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राख से खाक में मिलती जिंदगी:NTPC के राखड़ बांधों से आसपास के कई गांवों में जीना मुश्किल, 14 साल से ग्रामीण बीमारियों से जूझ रहे हैं

बिलासपुर6 महीने पहले
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तस्वीर में कोहरा नहीं बल्कि राख है। इसी राख ने लोगों की जिंदगी में परेशानी खड़ी की है। ये सीपत इलाके का हाल है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर में कोहरा नहीं बल्कि राख है। इसी राख ने लोगों की जिंदगी में परेशानी खड़ी की है। ये सीपत इलाके का हाल है।

सीपत के आसपास बसे गांवों में फिर से NTPC के खिलाफ आंदोलन का माहौल बन रहा है। दरअसल, यहां पावर प्लांट के तीनों राखड़ डैम पूरी तरह भर जाने के कारण राख की आंधियों ने तबाही मचा दी है। सीपत NTPC के पास स्थित रॉक, रलिया और सुखरीपाली के चारों तरफ लगभग दो एकड़ के क्षेत्रफल में तीन राखड़ डेम का निर्माण कराया गया है।

गर्मी आते ही इस इलाके के रॉक, रलिया, हरदाडीह, भिलाई, गतौरा, सुखरीपाली, कौड़िया, देवरी, एरमशाही, मुड़पार सहित आसपास के कई गांवों में राख की आंधियां चलती हैं। जरा सी हवा के चलते ही पूरे इलाके में राखड़ की धुंध छा जाती है फिर 10 फीट की दूरी तक में देखना मुश्किल हो जाता है। इस राख ने पूरे क्षेत्र के लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

ग्राम पंचायत रॉक के लगातार दो बार सरपंच रहे कृष्णकुमार राठौर का कहना है कि NTPC प्रबंधन ने हम लोगों से विकास का वादा करके हमारी जमीन ले ली और नरकीय जिंदगी जीने के लिए छोड़ दिया। NTPC ने गांव में विकास तो नहीं किया लेकिन गांव में तीन तीन राखड़ डेम बनाकर लोगों को बीमार बना दिया है। यहां ज्यादातर लोगों को अस्थमा, खांसी, सर्दी, बुखार के अलावा सांस लेने में दिक्कत है। उड़ती राखड़ से निजात दिलाने क्षेत्र के ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार NTPC प्रबंधन और जिला प्रशासन से बात करते रहे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पूर्व सरपंच का कहना है कि लगता है 2008 के आंदोलन को फिर से दोहराना पड़ेगा, तब कहीं कुछ सुनवाई होगी। 2008 में कई गांवों के ग्रामीणों ने NTPC का प्रोडक्शन तकरीबन ठप कर दिया था।

14 वर्षों से झेल रहे है समस्या

NTPC के पावर प्लांट के निर्माण के बाद 14 साल पहले 2007 में प्रभावित ग्राम रॉक, रलिया और सुखरीपाली में तीन राखड़ डैम का निर्माण किया गया। विद्युत उत्पादन में इस्तेमाल किये गए कोयले के जलने के बाद बची हुई राख को पानी मिलाकर पाइप लाइन के माध्यम से इन्ही राखड़ डैम में डंप किया जा रहा है। तब से आज तक राखड़ की इस आंधी का प्रकोप झेलना पड़ रहा है।

क्या कहता है पर्यावरण विभाग

पर्यावरण विभाग के नियमानुसार NTPC को राखड़ डेम में राख के साथ गर्मी के दिनों में पानी भी डालना चाहिए ताकि राखड़ ना उड़े। इसके साथ प्रभावित गांवों में सफाई और पर्यावरण संरक्षण के उपाय करना चाहिए लेकिन NTPC के द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। NTPC की AGM के श्रीलता का कहना है कि इस विषय में कुछ तो किया जा रहा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी दूसरे अधिकारी दे सकते हैं।

राख से होती है कई तरह की बीमारियां

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामकृष्ण कश्यप के अनुसार राख हमारे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इससे आंखों की परेशानी सांस, दमा, अस्थमा, एलर्जी के अलावा न्यूयोमोकोनोसिस जैसी जानलेवा बीमारी भी होती है। डॉक्टर ने बताया कि न्यूयोमोकोनोसिस बीमारी से फेफड़ा सूख जाता है और अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।