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जांच सेंटर कवर्धा में, डॉक्टर भिलाई में:प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर के कर्मचारी HRCT टेस्ट ई-मेल पर भेजते हैं, फिर बनती है रिपोर्ट; जांच के 1870 रुपए तय, लेते हैं 2100

​​​​​​​कवर्धा6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के कवर्धा में जांच के तय रेट से ज्यादा वसूलने पर प्रशासन की टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में जांच के तय रेट से ज्यादा वसूलने पर प्रशासन की टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा।

छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच जांच के नाम पर लूट और धोखाधड़ी का धंधा भी जारी है। कवर्धा में एक ऐसा डायग्नोस्टिक सेंटर भी है, जहां जांच तो होती है, लेकिन डॉक्टर नहीं है। मरीज की HRCT टेस्ट कर्मचारी भिलाई में बैठे डॉक्टर को E-mail पर भेजते हैं। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर मरीज को दी जाती है। एक मरीज की शिकायत के बाद सोमवार को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेंटर पर छापा मारा है।

सरकार के तय रेट से भी ज्यादा वसूल रहा डायग्नोस्टिक सेंटर
शहर के दर्रीवारा में BSR डायग्नोस्टिक सेंटर हैं। संक्रमण के चलते यहां HRCT (सीटी स्केन) जांच कराने वाले मरीजों की भीड़ लगी रहती है। सरकार की ओर से इस जांच के लिए 1870 रुपए निर्धारित किए गए हैं। आरोप है कि डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज से 2100 रुपए लिए जा रहे हैं। कर्मचारी कहते हैं कि इसमें 230 रुपए स्केन फिल्म के हैं। वहीं, भिलाई से रिपोर्ट आने के चलते मरीजों को 5-5 घंटे इंतजार करना पड़ता है।

जांच हो रही कवर्धा में, लेटर हेड पर पता बेहरनपुर का
मनमाने दाम की वसूली को लेकर मरीजों ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर कवर्धा तहसीलदार मनीष वर्मा और स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा। इस दौरान पता चला कि जांच के बाद जिस लेटर हेड पर रिपोर्ट मरीजों को दी जा रही है, उसमें कवर्धा की जगह बेहरनपुर का पता लिखा मिला है। इसे भी टीम ने गलत माना है। हालांकि उनका कहना है कि सेंटर में टेक्नीशियन है और सेंट्रलाइज सिस्टम है।

इसलिए करवाया जा रहा है HRCT टेस्ट
कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए मरीज की अलग-अलग तरह से जांच की जा रही है। इसमें एंटीजन, ट्रूनॉट और RT-PCR भी शामिल है। अब ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिनमें इन टेस्ट में निगेटिव होने के बावजूद संक्रमण के लक्षण दिखाई दे रहे। ऐसे में डॉक्टर इन मरीजों को HRCT कराने की सलाह दे रहे हैं। इस कारण सरकारी अस्पतालों में भीड़ होने के चलते तमाम मरीज जांच कराने प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर भी पहुंच रहे हैं।

जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी, कार्रवाई होगी
कवर्धा के तहसीलदार मनीष वर्मा ने बताया- शासन की ओर से निर्धारित रेट से ज्यादा राशि सेंटर ले रहा था। मौके पर मंत्रालय से जानकारी ली गई, तो पता चला कि 1870 रुपए में स्कैन फिल्म भी देनी है। जबकि मरीजों से 2100 रुपए लिए जा रहे थे। कवर्धा सेंटर में लोगों का जांच की जाती है, लेकिन रिपोर्ट दूसरे शहर के लेटर पैड में बनाकर देते थे, जो गलत है। इसे बंद कराया गया है। जांच रिपोर्ट कलेक्टर के पास भेज दी है। कार्रवाई की जाएगी।

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