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कोरोना का ऐसा डर:क्लास में बच्चे नहीं, गलियारे भी सूने, किसी स्कूल में 20 तो किसी में 30 फीसदी ही उपस्थिति

रायपुर13 दिन पहले
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मायाराम सुरजन स्कूल में खचाखच भरे रहले वाले नवमीं के क्लास रूम में सिर्फ 9 छात्राएं। - Dainik Bhaskar
मायाराम सुरजन स्कूल में खचाखच भरे रहले वाले नवमीं के क्लास रूम में सिर्फ 9 छात्राएं।
  • राजनांदगांव के एक स्कूल में संक्रमण फैलने से दहशत बढ़ी

राजधानी के सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में 9वीं व 11वीं की कक्षाएं तो लग रही हैं, लेकिन क्लास रूम सूने हैं। जिन स्कूलों में तीन-चार सेक्शन हैं। वहां दो सेक्शन में बड़ी मुश्किल से 30 फीसदी बच्चे ही उपस्थित हो रहे हैं। गुरुवार को दैनिक भास्कर की टीम मायाराम सुरजन शासकीय विद्यालय पहुंची तो मैदान में दो-चार छात्राएं ही नजर आईं। वे भी कक्षा दसवीं की थीं, जो अपना प्रैक्टिकल देने आईं थीं।

9वीं-11वीं की क्लास चल रही थी, लेकिन 350 में सौ से कम छात्राएं ही पहुंचीं थीं। गवर्मेंट हाई स्कूल में 11वीं की क्लास की छुट्‌टी हो चुकी थी। पूछने पर पता चला केवल साइंस और गणित का विषय ही पढ़ाया जा रहा है। बाकी विषय की तैयारी घर पर करने को कहा जा रहा है। होलीक्रास बैरन बाजार में दोपहर स्कूल खाली नजर आया। शिक्षकों ने बताया कि बहुत कम बच्चे आ रहे हैं। हिंदू हाई स्कूल में दो घंटे क्लास लगाने के बाद ही छुट्‌टी दे दी गई थी।

इस बीच राजधानी में एकाएक केस बढ़ने से पैरेंट्स बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। गुरुवार को रायपुर में महिला टीचर और एक छात्र संक्रमित हो गए। राजनांदगांव के एक स्कूल में 22 टीचरों और बच्चे कोरोना पॉजिटिव हो गए। स्कूल खुलने के तीन दिन के भीतर ही बच्चों और टीचरों के संक्रमित होने से खतरा बढ़ गया है। स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति को लेकर भास्कर ने छात्रों के पैरेंट्स से इस बारे में चर्चा की। करीब 50 बच्चों के पैरेंट्स से चर्चा करने पर इक्का-दुक्का को छोड़कर कोई भी स्कूल खोलने में पक्ष में नहीं है। पैरेंट्स का तर्क है कि जब पूरे सत्र में स्कूल नहीं खोला गया तो अब डेढ़ माह के लिए क्यों खोले गए, उनकी समझ नहीं आ रहा है। पैरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते। जो बच्चे जा रहे हैं, उनके पैरेंट्स भी मजबूरी में भेज रहे हैं।

अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही ठीक : अभिभावक
लालपुर जैनम विहार निवासी पिंकी बरड़िया ने बताया कि उनका बच्चा केपीएस स्कूल में कक्षा नवमीं का छात्र है। कोरोना का डर अभी खत्म नहीं हुआ है। इसलिए स्कूल नहीं भेजना चाहतीं। जोरा में रहने वाली काजल अग्रवाल की बिटिया कक्षा नवमीं की छात्रा है। वे अभी स्कूल नहीं भेजना चाहतीं।

उनका कहना है सब कुछ ठीक रहा तो नए सत्र से स्कूल भेजेंगे। अभी ऑनलाइन पढ़ाई ठीक है। कचना में रहने वाले जिनेश जैन ने बताया कि उनकी बेटी ब्राइटन इंटरनेशनल में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि कोरोना का डर पहले से उनके मन में था, अब राजनांदगांव स्कूल का मामला सामने आने के बाद और डर लगने लगा है। अभी बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगे।

अमलीडीह के डॉ. विजय कुमार मिश्रा ने बताया उनका बेटा सेंट जोसेफ स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। उन्होंने बताया कि वे पेशे से एक डाक्टर हैं। कोरोना का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। स्कूल में डर बना रहेगा। इसलिए पढ़ाई के लिए नहीं भेजेंगे। मेरे परिचित में कई लोग हैं, वे भी अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजना चाहते। अनिल तिवारी का बेटा आदर्श स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं का छात्र है। वे चाहते हैं स्कूल ऑन लाइन चले और परीक्षा भी ऑनलाइन ही ली जाए।

कोटा के दिनेश कुमार का कहना है कि उनका बेटा अभी कक्षा नवमीं का छात्र है। जब सालभर ऑनलाइन कक्षाएं चलीं, तो फिर कुछ दिनों के लिए स्कूल क्यों भेजा जाए। जबकि अभी कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है।

अधिकतम 45 दिन की पढ़ाई फिर परीक्षा और छुट्टी
कोरोना की वजह से पिछले साल ऑफलाइन कक्षाएं नहीं लगी। ऑनलाइन पढ़ाई हुई। 15 फरवरी से स्कूल खुले हैं। 15 अप्रैल से सीजी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो जाएगी। इस दौरान अधिकांश स्कूलों में कक्षाएं नहीं लगेंगी। इस तरह से देखा जाए तो 15 फरवरी से 15 अप्रैल के बीच अधिकतम 45 दिन की पढ़ाई होगी। इसमें फरवरी में 12 दिन, मार्च में 23 दिन और अप्रैल में 10 दिन।

इसके बाद परीक्षाएं शुरू होगी। फिर गर्मी की छुट्टी हो जाएगी। सीजी बोर्ड के तहत नवमीं-ग्यारहवीं की परीक्षा यदि अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू हो जाती है तो फिर महीने भर की क्लासेस लगेगी। वहीं दूसरी ओर सीबीएसई स्कूलों में नवमीं-ग्यारहवीं की परीक्षा मार्च में होगी। इसके बाद एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होगा। ऐसे में कुछ दिनों के लिए क्या स्कूल अभी खोलना उचित था? यह बड़ा सवाल है।

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