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वर्ल्ड रोज डे:खुश रहने लीली करती हैं पेंटिंग, काउंसिलिंग कर मौसमी बढ़ा रहीं कैंसर पेशेंट का आत्मविश्वास

रायपुरएक महीने पहले
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  • राजधानी के ऐसे तीन कैंसर सर्वाइवर्स की कहानी जो लोगों को सिखा रहे जीवन जीने के तरीके

22 सितंबर यानी आज दुनियाभर में वर्ल्ड रोज डे यानी वेलफेयर ऑफ कैंसर पेशेंट मनाया जाता है। एक ऐसी बीमारी है जिसका पता चलने पर पूरी फैमिली को हिम्मत की जरूरत पड़ती है। क्योंकि कैंसर पेशेंट को ठीक करने के लिए हौंसला और पैसा दोनों की जरूरत पड़ती है। उरकुरा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाली 80 साल की लीली देव ब्रेस्ट कैंसर होने के बाद भी खुश रहने की पेंटिंग बनाती है, आस-पास रहने वाली महिलाओं को फ्री में ट्रेनिंग भी देती हैं। महोबा बाजार में रहने वाली मौसमी विश्वास खुद ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है, बीमारी के समय किस तरह जीवन में नकारात्मकता आ जाती है, दूसरे कैंसर पेशेंट के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काउंसिलिंग करना शुरू कर दिया। कोटा में रहने वाले राजेन्द्र शर्मा कैंसर होने के बाद जीवन की अहमियत समझी, तभी से अपने कस्टमर और जान पहचान वाले को जन्मदिन की बधाई देना शुरू कर दिया। पढ़िए तीन लोगों की कहानी।

कैंसर सर्वाइवर के लिए मिसाल हैं लीली, स्टूडेंट्स को सिखा रहीं संगीत
उरकुरा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड सोसायटी में रहने वाली 80 वर्ष की लीली देव कैंसर सर्वाइवर के लिए एक मिसाल हैं। लीली देव अविभाजित मध्यप्रदेश की संभवत: पहली महिला आंत्रप्रेन्योर हैं। 1984 में लीली ने उरला में अल्युमिनियम बर्तन बनाने की फैक्ट्री डाली। उन्हें दिसंबर 2019 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ। जिससे फैक्ट्री का काम भी बंद हो गया। लेकिन इस उम्र में भी लीली ने हार नहीं मानी, उनका कैंसर का ट्रीटमेंट रायपुर के ही एक हॉस्पिटल में हो रहा है। ये 6 कीमोथेरेपी करा चुकी हैं। इन्हें ऑयल पेंटिंग बनाने का शौक है। इससे लीली को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। इसके अलावा जिन्हें ड्राइंग, पेंटिंग, सिलाई सीखने में इंट्रेस्ट है, उन्हें फ्री में ट्रेनिंग भी देती हैं। लीली इतनी पेंटिंग बना चुकी हैं कि अब उन पेंटिंग्स को वह बेचना चाहती हैं। साथ ही वे कर्नाटक म्यूजिक में मास्टर हैं। वे स्टूडेंट्स को फोन पर संगीत सिखाती हैं।

हौसला ग्रुप बनाकर 6 सालों में 2 हजार लोगों की कर चुकी हैं काउंसिलिंग
महोबा बाजार स्थित एक रेसिडेंशियल सोसायटी में रहने वाली 50 वर्ष की मौसमी विश्वास को 2013 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ। उन्होंने मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से अपना ट्रीटमेंट करवाया। आठ कीमोथेरेपी हुई, इस दौरान मौसमी को लगा कि उन्हें अपने ही जैसे कैंसर पेशेंट की मदद करनी चाहिए। 2015 में मौसमी ने हौसला ग्रुप नाम की संस्था बनाई, इसमें वे ऐसे लोगों से मिलतीं जो कैंसर सर्वाइवर हैं। उनकी काउंसिलिंग करतीं हंै। कोरोना के दौर में भी 25 कैंसर सर्वाइवर की काउंसिलिंग की है। 6 साल में इन्होंने 2 हजार लोगों की काउंसिलिंग की है। कैंसर की जंग लड़कर अब नॉर्मल लाइफ जी रहे ऐसे लोगों को मौसमी रोजगार से भी जोड़ रही हैं।

कैंसर के बाद हर किसी को बर्थडे विश करने की आदत
कोटा निवासी राजेंद्र शर्मा कपड़ा व्यापारी हैं। 56 साल के राजेंद्र को 2017 में प्रोस्टेट कैंसर हुआ। कैंसर के बारे में पता चलते ही पूरी फैमिली परेशान हो गई। ऐसे में फैमिली के दुख को दूर करने के लिए राजेंद्र ने तय किया कि वह स्ट्रॉन्ग बनेंगे। डेढ़ साल बाद वे दोबारा सामान्य जीवन की ओर बढ़े। अब दोबारा अपना बिजनेस देख रहे हैं। वे कहते हैं कि इस बीमारी के कारण मौत को बहुत नजदीक से देखा और तब जिंदगी की अहमियत समझ आई। तब से अपने हर कस्टमर और परिजनों को उनके जन्मदिन पर मैसेज करके उन्हें बधाई देते हैं।

क्यों मनाया जाता है वेलफेयर ऑफ कैंसर पेशेंट डे
22 सितंबर को वर्ल्ड रोज-डे(वेलफेयर ऑफ कैंसर पेशेंट) मनाया जाता है। रोज-डे कनाडा की 12 साल की मेलिंडा रोज की याद में मनाया जाता है जिन्हें ब्लड कैंसर था। तब मेलिंडा ने अपने ही जैसे कैंसर पेशेंट के साथ मिलकर लोगों को खुशियां देने के लिए चिट्ठी, कविताएं और ईमेल भेजकर उनका हौसला बढ़ाती थीं।

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