पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

महानदी जल विवाद:70 साल से हीराकुंड की वजह से हमारे 36 गांव डूबे, न पानी मिल रहा न बिजली

रायपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • नदी जल विवाद पर हर माह हो रही सुनवाई, ट्रिब्यूनल की बैठक तीन को

राकेश पाण्डेय | महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा कहा जाता है। राज्य में खेती- किसानी से लेकर उद्योग और अर्थव्यस्था में इसकी महती भूमिका है, लेकिन 70 साल पहले महानदी पर बने हीराकुंड बांध का लाभ छत्तीसगढ़ को नहीं मिल रहा है। इससे न तो राज्य को पानी मिल रहा है और न ही बिजली। महानदी के पानी के उपयोग को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 4 दशकों से विवाद है। फिलहाल, मामला ट्रिब्यूनल में है और लगभग हर महीने इसकी सुनवाई भी हो रही है लेकिन अभी तक मसला सुलझाया नहीं जा सका है। दोनों राज्य अपनी दावेदारी को पुख्ता करने के लिए ट्रिब्यूनल के सामने अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होनी है। इसे ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले दिनों लीगल टीम के सदस्यों के साथ बैठक की और जल के उपयोग को लेकर राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के लिए कहा। बता दें कि महानदी कछार पांच राज्यों छत्तीसगढ़, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड के बीच है। इस आधार पर ही सभी राज्य इसके पानी पर अपना दावा करते हैं लेकिन छत्तीसगढ़ व ओड़िशा राज्य की दावेदारी सबसे ज्यादा है। केवल इन दो राज्यों में ही महानदी का कैचमेंट एरिया 99.5 प्रतिशत है। इसमें से छत्तीसगढ़ में 53 प्रतिशत और ओड़िशा में 46.5 प्रतिशत कैचमेंट एरिया आता है।

इस साल दो दर्जन गांवों में पानी घुसा
हीराकुंड बांध बनने के कारण पिछले 70 सालों से छग के 36 गांव आंशिक या पूर्ण रूप से डूबे हुए हैं। इसके अलावा भारी बारिश और डैम का गेट उचित समय पर नहीं खोले जाने से रायगढ़ जिले के दो दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित होते रहे हैं। पिछले महीने ही रायगढ़ के सरिया, पुसौर, सारंगढ़ समेत लगभग 25 गांवों में पानी घुस गया। दूसरी तरफ, जांजगीर चांपा जिले के गांव हर साल बैक वॉटर की वजह से डूब में आ जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में होने के बाद भी पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि महानदी के कैचमेंट एरिया का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में होने के बावजूद सिंचाई के लिए इसके पानी का उपयोग राज्य में पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। कई जिलों के किसान मुश्किल से एक फसल ले पा रहे हैं जबकि वहीं ओडिशा के निचले इलाकों में रहने वाले किसान दो से तीन फसल ले रहे हैं। इसके अलावा बरसात में ज्यादा पानी गिरा और ओडिशा ने अपने अधिकार क्षेत्र के डैम के गेट नहीं खोले तो कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है।

पानी मिले तो राज्य में बढ़ेगा सिंचाई का रकबा : चौबे
कृषि एवं सिंचाई मंत्री रविंद्र चौबे का कहना है कि फिलहाल हीराकुंड में 60 हजार एमसीएम पानी है। यदि राज्य को 30 हजार एमसीएम पानी मिले तो पैरी, अरपा और गंगरेल की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा खारंग के पूरा होने पर 10 हजार एमसीएम पानी का उपयोग हो सकता है। सिंचाई के लिए गंगा बेसिन में रिहंग, इंद्रावती नदी पर बोधघाट और शेष प्रोजेक्ट महानदी बेसिन में है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जाने का प्रोग्राम बन सकता है। साथ ही आराम तथा आमोद-प्रमोद संबंधी कार्यक्रमों में भी समय व्यतीत होगा। संतान को कोई उपलब्धि मिलने से घर में खुशी भरा माहौल ...

और पढ़ें