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आधुनिकता में प्राचीनता जमींदोज:रायपुर में 200 साल से ज्यादा पुरानी इमारत तोड़ी गई; 117 साल से चल रही कोतवाली अब नई बिल्डिंग में

रायपुर8 महीने पहले
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रायपुर शहर में अंग्रेजी हुकूमत का गवाह रहा कोतवाली पुलिस थाना अब हाईटेक और इंटीग्रेटेड सिस्टम से लैस होगा। करीब 200 साल पुरानी इस इमारत में मंगलवार रात से तोड़फोड़ शुरू हो गई। तीन-चार दिनों में इसे पूरा जमींदोज कर दिया जाएगा। - Dainik Bhaskar
रायपुर शहर में अंग्रेजी हुकूमत का गवाह रहा कोतवाली पुलिस थाना अब हाईटेक और इंटीग्रेटेड सिस्टम से लैस होगा। करीब 200 साल पुरानी इस इमारत में मंगलवार रात से तोड़फोड़ शुरू हो गई। तीन-चार दिनों में इसे पूरा जमींदोज कर दिया जाएगा।
  • शहर का सबसे पहला थाना है कोतवाली, अब होगा हाईटेक पुलिस स्टेशन
  • राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को मुख्यमंत्री करेंगे नए थाने का लोकार्पण

शहर में अंग्रेजी हुकूमत का गवाह रहा पुलिस थाना अब हाईटेक और इंटीग्रेटेड सिस्टम से लैस होगा। करीब 200 साल पुरानी इस इमारत में मंगलवार रात से तोड़फोड़ शुरू हो गई। तीन-चार दिनों में इसे पूरा जमींदोज कर दिया जाएगा। इसमें 117 सालों से चल रही कोतवाली का सारा सामान अब ठीक पीछे नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया है। फिलहाल थाने का संचालन रंग मंदिर से होगा।

शहर कोतवाली की नई बिल्डिंग रायपुर स्मार्ट सिटी बना रहा है। अफसरों का कहना है कि 1 नवंबर को लोकार्पण के लिए बिल्डिंग का काम काफी तेज गति से किया जा रहा है।
शहर कोतवाली की नई बिल्डिंग रायपुर स्मार्ट सिटी बना रहा है। अफसरों का कहना है कि 1 नवंबर को लोकार्पण के लिए बिल्डिंग का काम काफी तेज गति से किया जा रहा है।

शहर कोतवाली की नई बिल्डिंग रायपुर स्मार्ट सिटी बना रहा है। अफसरों का कहना है कि 1 नवंबर को लोकार्पण के लिए बिल्डिंग का काम काफी तेज गति से किया जा रहा है। कोतवाली की पुरानी बिल्डिंग अगले एक-दो दिनों में पूरी तरह जमींदोज हो जाएगी। इसके बाद कोतवाली चौक से नई बिल्डिंग दिखेगी। राज्य स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई प्रोजेक्ट के साथ इसका भी लोकार्पण करेंगे।

अंग्रेजों की चलती थी कचहरी, नागपुर कमिश्नरेट के अंदर आता था
मालवीय रोड से कालीबाड़ी मार्ग पर पुराने भवन में संचालित कोतवाली से शहर का इतिहास जुड़ा हुआ है। साल 1802 में अंग्रेजों की कचहरी चलती थी। करीब 100 साल बाद 1903 में यह इमारत पुलिस विभाग के सुपुर्द कर दी गई। तब से ही यहां कोतवाली संचालित हो रही थी। रायपुर अंग्रेजों के समय नागपुर कमिश्नरेट के अंतर्गत आता था। तब बिंद्रा नवागढ़ और भखारा में भी इसकी दो पुलिस चौकियां थीं।

1857 की क्रांति के समय सुनवाई यहीं होती, कई स्वतंत्रता सेनानी रहे बंद
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पं. रविशंकर शुक्ल, वामन राव लाखे, माधवराव सप्रे, सुंदरलाल शर्मा, खूबचंद बघेल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने कोतवाली थाने के हवालात में कई दिन गुजारे। 1857 की क्रांति की सुनवाई तब इसी कचहरी भवन में होती थी। बंदियों को रखने के लिए बंदी गृह भी उसी समय बनाया गया, जो आज भी वैसा ही था। असहयोग आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी यहीं बंद रहते।

कोतवाली से शहर का इतिहास जुड़ा हुआ है। साल 1802 में अंग्रेजों की कचहरी चलती थी। करीब 100 साल बाद 1903 में यह इमारत पुलिस विभाग के सुपुर्द कर दी गई।
कोतवाली से शहर का इतिहास जुड़ा हुआ है। साल 1802 में अंग्रेजों की कचहरी चलती थी। करीब 100 साल बाद 1903 में यह इमारत पुलिस विभाग के सुपुर्द कर दी गई।

15 अगस्त 1998 को इमारत को पुरातात्विक महत्व का घोषित किया गया था
कोतवाली के सामने चौक में महावीर स्वामी के स्तूप स्थापित है। नगर में किसी भी प्रकार का धार्मिक, राजनैतिक, श्रमिक, छात्र गतिविधियों के कारण कोई भी जुलूस निकले, इसी चौक से होकर जाता। 15 अगस्त 1998 से सिटी कोतवाली थाना को पुरातात्विक महत्व का भवन घोषित किया गया। तब से भवन के रख-रखाव की जिम्मेदारी रायपुर नगर निगम ने ली।

शहर बढ़ता गया, कोतवाली का क्षेत्र कम होता रहा
शहर के विकास और विस्तार के साथ नए पुलिस थाने खुलते गए और कोतवाली का क्षेत्र कम होता गया। गंज, आजादचौक, पुरानी बस्ती, सिविल लाइन थाना शुरू किया गया। फिर भी व्यापक होते क्षेत्र को देखते हुए सितंबर 1996 में मौदहापारा थाना शुरू हुआ। कोतवाली थाने के उत्तर का जीई रोड पर पुराना यातायात थाना, जिसमें गोलबाजार पुलिस चौकी हुआ करती थी, उसे अक्टूबर 1998 को थाना बनाया गया।

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