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विवाद:व्याख्याताओं की पदोन्नति में नया पेंच, नए नियमों का विरोध शुरू

रायपुर8 महीने पहले
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  • यूनियनों की राजनीति में हो रहा हजारों व्याख्याताओं का नुकसान

बरसों से लंबित व्याख्याताओं की पदोन्नति में नए-नए पेंच सामने आ रहे हैं। हेडमास्टर कैडर के शिक्षकों का दावा है कि नए नियम से किसी व्याख्याता की सीनियारिटी नहीं मारी जा रही। दूसरी ओर व्याख्याता तर्क दे रहे हैं कि किस तरह नियमों में बदलाव कर उनका हक छीना जा रहा है। शिक्षा विभाग 15-20 फीसदी शिक्षकों ने लाभ लेने व्याख्याताओं के बड़े कैडर की वरिष्ठता को नुकसान पहुंचाया है। जिन्होंने कभी हाई या हायर सेकेंडरी स्कूलों में अध्यापन नहीं किया वे उन स्कूलों में प्राचार्य बनने की जुगत में हैं। नए पदोन्नति नियमों का विरोध कर रहे शिक्षकों का कहना है कि राजपत्र 2019 में कुल 100 प्रतिशत पदों में से 25 फीसदी प्रधानपाठक के लिए आरक्षित किया जाना अनुचित और आपत्तिजनक है। इसका आधार है कि सभी जिलों में प्रधानपाठक पद पर पदांकन अलग अलग वर्षों में किया गया है। अतः इनकी संभाग स्तर पर सम्मिलित वरिष्ठता सूची नहीं बनाई जा सकती। यहां तक कि एक ही समय के यूडीटी अलग-अलग समय पर प्रधानपाठक बने हैं, और बहुत से यूडीटी को तो प्रधानपाठक बनाया ही नहीं गया और वो व्याख्याता पद पर पदोन्नत हो गए। इसी तरह प्रधानपाठक का कार्यक्षेत्र, प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक अनुभव कभी भी हायर सेकेंडरी का नहीं रहा है। और ना रहेगा, अतः अलग पदोन्नति प्रतिशत निर्धारण कर अनुभवी नियमित व्याख्याताओं को सुपरशीट कर जंपिंग प्रमोशन देना असंगत और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। पूर्व के वर्षों में तत्कालीन नियमित यूडीटी हायर सेकंडरी के अपने स्नातकोत्तर विषय के अध्यापन अनुभव से वंचित ना होने की इच्छा के कारण प्रधानपाठक पद पर नहीं गए। निरंतर हायर सेकेंडरी में कार्यरत रहे। ये सभी वर्तमान प्रधानपाठकों से वरिष्ठ हैं। उनका प्रधानपाठक पद पर पदोन्नति ना लेना तत्कालीन राजपत्रों के नियमों के अनुकूल था। परंतु इतने वर्षों बाद सेवा नियमों को परिवर्तित कर ऐसी स्थिति उत्पन्न की गई है, जिससे उनकी पदोन्नति ना हो सके। टी संवर्ग (ट्रायवल संवर्ग )में प्रधानपाठक से प्राचार्य पदोन्नति पहले से ही विवादित है। फिर भी इसे ई संवर्ग (एजुकेशन संवर्ग) में लागू किया गया है।

क्या कहते हैं यूनियन लीडर
"पूर्व के राजपत्र जो मार्च तक प्रदेश में लागू थे, इनमें प्रधानपाठक के पद को प्राचार्य पदोन्नति हेतु मान्य नहीं किया गया था। इसे षड्यंत्रपूर्वक प्रस्तावित कर राजपत्र में शामिल कराया है। इसकी गहन जांच होनी चाहिए कि इसमें कौन शामिल हैं।"
- दिलीप झा, नियमित व्याख्याता संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष

"हेड मास्टरों को पदोन्नति में शामिल करने से किसी व्याख्याता की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी। कुछ व्याख्याता भ्रम फैला रहे हैं। चूंकि एलबी शिक्षकों का संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ है। अतः उनकी वरिष्ठता शासकीय सेवा में जुलाई 18 से गणना की जाएगी।"
- राकेश शर्मा, छत्तीसगढ़ व्याख्याता संघ के प्रांताध्यक्ष

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