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राज्य में महिलाओं का प्रतिनिधित्व:सिर्फ 2 शीर्ष पदों तक ही पहुंच पाईं महिलाएं, 14 डीजीपी, 13 सीजे पुरुष ही बने; गृह, वित्त और स्वास्थ्य मंत्रालय कभी महिलाओं के हाथ आया ही नहीं

रायपुर9 महीने पहले
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कतार बराबरी का हक देती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के 21 साल के इतिहास की पहली कतार देखें- अब तक दो सर्वोच्च पदों पर 4 महिला रही हैं। इन्हें समान अधिकार मिले तो बदले सूरत। महिला दिवस पर पढ़िए हमारी विशेष रिपोर्ट...

सरकार/ शीर्ष पदों पर कतार में बस दो नाम
अनुसुइया उइके, राज्यपाल
एक साल में 10 हजार लोगों से मिलने का रिकॉर्ड

सुश्री उइके जुलाई 2019 में प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इससे पहले एसटी कमीशन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थीं। विधायक और सांसद भी रही हैं।
बड़े काम- एक साल में 10 हजार लोगों के लिए राजभवन खोला व उनकी शिकायतों का निराकरण किया। बतौर राज्यपाल यह एक विश्व रिकॉर्ड भी है।

प्रो. अंजिला गुप्ता, कुलपति
केंद्रीय विवि में छत्तीसगढ़ की पहली कुलपति

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रथम महिला कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता 2015 में बनीं। 64 साल पुराने इंदिरा कला संगीत विवि खैरागढ़ की 2011 में छत्तीसगढ़ की पहली महिला कुलपति डॉ. मांडवी सिंह बनीं। उनके बाद डॉ. मोक्षदा चंद्राकर भी इसी विवि की कुलपति बनीं। दुर्ग विवि में भी डॉ. अरुणा पलटा कुलपति हैं।
बड़े काम- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के साथ 20 एमओयू हुए हैं। दो नए विद्यापीठ व 15 नए विभाग खोली है।

...क्योंकि ये है समानता का सच
छत्तीसगढ़ में कुलमहिलाएं
कर्मचारी4.5 लाख1.5 लाख
डॉक्टर3000950
विधायक9014
सांसद112
आईएएस15735
आईपीएस1106
आईएफएस1177

गृह मंत्री, वित्त मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री - 3 सबसे ताकतवर विभाग, अब तक कोई महिला नहीं
1 नवंबर 2000 में बने राज्य में पांचवीं सरकार चल रही है। कांग्रेस दो और बीजेपी तीन बार सत्ता में आई है। सरकार के इन तीनों प्रमुख विभागों का जिम्मा अब तक एक भी महिला को नहीं दिया गया है। यहां मुख्यमंत्री ही वित्त मंत्री रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय का जिम्मा पुरुष विधायकों को ही मिलता रहा है। वैसे महिला बाल विकास मंत्री महिलाएं ही रही हैं।

मुख्य सचिव : 21 साल में 12 सीएस हुए, सिर्फ दो महिला एसीएस बनीं, मेरी बारी कब?
जबकि-
प्रदेश में 35 महिला आईएएस अफसर हैं। अब तक दो ही एसीएस के पद तक पहुंच पाई हैं। जबकि 12 पुरुष सीएस बन चुके हैं। 2025 में अमिताभ जैन के रिटायर होने पर रेणु पिल्ले को अवसर मिल सकता है।

पुलिस महानिदेशक: 21 साल में भी डीजीपी नहीं बन पाई मैं, खाकी के मान में मेरा स्थान कब?
जबकि-
प्रदेश में 20 साल में 14 डीजीपी बन चुके हैं, महिला एक भी नहीं। 2004 बैच की नेहा चंपावत (डीआईजी) 2034 में डीजीपी बनने की संभावना है। वर्तमान में पारूल माथुर जांजगीर-चांपा की एसपी हैं।

मुख्य न्यायाधीश: 18 साल बाद पहली बार दो महिला जज नियुक्त, मैं अब तक सीजे नहीं बनी?
जबकि-
21 साल के दौरान बिलासपुर हाईकोर्ट में 13 चीफ जस्टिस बने, महिला कोई नहीं। 18 जून 2018 को पहली बार दो महिला जस्टिस हाईकोर्ट में नियुक्त की गईं। जस्टिस रजनी दुबे व जस्टिस विमला सिंह कपूर।

जिन्हें जगह तो मिली, पर कतार नहीं बन पाई

  • प्रदेश की दोनों पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी में अब तक कोई महिला प्रदेश अध्यक्ष नहीं। इन्हें उपाध्यक्ष तो बनाया जाता है, लेकिन अब तक अध्यक्ष का जिम्मा नहीं। दोनों ही दल महिला मोर्चा का अध्यक्ष ही बनाते रही हैं।
  • मानवाधिकार आयोग का गठन वर्ष 2000 में हुआ। अब तक कोई भी महिला अध्यक्ष नहीं बनीं।
  • पांच विधानसभा का गठन प्रदेश में हो चुका है। पांचों बार पुरुषों को ही अध्यक्ष बनाया गया है। महिला अब तक इस पद से वंचित हैं।

कंटेंट- पी श्रीनिवास राव, जॉन राजेश पॉल, राकेश पाण्डेय, अमिताभ अरुण दुबे।

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