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परिवहन विभाग ने लागू किया अनुमति का कानून:वाहनों के नए मॉडल बेचने की अनुमति जरूरी, लोगों को गाड़ी लेने में दिक्कत

रायपुरएक महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • सरकार ने 2008 में बनाया अनुमति का कानून, परिवहन विभाग ने अब किया इसे लागू

मोटरसाइकिल से लेकर कारों के नए मॉडल आने पर डीलरों के लिए उसे बेचने की अनुमति जरूरी कर दी गई है। इससे लोगों को नए मॉडल की गाड़ियां लेने में दिक्कत हो रही है। कोई नया मॉडल लांच होते ही लोगों को तुरंत नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि डीलरों को उसकी अनुमति के लिए कई तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि नया मॉडल लांच होने पर केंद्रीय परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल में उसका रजिस्ट्रेशन हो जाता है। उसके बावजूद परिवहन विभाग ने अब यहां अनुमति अनिवार्य कर दी है। विभाग के अफसर तर्क दे रहे हैं कि नए मॉडल के वाहनों से संबंधित अनुमति लेने का नियम 2008 में ही बन गया है। इसे अब तक लागू नहीं किया गया था। वाहनों की अनुमति नहीं लेकर डीलर सीधे बाजार में बेच रहे थे। इससे विभाग को नुकसान हो रहा था। अब नए मॉडल के वाहन बेचने की अनुमति लेने के साथ डीलरों को निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ता है। इससे विभाग की कमाई हो रही है। दूसरी ओर अन्य राज्यों की तुलना में यहां नए मॉडल के वाहन तुरंत नहीं मिल रहे हैं। किसी भी वाहन का नया मॉडल आने पर डीलर को टेस्टिंग एजेंसी का प्रमाण पत्र, कलर फोटो, उसके कितने डीलर हैं, उसकी सूची जमा के साथ फीस अदा करनी पड़ती है। उसके बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय में आवेदन कर अनुमति लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। तकनीकी कारणों से इसमें देरी हो जाती है। अनुमति के बिना डीलर वाहन नहीं बेच पा रहे हैं।

वाहन की अनुमति के साथ देनी होगी फीस

  • 50 सीसी के वाहन पर - 500
  • मोपेड की बिक्री के लिए - 1000
  • तिपहिया के लिए - 1500
  • कार के लिए - 2000
  • बड़ी कारों के लिए - 2500
  • हेवी वाहनों के लिए - 3000
  • ट्रेक्टर के लिए - 1000

बुकिंग कराने वाले काटते हैं चक्कर
प्रचार-प्रसार के माध्यम से नए वाहनों के लांच होने की जानकारी पाकर कई ग्राहक एडवांस बुकिंग करवाते हैं। ऐसे ग्राहक वाहन का मॉडल आने के बाद बार-बार चक्कर काटते हुए गाड़ी की डिलीवरी मांगते हैं। ऐसे में डीलर उन्हें जवाब नहीं दे पाता। इस बारे में डीलरों का भी अपना तर्क है। उनका कहना है कि फैक्ट्री से वाहन जैसे ही निकलते हैं कि चार स्तर पर टेस्टिंग होती है। वहां सर्टिफिकेट मिलते ही केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल में मॉडल का पूरा ब्योरा अपलोड हो जाता है। एक बार वहां ब्योरा अपलोड होने के बाद यहां अनुमति की क्या जरूरत है?

"छत्तीसगढ़ में नए मॉडल के कोई भी वाहन आने पर उसकी बिक्री के पहले परिवहन विभाग की अनुमति जरूरी है। ये नियम 2008 में ही बन चुका है। अब इसे लागू किया गया।"
-डा. कमलप्रीत सिंह, परिवहन आयुक्त

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