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झीरम घाटी हत्याकांड:एसआईटी के सामने बयान देंगे कांग्रेस नेता दौलत रोहरा; एनआईए को बयान देने से इनकार किया

रायपुर7 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में हुए झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने पूछताछ के लिए कांग्रेस नेता दौलत रोहरा को भिलाई तलब किया है। जाने से पहले रेहड़ा ने कहा, वे एनआईए को बयान देना चाहते थे, लेकिन वो तैयार नहीं थे। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में हुए झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने पूछताछ के लिए कांग्रेस नेता दौलत रोहरा को भिलाई तलब किया है। जाने से पहले रेहड़ा ने कहा, वे एनआईए को बयान देना चाहते थे, लेकिन वो तैयार नहीं थे।
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच के लिए गठित की है एसआईटी, बयान के लिए रोहरा को नोटिस भेजा था
  • भिलाई जाने से पहले रेहड़ा ने कहा- एनआईए को बयान देना चाहता था, लेकिन पहले उन्होंने मना किया

छत्तीसगढ़ में हुए झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने पूछताछ के लिए कांग्रेस नेता दौलत रोहरा को भिलाई तलब किया है। जाने से पहले रेहड़ा ने कहा, वे एनआईए को बयान देना चाहते थे, लेकिन वो तैयार नहीं थे। इसके बाद मैंने बयान देने से मना कर दिया था।

दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गठित एसआईटी ने दौलत रोहरा को बयान देने के लिए नोटिस भेजा था। इसके बाद वे मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित कंट्रोल रूम पहुंचे थे। वहां से उच्चाधिकारियों ने उन्हें भिलाई तलब किया है। इसके बाद रोहरा ने कहा कि वह बयान देने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें अब भिलाई ले जाया जा रहा है।

एनआईए ने क्लोजिंग रिपोर्ट पेश की
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता रोहरा ने कहा, झीरम घाटी मामले में जांच के लिए हमने एनआईए को बयान देना चाहा था, लेकिन उस वक्त एनआईए ने हमारा बयान नहीं लिया। उसने अपनी क्लोजिंग रिपोर्ट पेश कर दी थी। इसके बाद हम हाईकोर्ट गए। फिर एनआईए को बयान लेने के लिए कहा गया, लेकिन तब हमने उन्हें मना कर दिया था।

प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल समेत 29 हुए थे शहीद
25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने एंबुश लगाया था, जिसमें राज्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता मारे गए थे। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के अलावा कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर कहलाने वाले महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत 29 लोग शामिल थे। कांग्रेस को इस हमले के पीछे राजनैतिक कनेक्शन का शक है।

अब तक जांच में

  • एनआईए ने 88 नक्सलियों की लिप्तता बताई थी
  • 24 सितंबर 2014 को इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
  • 28 सितंबर 2015 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 30 लोगों को शामिल किया गया।

सरकारी एजेंसियों की खींचतान में उलझी जांच
एनआईए ने करीब 3 दर्जन नक्सलियों को आरोपी बनाया था। निष्कर्ष में कहा था, अपना आतंक फैलाने के लिए इस तरह की वारदातें करते हैं। पहली चार्जशीट पेश होने के बाद डेढ़ साल पहले प्रदेश में सरकार बदली। कांग्रेस सरकार ने इसकी जांच के लिए एसआईटी बनाकर झीरम के दस्तावेज मांगे। एनआईए ने दस्तावेज देने के बजाय खुद दूसरी जांच शुरू कर दी।

कांग्रेस ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी
कांग्रेस शुरू से एनआईए जांच पर अंगुलियां उठा रही थी। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। तब प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार ने जस्टिस प्रशांत मिश्रा के नेतृत्व में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया। साथ ही सीबीआई जांच की सिफारिश भी की, लेकिन केंद्र ने यह कहते हुए मना कर दिया कि एनआईए जांच कर चुकी है। इसलिए सीबीआई जांच नहीं कर सकती।

राज्य सरकार ने एनआईए जांच में गिनाई थीं खामियां
राज्य सरकार ने एनआईए जांच में खामियां गिनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्‌ठी लिखी थी। साथ ही केस की जांच एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) से कराने और केस को ट्रांसफर करने की मांग की थी। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को लिखे पत्र में बताया गया था कि अब तक की एनआईए जांच में बड़े षड्यंत्र को नजरंदाज किया गया है।

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