नक्सली हिड़मा के इलाके में ग्रामीणों का आंदोलन:15 गांव के लोगों ने पुलिस के खिलाफ की नारेबाजी, आदिवासियों से मारपीट का आरोप भी लगाया; SP बोले- ये नक्सलियों की चाल है

बीजापुर5 महीने पहले

बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर बसे 15 गांव के ग्रामीण अचानक सिलेगर में जमा हो गए। यहां सभी जंगल में धरना देने बैठ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। दरअसल इस इलाके में सुरक्षाबलों का कैंप शुरू हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में पुलिस अब उन्हें नक्सल मामलों को लेकर परेशान करेगी। लोगों ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप भी लगाए।

ग्रामीण काफी देर तक जमा रहे। ग्रामीणों ने फोर्स की एक बात नहीं मानी और कैंप के विरोध में डटे रहे। काफी देर तक उन्हें अफसर समझाते रहे तब जाकर ग्रामीण घरों को लौटने के लिए राजी हुए। पुलिस के अफसरों ने ग्रामीणों से मारपीट करने की बात से इंकार किया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि यहां शनिवार को फिर से गहमा-गहमी की स्थिति बन सकती है।

SP बोले- ये नक्सलियों की चाल है

सुकमा SP केएल ध्रुव ने दैनिक भास्कर को बताया कि ग्रामीणों का ये प्रदर्शन दरअसल नक्सलियों की चाल है। ग्रामीण खुद नहीं आए, बल्कि उन्हें डरा, धमकाकर नक्सलियों ने ये विरोध करने के लिए मजबूर किया है। इस इलाके में फोर्स की पैठ बढ़ने से बड़े नक्सली लीडर बौखलाए हुए हैं। यहां जवानों की मौजूदगी में नक्सली पहले की तरह अपना साम्राज्य नहीं चला पाएंगे। 12 मई को इस इलाके में फोर्स का ज्वाइंट कैम्प खुला है, इसमें CRPF, DRG और STF के जवान रहेंगे। इस एरिया में एंटी नक्सल ऑपरेशन मजबूत होगा, लोगों को बिजली, पानी, सड़क स्वास्थ्य की सुविधा देने में सुरक्षाबल मदद करेंगे।

नक्सली लीडर हिड़मा का है इलाका

हाल ही में बीजापुर में हुए नक्सल हमले में 22 जवान शहीद हुए थे। बस्तर का झीरम कांड जिसमें कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता मारे गए। इस तरह की दर्जनों घटनाओं की प्लानिंग और फिर कातिलाना एक्शन को नक्सली लीडर हिड़मा अंजाम देता है। जहां ग्रामीणों से प्रदर्शन किया है ये उसी का इलाका है। फोर्स के आने से पहले तक आए दिन नक्सली यहां ग्रामीणों की बैठक लेते रहे हैं, बड़े नक्सली नेताओं की यहां आवाजाही रही है। फोर्स की चहलकदमी बढ़ने से नक्सलियों को अपनी जमीन खोने का डर सता रहा है।

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