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  • In Chhattisgarh, Assets Worth 5.45 Crores Of Retired Chief Engineer Are Attached By ED, 55.95 Lakhs Found In Bank Accounts Also Came In Action

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ED की बड़ी कार्रवाई:छत्तीसगढ़ में रिटायर्ड मुख्य अभियंता की 5.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क, बैंक खातों में मिले 55.95 लाख भी आए जद में

रायपुरएक महीने पहले
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प्रवर्तन निदेशालय केंद्र सरकार की एजेंसी है। यह गैर कानूनी मनी ट्रांसफर पर नजर रखती है। कार्रवाई करती है। - Dainik Bhaskar
प्रवर्तन निदेशालय केंद्र सरकार की एजेंसी है। यह गैर कानूनी मनी ट्रांसफर पर नजर रखती है। कार्रवाई करती है।
  • जल संसाधन विभाग से रिटायर हुआ था अफसर, चार जिलों में संपत्ति
  • एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर के बाद मामले में हुई थी ED की एंट्री

छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिंचाई विभाग के रिटायर्ड मुख्य अभियंता रामानंद दिव्य की 5.45 करोड़ की संपत्ति को कुर्क कर लिया है। इसमें खेती की जमीन के साथ-साथ आवासीय भूखंड भी हैं। यह संपत्ति रायपुर के अलावा बिलासपुर, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों में हैं। रिटायर्ड मुख्य अभियंता के बैंक खातों में मिले 55 लाख 95 हजार रुपए भी कुर्की की जद में आए हैं।

ED ने यह कार्रवाई मनी लांड्रिंग कानून के तहत की है। एंटी करप्शन ब्यूरो की तरफ से दर्ज FIR को आधार बनाते हुए ED ने मामले की जांच की थी। FIR में अफसर और उसके परिजनों की 5 करोड़ 45 लाख 46 हजार 381 रुपए की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा किया गया था। जांच में पता चला कि जल संसाधन विभाग के इस अफसर ने ज्यादातर संपत्ति अपनी पत्नी के नाम से खरीदी थी। यही नहीं, मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों के जरिए हासिल रकम से अफसर ने अपने नाम से भी प्रापर्टी खरीदी थी।

झांसा देने, रिश्तेदारों को गिफ्ट देकर वापस लिया

बताया गया कि कुछ मामलों में अफसर ने रिश्तेदारों के बैंक खातों में नगद पैसे जमा करवाए। फिर उसे उपहार या असुरक्षित ऋण के रूप में अपने खाते में जमा कर उससे नई संपत्ति खरीदी। कुछ संपत्तियों को खरीदने के लिए फर्जी बिक्री पत्र बनाकर उसके जरिए मिले पैसों को रिकार्ड में लिया। एजेंसियों को धोखा देने के लिए संपत्तियों की खरीदी-बिक्री थोड़े-थोड़े अंतराल पर करना दिखाया गया। ऐसा इसलिए कि पूंजी को ब्लैक मनी न बताया जा सके।

NRDA से 66 लाख का मुआवजा मिलना बताया था

जांच में पता चला, 2.13 करोड़ रुपए का भुगतान संपत्तियों की खरीदी के लिए नगद किया गया। इसके अलावा 66 लाख रुपए का भुगतान नगद करके विभिन्न संपत्तियों का पंजीयन कराने के लिए विक्रय दस्तावेजों में लिखी रकम के अतिरिक्त किया गया। इन संपत्तियों को फिर नया रायपुर विकास प्राधिकरण यानी NRDA ने मुआवजा देकर अधिग्रहीत किया गया। जांच में पोल खुल गई। नगद 66 लाख की स्रोत के बारे में रामानंद दिव्य और उसके परिवार के सदस्य कोई उचित जानकारी नहीं दे सके।

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