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भाजपा में 35 का फेर:शर्त नहीं हटी तो बाहर हो जाएंगे दर्जनों युवा, प्रदेश व जिले में 35 की उम्र पार कार्यकर्ताओं को जगह नहीं

रायपुर4 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

भाजपा युवा मोर्चा के लिए 35 साल की अधिकतम आयु सीमा तय होने के बाद 150 से ज्यादा पदाधिकारियों पर तलवार लटक गई है। इनमें पिछली कार्यकाल के प्रदेश पदाधिकारी व जिलाध्यक्ष शामिल हैं। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की टीम में दो लोगों को ही जगह मिल सकी, इसलिए अब युवा मोर्चा में यह शर्त हटाकर 35 साल से ज्यादा के पदाधिकारियों को भी शामिल करने की मांग की जा रही है, जिससे कुछ लोग एडजस्ट हो सकें। प्रदेश में विपक्ष की भूमिका में आने के बाद अब भाजपा का संविधान कार्यकर्ताओं के आड़े आ रहा है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने 35 साल के ही कार्यकर्ता को युवा मोर्चा की कमान देने की शर्त रख दी। ऐसे में अमित साहू को मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन कार्यकारिणी को लेकर असमंजस है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछली टीम में कुछ कार्यकर्ता ही 35 साल से कम के थे। बाकी सभी की उम्र ज्यादा थी। नई टीम में यदि यह शर्त रहेगी तो इन युवाओं को जगह नहीं मिलेगी। इसके पीछे एक और बड़ी वजह यह है कि 21 जिलों की कार्यकारिणी बन चुकी है। ऐसे में जिलों में भी मौका नहीं मिल पाएगा।

दूसरे मोर्चा-प्रकोष्ठ में जगह बनाने की कोशिश
युवा मोर्चा के जिन कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिली है, उन्हें 50 से ज्यादा काफी सक्रिय थे। संगठन के नेताओं का भी मानना है कि इन्हें कोई सक्रिय पद नहीं मिलेगा तो निराशा होगी। विपक्ष के रूप में अभी भाजपा को सक्रिय रूप में भागीदारी निभाने वाले कार्यकर्ताओं की जरूरत है, इसलिए पहले शर्तों में छूट के लिए कोशिश की जाएगी। छूट नहीं मिलने पर दूसरे मोर्चा-प्रकोष्ठ में एडजस्ट करने की कोशिश की जाएगी। मरवाही उपचुनाव के बाद इसे लेकर संगठन स्तर पर कवायद शुरू की जाएगी।

तीन जिलों में अब तक अध्यक्ष तय नहीं
भाजपा में अभी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने अपनी टीम बनाने के बाद राजधानी समेत कई जिलों के अध्यक्ष तय किए, लेकिन अब तक तीन जिलों में नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसमें रायपुर ग्रामीण, दुर्ग और भिलाई संगठन जिले शामिल हैं। रायपुर ग्रामीण में सांसद सुनील सोनी तो दुर्ग-भिलाई में राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय, लोकसभा सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय की पसंद-नापसंद के कारण नाम तय करने में दिक्कत आ रही है। नई टीम नहीं होने के कारण तीनों जिलों में संगठन की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

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