांकन, चिन्ह बांटे गए और प्रचार भी हुआ
स्कूल के टीचर श्रीकांत ने बताया कि स्कूल में चुनाव पूरी गंभीरता से करवाया गया। बच्चों को हर प्रक्रिया की नॉलेज मिले, इसलिए एक सप्ताह पहले से ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। बच्चों ने प्रत्याशी के रूप में नामांकन जमा किया। नामांकन के दिन ही बच्चों को चुनाव चिन्ह भी दिए गए। हमने स्टूडेंट्स को मैथ्स के चिन्ह जैसे किसी को प्लस किसी को मायनस, किसी को ट्राएंगल किसी को सर्कल इस तरह के चिन्ह बांटे। बच्चों ने खाली वक्त में अपना प्रचार किया एक दूसरे को अपने चिन्ह के बारे में बताया। हमने चुनाव के लिए मतपत्र भी तैयार किया था। इसमें स्टूडेंट अपनी पसंद के कैंडीडेट के नाम के आगे टिक मार्क करके बॉक्स में जमा कर रहा था। वोट डालने वाले बच्चों के बाएं हाथ की तर्जनी में स्याही भी लगाई गई।

वोट देने के बाद सभी बच्चे।
वोट देने के बाद सभी बच्चे।

एक सवाल ने दिया आइडिया
टीचर श्रीकांत ने बताया कि दरअसल, चुनाव के दौरान गांव का यह एकमात्र स्कूल पोलिंग बूथ बना दिया जाता है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। इस वक्त बच्चों को भी यहां आने की मनाही होती है। बड़ी कक्षाओं के बच्चों को पाठ्यक्रम में ही चुनाव प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए यह उत्सुकता का विषय होता है। बच्चे लगातार क्लास में पूछा करते थे कि चुनाव क्या होता है? पोलिंग बूथ के अंदर क्या होता है? इसलिए हमने 2018 के बाद बच्चों के लिए इस सांकेतिक चुनाव की शुरुआत की। कोविड की वजह से बीच में स्कूल बंद हो गया था। अब स्कूल चालू हुए हैं तो हमने चुनाव कराए हैं। पूरी चुनावी प्रक्रिया को सभी बच्चों ने खूब एन्जॉय किया।

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