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जंगल सफारी में नया आकर्षण:रायपुर के जू में लोमड़ी, सियार, काला हिरन, कोटरी, नीलगाय और लकड़बग्घों के लिए नया बाड़ा तैयार

रायपुरएक वर्ष पहले
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नवा रायपुर का जंगल सफारी छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार है। - Dainik Bhaskar
नवा रायपुर का जंगल सफारी छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार है।
  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निवास कार्यालय से ही किया लोकार्पण
  • जंगल सफारी में अब कुल बाड़ों की संख्या 18 तक पहुंची

नवा रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी और जू में नया आकर्षण जुड़ गया है। सफारी प्रबंधन ने वहां लोमड़ी, सियार, चौसिंगा, काला हिरण, कोटरी, नीलगाय तथा लकड़बग्घे के लिये नया बाड़ा बनाया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार शाम को अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इन बाड़ों का लोकार्पण किया। इन्हें मिलाकर वर्तमान में जंगल सफारी में बाड़ों की संख्या 18 हो गई है। जंगल सफारी में ऐसे 37 बाड़े बनाए जाने हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- पर्यावरण और प्रकृति के सम्मान के साथ विकास हमारी प्राथमिकता है। विलक्षण जैव-विविधता हमारी पहचान है। इस पहचान को आगे बढ़ाने के लिए वन्य प्राणियों का संरक्षण जरूरी है। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा, जंगल सफारी और जू का निर्माण वन्य प्राणियों के व्यवस्थित प्रबंधन तथा प्राकृतिक परिवेश को बनाए रखने के लिए किया गया है। इससे विलुप्तप्राय वन्य प्रजातियों के संवर्धन तथा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सैलानियों को विभिन्न वन्य प्राणियों को नजदीक से देखने का बेहतर मौका उपलब्ध होगा।

लोकार्पण समारोह में कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, चन्द्र देव राय, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) पीवी नरसिंहाराव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

पिछले साल बने थे 11 बाड़े

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2019 में 5 अक्टूबर को जंगल सफारी में 11 बाड़ों का लोकार्पण किया था। इनमें रायल टाइगर, लायन, लेपर्ड, सफेद बाघ, कछुआ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल, ऊदबिलाव, गोह, क्रोकोडायल तथा वन भैंसा का बाड़ा शामिल था।

200 हेक्टेयर का जंगल

नवा रायपुर का नंदनवन जंगल सफारी एवं जू में नैसर्गिक वन के साथ-साथ लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 1978-80 के मध्य रोपित किए गए विभिन्न प्रजातियों के पौधे आज प्राकृतिक वन के रूप में विकसित हो चुके हैं। इसमें लगभग 70 प्रजातियों के पेड़-पौधे, 12 विभिन्न प्रजातियों के वन्य प्राणी, 18 सर्व वर्ग के प्राणियों के साथ-साथ लगभग 76 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी मौजूद हैं।

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