बुजुर्ग दंपती ने पहले ही सुन ली मौत की आहट:गांव के पंडित को बुलाकर गीता सुनी और दान भी किया; पहले पति फिर 24 घंटे बाद पत्नी भी चल बसी

जांजगीर6 महीने पहले
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तस्वीर शीतला प्रसाद और उनकी पत्नी की है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर शीतला प्रसाद और उनकी पत्नी की है।

जांजगीर के एक गांव की घटना लोगों को हैरान कर रही है। यहां रहने वाली बुजुर्ग दंपती को अपनी मौत का पता था। उन दोनों ने एलान किया कि अब उनका वक्त हो चुका है। दोनों ने पंडित को बुला कर गीता सुनी, दान किया। इसके बाद सोने चले गए। सोने से पहले बुजुर्ग ने अपने परिजनों से कहा कि ये उनकी आखिरी नींद है और वे चल बसे। घटना के 24 घंटे बाद बुजुर्ग की पत्नी ने भी घरवालों को बुलाया और कहा कि वो अब चंद घंटों की मेहमान है। परिवार के लोगों को जीवन अच्छी तरह से बिताने की नसीहत दी और उनका भी निधन हो गया। मामला जांजगीर-चांपा जिले के बनारी गांव का है।

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बनारी गांव जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर है, यहां रहने वाले शीतला प्रसाद पांडेय (80 वर्ष) और उनकी पत्नी द्रौपदी बाई रहते थे। शीतला प्रसाद पांडेय रिटायर्ड शिक्षक थे। रामशंकर पांडेय और गोपाल प्रसाद पांडेय इनके दो और भाई हैं। शीतला प्रसाद पांडेय की कोई संतान नहीं है। रिटायरमेंट के बाद वे गांव में ही रहते थे। बीते गुरुवार की रात को शीतला प्रसाद पांडेय को अपनी मौत का पूर्वाभास हुआ। उन्होंने अपने भतीजे से गांव के पंडित राकेश तिवारी को फोन कर बुलवाया। शीतला प्रसाद ने उनसे कहा कि तबीयत ठीक नहीं लग रही हैं, वे उन्हें गीता सुना दें।

पत्नी ने परिवार के लोगों से की आखिरी मुलाकात
राकेश तिवारी ने शीतला प्रसाद गीता सुनाने के लिए संकल्प कराया। शीतला प्रसाद गंगाजल, अक्षत वगैरह लेकर बैठे। गीता सुनने के बाद उन्होंने गंगाजल पिलाने का आग्रह किया तो घर के सभी लोगों ने गंगाजल और तुलसी भी खिलाया। शीतला प्रसाद ने गीता सुनने के बाद पंडित तिवारी को दान दिया। इसके बाद पलंग पर बैठ गए। घर के अन्य सदस्य भी तब तक इकट्‌ठा हो चुके थे। उन्होंने कह दिया कि अब उनका समय पूरा हुआ। सभी घर वालों को हमेशा लोगों की मदद करने की सीख देकर वो सो गए और वे फिर नहीं उठे।

उधर, पति की मौत के 24 घंटे के अंदर शुक्रवार की रात को उनकी पत्नी द्रौपदी बाई को भी अपनी मौत का एहसास हो गया। पंडित राकेश तिवारी ने बताया कि शुक्रवार की रात उन्होंने अपने घर की महिलाओं और अन्य सदस्यों को बुला कर बताया कि घर में कौन सा सामान कहां पर है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे क्रिया कर्म में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। सुबह घर वाले उन्हें उठाने कमरे में गए लेकिन उनकी भी भी सांसें थम चुकी थीं।

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