शराब तस्करों पर सख्ती की तैयारी:तस्करों के पास पिस्टल-बंदूक इसलिए अब आबकारी अमले को मिलेंगे आधुनिक हथियार

रायपुर10 महीने पहले
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प्रदेश में शराब के बढ़ते कारोबार और तस्करी को रोकने सरकार आबकारी महकमे को और मजबूत करने जा रही है। सरकार इन्हें नए हथियारों के साथ-साथ आईपीसी की कुछ धाराओं के तहत अवैध कारोबार करने वालों पर कार्रवाई के अधिकार भी देगी। फिलहाल विभाग के पास आबकारी एक्ट के तहत केवल जब्ती के ही अधिकार दिए गए हैं।

डीजीपी डीएम अवस्थी के नेतृत्व में बनाई जाने वाली कमेटी तय करेगी कि आबकारी अमले को कौन-कौन से हथियार दिए जा सकते हैं। मैदानी स्टाफ को हथियार चलाने व मेंटेनेंस की ट्रेनिंग देने के साथ आईपीसी के तहत कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई के अधिकार दिए जा सकते हैं, यह भी सिफारिशें की जाएंगी। सरकार ने इस साल शराब से 6 हजार करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।

इस लिहाज से आबकारी अमले को मजबूत करने की जरूरत है, जिससे वे ज्यादा सख्ती से तस्करी व अवैध शराब बिक्री पर रोक लगा सकें।आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों बजट पर हुई चर्चा के दौरान सीएम भूपेश बघेल ने इसकी अनुमति विभाग को दे दी है।

कार्रवाई के लिए गए 6 से 10 आबकारी स्टाफ पर 50-60 के समूह में तस्करों का हमला होता है। हाल के दिनों में तस्करों ने आबकारी अमले को जीप से कुचलने के साथ पिस्टल जैसे आधुनिक हथियारों से भी हमला किया है।हालांकि विभाग में अंग्रेजों के जमाने के रिवॉल्वर और 12 बोर की बंदूक तो हैं, लेकिन सभी आउटडेटेड हैं।

रखरखाव नहीं होने के कारण चलने की स्थिति में नहीं हैं। सीएम को यह भी बताया गया कि इनके इस्तेमाल का अधिकार भी नहीं हैं। इसी तरह से अमला केवल आबकारी एक्ट के तहत केवल अवैध शराब की जब्ती भर कर सकता है। इस मामले में लोगों को गिरफ्तार कर पास के पुलिस थाने को सौंपना होता है। इस तरह से आबकारी आयुक्त ने पूरे कैबिनेट को प्रेजेंटेशन के तहत महकमे की मजबूती के लिए एक प्लान भी बताया। इस पर सीएम बघेल ने अपनी सहमति देते हुए जल्द से जल्द से कार्यवाही करने कहा है।

आबकारी को अभी केवल जब्ती का अधिकार

आबकारी अमले को वर्तमान में धारा 341 और 2 के तहत कार्यवाही का अधिकार है। इसमें स्टाफ केवल शराब की दुकान, डिस्टलरी और गोदामों में घुसकर केवल जब्ती कर सकता है। हालांकि दो साल पहले इस पर रोक लगा दी गई है। गिरफ्तारी के बाद मुलजिम को रखने पुलिस थाने भेजना होता है। नारकोटिक्स के मामलों में पुलिस के जैसे अधिकार हैं, लेकिन उसे स्टेब्लिश करने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए अमला हाथ खींच लेता है। मसलन गांजे की जब्ती का प्रकरण आबकारी स्टाफ करता ही नहीं, क्योंकि एक केस बनाने में 6-7 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं और इसका रीइंबर्समेंट भी नहीं होता।

स्टाफ और हथियारों की स्थिति

राज्य के आबकारी अमले में कांस्टेबल से लेकर आयुक्त तक करीब 900 का अमला है। इनमें 100 उपनिरीक्षक, 37 डीईओ, 74 सहायक डीईओ, 11 सहायक आयुक्त, 6 उपायुक्त, 2 सहायक आयुक्त और शेष सिपाही शामिल हैं। तस्करों के बड़े गिरोह और उनके हथियारों के मुकाबले आबकारी विभाग के पास 3-4 रिवॉल्वर, 2 से 3 ही 12 बोर बंदूक, 7-8 हथकड़ी और 50 गाड़ियां हैं।

300 जवानों की भर्ती जल्द

सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग में जल्द ही 300 जवानों की भर्ती होगी। अभी विभाग में 900 से 1000 स्टाफ हैं। इसके लिए कैबिनेट की अगली बैठक में प्रस्ताव लाया जा रहा है।

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