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छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर से ग्राउंड रिपोर्ट:कोरोना के कारण एंट्री पर लगी पाबंदी, टूटने की कगार पर पहुंचा दोनों राज्यों के बीच सदियों पुराना रोटी-बेटी का रिश्ता

5 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती गांवों के बीच सदियों से चला आ रहा रोटी और बेटी का रिश्ता टूटने की कगार पर है। लाखों लोगों की जान ले चुका कोरोना का संक्रमण यहां चली आ रही परंपराओं को भी लील रहा है। अब तक चाहे पूजा-पाठ हो, जात्रा हो, शादी-ब्याह का मामला हो या इलाज की बात।

सीमावर्ती गांवों के लोग एक-दूसरे प्रदेश में बेरोकटोक आना-जाना करते रहे हैं। लेकिन कोरोनाकाल में आवाजाही पर लगे प्रतिबंध ने सदियों पुरानी व्यवस्था के सामने भी दीवार खड़ी कर दी है। पढ़ें ओडिशा के चालनगुड़ा बार्डर से मोहम्मद इमरान नेवी और सूरज यदु की रिपोर्ट..

सुकमा के लोग हमेशा से इलाज के लिए ओडिशा के मलकानगिरी जाते हैं। अब भी सुकमा के हॉस्पिटल में चाइल्ड स्पेशलिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों की कमी है। सुकमा के लोग मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में इलाज के बदले मलकानगिरी हॉस्पिटल जाना पसंद करते हैं।

मलकानगिरी जाने के लिए चालानगुड़ा बॉर्डर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है तब से ओडिशा सरकार ने यहां लोगों की एंट्री ही बैन कर दी है। यहां इतनी कड़ाई है कि यदि कोई बीमार है और वह कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखाता है तब भी उसे ओडिशा नहीं जाने दिया जाएगा। जबकि छत्तीसगढ़ आने में कोई रोक-टोक नहीं है।

ओडिशा सरकार ने एक विकल्प दिया है कि वे करीब 200 किमी घूमकर मोटू बॉर्डर से मलकानगिरी जा सकते हैं। यहां से भी जाने के लिए कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट होना अनिवार्य है। सुकमा के लोग इस बात से खासे नाराज हैं कि सदियों तक सब एक साथ रहे और आज इस विपदा में वहां की सरकार साथ छोड़ रही है।

ऐसी बेरुखी : सिर्फ इंसानों से डर, अनाज-रसद नहीं रोकेंगे
चालानगुड़ा बॉर्डर शुरू होते ही ओडिशा सरकार का एक अस्थायी तंबू गाड़ा हुआ है। इसमें पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की पूरी टीम तैनात है। भास्कर की टीम ने बॉर्डर पर तैनात अफसरों से सवाल किए तो उन्होंने पहले कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। फिर नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कलेक्टर साहब के निर्देश हैं कि बॉर्डर से किसी भी व्यक्ति को ओडिशा में प्रवेश नहीं दिया जायेगा।

हां यदि कोई अनाज की गाड़ी है या जरूरी रसद है वह जाने दिया जायेगा। हमें स्पष्ट निर्देश हैं कि बीमारों को भी न छोड़ा जाए यदि किसी को मलकानगिरी जाना ही है तो उसे कोंटा की तरफ से मलकानगिरी भेज दें। यह रास्ता 200 किमी लंबा है। आमतौर पर लोग उतनी दूरी तय करने से बचते ही हैं।

चालानगुड़ा बॉर्डर पर ओडिशा सरकार का एक अस्थायी तंबू गाड़ा हुआ है। इसमें पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की पूरी टीम तैनात है। यहां छत्तीसगढ़ के लोगों के आने पर पाबंदी है।
चालानगुड़ा बॉर्डर पर ओडिशा सरकार का एक अस्थायी तंबू गाड़ा हुआ है। इसमें पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की पूरी टीम तैनात है। यहां छत्तीसगढ़ के लोगों के आने पर पाबंदी है।

दोनों तरफ बुड़दी गांव, ओडिशा के बुड़दी के लोग कोरोना जांच यहां कराते हैं चालानगुड़ा बॉर्डर से कुछ दूर पहले छत्तीसगढ़ की सीमा पर बुड़दी गांव है। यहां ओडिशा की ओर भी एक बुड़दी गांव है। भास्कर टीम दोनों गांवों में पहुंची तो यहां पता चला कि ओडिशा के बुड़दी गांव में कोई अस्पताल नहीं है। ऐसे में ओडिशा के लोग छत्तीसगढ़ के बुड़दी गांव में इलाज कराने आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की ओर बुड़दी बॉर्डर पर रोक के नाम पर सिर्फ एक बल्ली रखी है।
छत्तीसगढ़ की ओर बुड़दी बॉर्डर पर रोक के नाम पर सिर्फ एक बल्ली रखी है।

छत्तीसगढ़ के बुड़दी गांव के अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स भगवती ठाकुर ने बताया कि हर रोज बड़ी संख्या में लोग ओडिशा की ओर से यहां कोरोना टेस्ट करवाने आते हैं। हम सभी की जांच कर रहे हैं। हालांकि अभी वहां से कोई पॉजिटिव नहीं निकला है। हमें स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि वहां से कोई पॉजिटिव निकलता है तो उसे इलाज के लिए तत्काल सुकमा भेजा जाये।

छत्तीसगढ़ के बुड़दी से ओडिशा के बुड़दी को हरसंभव मदद दी जा रही है। छत्तीसगढ़ के बुड़दी गांव में अभी छह लोग संक्रमित मिले हैं, इनका इलाज सुकमा कोविड हॉस्पिटल में हो रहा है।

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