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आ गई वैक्सीन:पहली वैक्सीन जिसकी सुरक्षा में पुलिस, टीकाकरण अधिकारी ने भास्कर के लिए लिखी रिपोर्ट- वैक्सीन तो आ गई पर अभी मास्क न भूलें

रायपुर2 दिन पहले
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स्वास्थ्य अमला सुबह 9 बजे से ही अलर्ट था।

वैक्सीन तो आ गई है लेकिन मेरी सलाह है कि अभी लोगों को मास्क नहीं भूलना चाहिए। वैक्सीनेशन कब से शुरू होगा, यह सोचने के बजाय हमारा ध्यान इसी बात पर था कि कोरोना के लिए कौन सी वैक्सीन आएगी, कब तक आएगी। बुधवार को दोपहर 1 बजकर 40 मिनट बजे एयरपोर्ट पर वैक्सीन आ रही, इसकी जानकारी मंगलवार देर रात तक ही मिल पाई। राजधानी रायपुर के लिए ये कई मायनों में एक अहम दिन है, क्योंकि वैक्सीन लाने के बाद हमें इसे रायपुर के स्टेट वैक्सीनेशन स्टोर से तत्काल दूसरे जिलों में भेजनी भी थी। इसलिए हमारी टीम बुधवार को सुबह 9 बजे से वैक्सीन स्टोर में पहुंच गई। सभी जिलों को सूचना दी गई कि तुरंत अपने वैक्सीन वैन भेजें, ताकि उन्हें डिलीवरी दी जा सके। दरअसल हमने पिछले दो दशक में करोड़ों वैक्सीन मंगवाई और रखी। लेकिन बुधवार को कोरोना वैक्सीन के लिए जैसा रोमांच था, वह अद्भुत है। यही वजह थी कि एनएचएम डायरेक्टर प्रियंका शुक्ला समेत विभाग के सारे बड़े अफसरों ने वैक्सीन यहां आने पर पूरी निगाह रखी थी।

डीकेएस अस्पताल के पीछे स्टेट वैक्सीन स्टोर इस पूरे काम के लिए कुछ घंटे में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में अपनी भूमिका निभाने लगा। इस वैक्सीन स्टोर में नया राज्य बनने के बाद से अब तक करोड़ों वैक्सीन आ चुकी हैं। लेकिन कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर ऐसा माहौल पूरे विभाग के लिए भी एक अलग तरह का मौका था। हम महसूस कर रहे थे कि पूरे प्रदेश की तीन करोड़ आबादी की निगाहें इस पर है। जिला पुलिस प्रशासन की टीमें भी सुबह साढ़े 9 बजे के बाद आने लगी, इस बीच वैक्सीन वेन के एयरपोर्ट रवाना होने से पहले एकदम पास के जिलों के वैक्सीन वाहन भी आने लगे। अधिकारियों और पुलिस की टीम मेरे सहित विमान के आने के करीब एक घंटे पहले विवेकानंद एयरपोर्ट पर पहुंच गई।
-डॉ. अमरसिंह ठाकुर, राज्य टीकाकरण अधिकारी

वैक्सीन बाॅक्स में सील-मोहर
राज्य में एक दर्जन से ज्यादा तरह की वैक्सीन आईं, लेकिन कोविशील्ड के लिए हमने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए। वैक्सीन वाहन के साथ पहली बार पुलिस जवान सुरक्षा में लगे। कोल्ड बॉक्स को सील और मुहर लगाकर बंद करने की कवायद भी पहली बार ही की जा रही है। यह सील 16 जनवरी को सेंटरों में अफसरों के सामने खुलेगी। हम ये भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि वैक्सीन निर्धारित तापक्रम में ही स्टोर तक और वैक्सीन बूथ तक पहुंचे। कोल्ड चेन को मेंटेन रखना ही अब पूरे टीकाकरण के दौरान सबकी अहम जिम्मेदारी होगी। इसमें किसी तरह की कोई चूक नहीं हो, ये सभी जिलों को सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
आम लोगों को ज्यादा आसानी
दरअसल, कोरोना महामारी हमारे सामने आई एक अलग तरह की चुनौती रही है। एक ऐसी चुनौती जिसमें हम सब अब भी बहुत सारी बातें लगातार सीख रहे हैं। इसलिए आम लोगों के टीकाकरण की जहां तक बात है, हम तब तक काफी कुछ सीख चुके होंगे और उन्हें ज्यादा आसानी होगी। फिर भी, यही अपील है कि जब तक टीकाकरण सबके लिए शुरू नहीं होता, तब तक मास्क के साथ-साथ हाथ धोने और फिजिकल दूरी जैसी सावधानियां नहीं छोड़ें।

