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किसान आंदोलन:किसान नेताओं को मंजूर नहीं सर्वोच्च न्यायालय की सुझाई समिति, कहा-तीनों कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं, भारतीय किसान संघ भी असंतुष्ट

रायपुर4 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ मेंं भी किसान संगठन इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित हैं। किसानों के जत्थे दिल्ली बॉर्डर पर जाकर धरने में शामिल हो चुके हैं। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ मेंं भी किसान संगठन इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित हैं। किसानों के जत्थे दिल्ली बॉर्डर पर जाकर धरने में शामिल हो चुके हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी गतिरोध टलने के आसार नहीं
  • किसानों ने कहा, इस फैसले का लक्ष्य किसान आंदोलन को कमजोर करना

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक और समिति के गठन की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। आंदोलन में शामिल किसान संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय की चार सदस्यीय समिति को नामंजूर कर दिया है। किसान संगठनों ने कहा, तीनों कानूनों की वापसी से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं। इधर आरएसएस का आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से असंतुष्ट है।

दिल्ली के सिंघु बार्डर पर छत्तीसगढ़ के किसानों का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान महासभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही ने कहा, केंद्र सरकार से किसानों का दो ही मांग है। पहला तीनों कृषि कानून रद्द करो और दूसरा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी।

केन्द्र की मोदी सरकार इसका समाधान करने में असफल रही है। अब इस असफलता को ढंकने के लिए न्यायालय का सहारा लिया जा रहा है। विद्रोही ने कहा, कानून पर रोक लगने से मोदी की नैतिक हार जरूर हुई है, लेकिन इसका लक्ष्य किसान आंदोलन को कमजोर करना है।

पूर्व भाजपा विधायक वीरेंद्र पाण्डेय ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है लेकिन इन कानूनों पर रोक लगाना समाधान नहीं है। ऐसा करके सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की मदद ही की है। सरकार अब कहेगी कि सर्वोच्च न्यायालय ने कह दिया, कमेटी बना दी फिर भी किसान अड़े हुए हैं। सरकार बचने का रास्ता निकाल रही है।

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा, केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय की आड़ लेकर आंदोलन को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी में जो चार व्यक्ति आए हैं वे कॉर्पोरेट खेती के समर्थक लोग हैं। यह कमेटी किसान विरोधी है, इससे न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। डॉ. ठाकुर ने कहा, हमारा रुख साफ है जब तक तीनों कानून वापस नहीं आंदोलन वापस नहीं होगा।

RSS का भारतीय किसान संघ, कमेटी पर भड़का

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। लेकिन वह कमेटी में प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर भड़क उठा है। भाकिसं की छत्तीसगढ़ इकाई ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय की ओर से घोषित समिति पूरे भारत के किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसमें ICAR के विशेषज्ञ भी नहीं हैं।

भारतीय किसान संघ ने कहा, ये तीनों कानून देश के सभी नागरिकों को प्रभावित करने वाले हैं। ऐसे में इसमें भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों के साथ उपभोक्ता-व्यापारी संगठनों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कृषि कानूनों पर सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा है

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मुख्य न्यायधीश की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले एक कमेटी का भी गठन कर दिया है। यह कमेटी सरकार और किसान संगठनों के बीच कानूनों पर जारी विवाद को समझेगीऔर सर्वोच्च अदालत को रिपोर्ट सौंपेगी।

सर्वोच्च न्यायालय की समिति में कौन है

सर्वोच्च न्यायालय ने जो समिति बनाई है उसमें कुल चार लोग शामिल होंगे। इसमें भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल घनवंत शामिल हैं।

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