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नासमझी की हद:वैक्सीन का विरोध, नपुंसक बनाने की अफवाह के चलते भानुप्रतापपुर के कई गांव के लोग नहीं लगवा रहे वैक्सीन; टीम परेशान

छत्तीसगढ़एक महीने पहले
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भ्रम में हैं ग्रामीण: टीम से कहा- आप लोगों को तो नौकरी बचानी है हमारी तो जिंदगी का सवाल है। - Dainik Bhaskar
भ्रम में हैं ग्रामीण: टीम से कहा- आप लोगों को तो नौकरी बचानी है हमारी तो जिंदगी का सवाल है।
  • गांव वाले भड़क रहे- बीमार होने पर ले जाते हैं और मरने पर पन्नी में भरकर छोड़ आते हैं, नहीं लगाना टीका।

एक तरफ प्रदेश सरकार जूझ रही है कि उसके नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन लगे, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक टीमों को गांव गांव में वैक्सीन लगाने काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई गांवों में वैक्सीन लगाने का विरोध हो रहा है। प्रशासनिक टीमों के हाथ-पांव फूल जा रहे हैं गांव वालों को समझाने में। ये चिंता और भी ज्यादा इसलिए है क्योंकि गांवों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही कुछ गांवों की लाइव स्टोरी, जहां प्रशासनिक टीमों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

कांकेर; नपुंसक बनाने की अफवाह के चलते भानुप्रतापपुर के कई गांव के लोग नहीं लगवा रहे वैक्सीन, टीम परेशान

भानुप्रतापपुर से 12 किमी दूर ग्राम कच्चे में 4 पंचायतों कच्चे, ईरागांव, साल्हे तथा भैसाकन्हार के 10 गांव के 18 प्लस अंत्योदय वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने 3 मई को सेंटर बनाया गया। दो दिनों तक सेंटर में कर्मचारी बैठे रहे लेकिन कोई वैक्सीन लगवाने आया ही नहीं। इस सेंटर में इस वर्ग के 200 लोगों को वैक्सीन लगना था। क्षेत्र के जिन लोगों ने डेढ़ दो महीने पहले पहली डोज लगवा ली थी वे भी दूसरी डोज लगवाने नहीं आ रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर बुलाने पहुंची तब जाकर पता चला क्षेत्र में जबरदस्त अफवाह फैली हुई है की वैक्सीन लगवाने से लोग नपुंसक हो जाते हैं।

राजनांदगांव; भ्रम में हैं ग्रामीण: टीम से कहा- आप लोगों को तो नौकरी बचानी है हमारी तो जिंदगी का सवाल है
मानपुर-मोहला क्षेत्र के कई गांवों में तो आदिवासी समाज की ओर से वैक्सीनेशन का विरोध खुलकर किया जा चुका है। हाल ही में साल्हेवारा में टीकाकरण के लिए गई राजस्व व हेल्थ की टीम को ग्रामीणों ने बैरंग लौटा दिया। यहां के ग्रामीणों ने बुधवार को टीम से कहा कि- आप लोगों को नौकरी करनी है लेकिन हमारी तो जिंदगी का सवाल है। आज टीका लगाए और कल मौत हो गई तो कौन जिम्मेदार होगा। काफी देर तक यहां टीम ने मशक्कत की लेकिन वे ग्रामीणों को नहीं मना पाए और बैरंग लौट गए। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में एक सचिव के माता-पिता की मौत के बाद से वे सहमे हुए हैं। इसी वजह से टीका नहीं लगवा रहे।

बालोद; गांव के लोग टीम से कह रहे कि लिखकर गारंटी दीजिए, तब लगाएंगे कुछ होगा तो आप जिम्मेदार रहोगे

बिरतेरा के सरपंच योगेश देशमुख ने सोशल मीडिया के माध्यम से कलेक्टर को पत्र भेजकर बताया है कि अफवाहों के चलते लोग टीका लगाने नहीं पहुंच रहे है। कई लोग गाली गलौच भी कर रहे है। जिला पंचायत के एसीईओ हेमंत ठाकुर ने बताया कि अरजपुरी में लोगों को जागरूक करने गए थे, तब गांव वाले विरोध करने लगे कि नहीं लगाएंगे, टीका लगाने से बीमार हो जाएंगे। समझाइश देने के 4 घंटे के बाद सिर्फ 10 लोग ही टीका लगवाने पहुंचे। विरोध इस बात को लेकर है वैक्सीनेशन को लेकर भ्रांति फैली है कि टीका लगाने से मौत हो जाएगी। बुखार आना, चक्कर आने की शिकायत लगातार मिल रही है।

कोरबा; गांव वाले भड़क रहे- बीमार होने पर ले जाते हैं और मरने पर पन्नी में भरकर छोड़ आते हैं, नहीं लगाना टीका

कोरबा ब्लॉक के गांव केरा कछार में बुधवार को एक टीम जिसमें स्वास्थ्य कर्मी, मितानिन, आंगन बाड़ी कार्यकर्ता व शिक्षक शामिल थे। टीम के सदस्यों ने वहां डोर टू डोर सम्पर्क कर जाना कि ग्रामीणों को सर्दी,बुखार या और कोई परेशानी तो नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों को वैक्सीनेशन के सम्बन्ध में बताया और जब उसके फायदे बता रहे थे तभी अचानक महिलाएं भड़क गई। कुछ बुजुर्ग भी चिल्लाने लगे कि हम को टीका नहीं लगाना है।गरीब को बीमार होने पर ले जा रहे और फिर वो मर जाता है तो पन्नी में पैक कर छोड़ जाते है कि इसको कोरोना हुआ था कोई हाथ मत लगाना।हम टीका नहीं लगाएंगे। अमीर गरीब का इलाज अलग अलग हो रहा।

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