थमेगी कोरोना से मौतों की रफ्तार
कोरोना वैक्सीन का छत्तीसगढ़ पहुंचना, हम सब के लिए राहत की बात है। मुझे उम्मीद है वैक्सीन से महामारी कंट्रोल होगी। दुनियाभर में फैला भय का वातावरण भी दूर होगा। पुलिस के मेरे कई साथी फ्रंटलाइन वॉरियर होने के कारण कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इसका असर उनके पूरे परिवार पर भी पड़ा है। वैक्सीन आने से स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी खासतौर पर सुरक्षित होंगे। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही वैक्सीन की पहुंच बुजुर्ग एवं अन्य वालंटियर तक होगी और लोगों के स्वास्थ पर अच्छा असर पड़ेगा। देश-प्रदेश में महामारी से हो रही मौतों का दौर थमेगा। लॉकडाउन के फलस्वरूप मानसिक तनाव और रोजगार की समस्या से उभरने में सहायता मिलेगी। वैक्सीन आने से लोगों में नई उम्मीद जागी है। समाज के हर वर्ग को इससे फायदा होगा।
-आरके विज, स्पेशल डीजी

कई बच्चों के माता-पिता अब सुरक्षित
कुछ माह पहले वैक्सीन आ जाती तो शायद पिताजी (रिटायर्ड चीफ इंजीनियर रविंद्र यदु) अब भी हमारे साथ होते। उनके अचानक चले जाने से पूरा परिवार अब तक स्तब्ध है। उनकी मृत्यु 1 सितंबर को निजी अस्पताल में हुई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी, ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा था, इसलिए कोरोना टेस्ट हुआ और पाजिटिव निकला। कुछ दिन में उनकी हालत सुधरी, लेकिन घर आने के बाद सांस में फिर तकलीफ होने लगी। दोबारा अस्पताल गए, तब तक लंग्स में इंफेक्शन फैल चुका था। उनकी हालत बिगड़ती गई, कोई दवा न थी और न ही काम आई। अगर वैक्सीन होती तो पिताजी से कोरोना से संक्रमित नहीं होते। हमारे पिता तो नहीं रहे, लेकिन वैक्सीन आई है तो उम्मीद कर सकते हैं कि कई बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया अब नहीं उठेगा।
-रजत यदु, बैरन बाजार

वैक्सीन 29 अप्रैल को एक्सपायर
कोविशील्ड के 27 बॉक्स में पहुंची खेप का निर्माण सीरम ने 1 नवंबर 2020 को ही कर लिया था। इस पर 29 अप्रैल 2021 तक की एक्सपायरी डेट लिखी है। यानी निर्माण के बाद करीब पांच माह तक ही वैक्सीन इस्तेमाल की जा सकती है। थर्माकोल के एक बॉक्स में 15 से ज्यादा आईस पैक के साथ 1200 वॉयल भेजे गए हैं। 5 एमएल के एक वायल से दस डोज लगाए जा सकेंगे। इस तरह 27 बॉक्स में 32,300 वायल यानी 3.32 लाख डोज आए हैं। वायल को वैक्सीन कैरियर बॉक्स में इसी तरह 2 से 8 डिग्री टैंपरेचर के बीच रखना होगा। वैक्सीन बूथ में भी ये इसी टैंपरेचर पर रहेगा। छत्तीसगढ़ को 2.67 लाख खुराक की जरूरत से करीब 65 हजार डोज ज्यादा मिले हैं। हालांकि ये ज्यादा डोज टूट फूट, खराब होने जैसी स्वाभाविक परिस्थितियों के मद्देनजर भेजे जाते हैं।

16 जनवरी को टीकाकरण की लॉचिंग

  • 0.5 की दो अलग-अलग खुराक लेनी जरूरी।
  • 0.5 एमएल की दो खुराक के बाद कोरोना बचाव।
  • पहली के बाद 4 से 6 सप्ताह के भीतर खुराक।
  • 99 बूथ से 16 जनवरी को टीकाकरण की लांचिंग।
  • पहले चरण में हेल्थ-फ्रंट लाइन वर्कर को ही टीके।

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