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कोरोनाकाल में परेशानी:प्राइवेट स्कूलों के डेढ़ लाख टीचर्स- ऑफिस स्टाफ को महीनों से वेतन नहीं

रायपुरएक महीने पहले
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  • स्कूल प्रबंधन- पालकों के बीच पिस रहे शिक्षक

प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों और पेरेंट्स के बीच फीस को लेकर चल रहे विवाद गंभीर मोड़ पर है। फीस के बिना कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी है। इन सबके बीच निजी स्कूलों के शिक्षक व आफिस स्टाफ पिस रहे हैं। उन्हें चार-पांच महीनों से तनख्वाह नहीं मिली है। उनका गुजर-बसर मुश्किल होता जा रहा है। इधर, बाल संरक्षण आयोग हरकत में आया है। उसने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। उधर प्राइवेट और अनुदान प्राप्त स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर नौकरी छोड़ने का दबाव प्रबंधकों द्वारा बनाया जा रहा है। बरसों से नौकरी रहे शिक्षकों को ऑनलाइन न पढ़ा सकने पर भी दबावपूर्वक त्यागपत्र मांगे जा रहे हैं। ऐसे करीब आठ हजार स्कूलों में एक लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। शिक्षक संघों की चुप्पी ने उनका दर्द बढ़ा दिया है। दरअसल कोरोना की वजह से मार्च में ही स्कूलों में ताले लग गए। मार्च -अप्रैल का वेतन भी शिक्षकों को नहीं मिला। ज्यादातर स्कूल गर्मी की छुट्टी की वजह से मई-जून का वेतन शिक्षकों को नहीं देते हैं। जबकि वे पालकों से फीस पूरी लेते हैं। इस तरह अब छह महीने गुजर गए हैं। हाल में सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को ट्यूशन फीस लेने की छूट दी है, लेकिन इस पर भी विवाद चल रहा है। शिक्षकों ने बताया कि गिने-चुने प्राइवेट व कैथोलिक स्कूलों ने ही अपने शिक्षकों को तीस से पचास फीसदी तक वेतन दिया है। जिस परिवार में केवल शिक्षक की कमाई पर ही परिवार निर्भर है उनका बुरा हाल है। वे बेहद तनाव में हैं। ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर प्रबंधनों को छंटनी करने का बहाना मिल गया है। वे जो शिक्षक ऑनलाइन नहीं पढ़ा पा रहे हैं उनसे इस्तीफे मांग रहे हैं। इस बारे में कोर्ट जाने या शिक्षा अफसरों को शिकायत करने वाले शिक्षकों को भी भविष्य में नौकरी से निकालने की चेतावनी मिल रही है।

अधिनियम में है ट्यूशन फीस की परिभाषा
ट्यूशन फीस को लेकर प्रशासन, प्राइवेट स्कूल और पालकों के बीच टकराव चल रहा है। अब पैरेंट्स एसोसिएशन ने भी ट्यूशन फीस को लेकर अधिनियम और संहिता का हवाला देकर शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है।

ऐसे समझें

  • आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सी के अनुसार ट्यूशन फीस वह है, जो हम अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल को देते हैं। इसमें डेवलपमेंट, डोनेशन, कैपिटेशन और लेट फीस शामिल नहीं है।
  • शिक्षा संहिता नियम 124-ए अध्याय 9-शिक्षा शुल्क पेज नं. 831 में उल्लेख है कि ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क का आशय है कि शासकीय एंव अशासकीय विद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रम संबंधी एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों के संचालन हेतु जो शुल्क जिला जाता है, उसे ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क कहा जाता है।
  • फीस का निर्धारण पालकों की आम सहमति और डीईओ की उपस्थिति में किया जाएगा।

बोर्ड से मान्यता समेत 30 मदों पर प्राइवेट स्कूल लेते हैं फीस

  • शिक्षण शुल्क
  • डेवल्पमेंट फीस
  • मेडिकल शुल्क
  • बिल्डिंग शुल्क
  • मेंटेनेंस शुल्क
  • टर्म फीस
  • बागवानी शुल्क
  • योगा शुल्क
  • अमलगमेटेड फंड
  • निर्धन छात्र शुल्क
  • स्मार्ट क्लास
  • परिवहन शुल्क
  • वार्षिक शुल्क
  • एडमिशन शुल्क
  • डायरी शुल्क
  • आईडी कार्ड शुल्क
  • टाई-बेल्ट शुल्क
  • रेडक्रास शुल्क
  • परीक्षा शुल्क
  • क्रीड़ा शुल्क
  • विज्ञान शुल्क
  • स्काउड-गाइड शुल्क
  • पत्रिका शुल्क
  • छात्र समूह बीमा योजना शुल्क
  • क्रियाकलाप/एक्टिविटी शुल्क
  • लेट फीस
  • बोर्ड एफिलिएशन फीस
  • कम्प्युटर फीस
  • लैब फीस
  • कॉशन मनी

शिकायतें मिलीं, जानकारी लेंगे: डीईओ
डीईओ जीआर चंद्राकर ने कहा कि उन्हें प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों से वेतन न मिलने व स्कूल से निकालने की धमकी की शिकायतें मिल रही हैं। इस बारे में वे स्कूलों से जानकारी मांगेंगे। आज विधायक व पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय व महापौर एजाज ढेबर के साथ पालकों व स्कूल संचालकों की बैठक में कई समाधान निकले हैं। अब विवाद निपट जाने की उम्मीद है।

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