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शिक्षकों को नई जिम्मेदारी:घर-घर कोरोना मरीजों की खोज करने वाले शिक्षकों को अब छात्रों की परीक्षा लेने का नया टास्क

रायपुर2 महीने पहले
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फाइल फोटो।

कोराेना काल में बिना किसी सुरक्षा इंतजामों के घर-घर कोराेना मरीजों की खोज करने वाले शिक्षकों को अब ऑनलाइन व ऑफलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों की परीक्षा यानी सतत मूल्यांकन का नया टॉस्क दे दिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से भले ही इसे सतत मूल्यांकन नाम दिया जा रहा है, लेकिन यह एक तरह से परीक्षा ही होगी। मूल्यांकन के जरिए शिक्षक ये देखेंगे कि बच्चों ने अब तक क्या सीखा? इसकी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी जाएगी। सतत मूल्यांकन का येे सिस्टम पहली से कक्षा 12वीं तक लागू होगा। शिक्षा विभाग की ओर से राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं। जारी आदेश में ये भी बता दिया गया है कि शिक्षक एक-एक बच्चे का सतत मूल्यांकन कैसे करेंगे? इसका पूरा शेड्यूल भी तैयार कर लिया गया है। सतत मूल्यांकन का पूरा कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद के माध्यम से तैयार करवाया जा रहा है। शिक्षाविदों के अनुसार मूल्यांकन का पूरा फार्मेट परीक्षा की तरह ही होगा। इससे ये पता चलेगा कि कोरोना काल में ऑनलाइन या ऑफलाइन करायी जा रही पढ़ाई का बच्चों पर कितना असर पड़ रहा है। बच्चे पढ़ाई को गंभीरता से ले रहे या नहीं? शिक्षा विभाग को कितनी सफलता मिल रही है। इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि मूल्यांकन से सफलता का पता चलेगा। साथ ही यह स्थिति भी स्पष्ट होगी कि पढ़ाई के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम में किस तरह से सुधार किया जा सकता है।

शिक्षक देंगे ब्योरा कितने बच्चाें को कब से पढ़ा रहे
शिक्षकों को शिक्षा विभाग की वेबसाइट में ऑन लाइन जानकारी देनी होगी कि वे कितने और किस किस कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। एक-एक बच्चे का नाम-पता और कक्षा की एंट्री करनी होगी। ये जानकारी भी उसमें दर्ज की जाएगी कि वे कब से और कहां बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उसी आधार पर सतत मूल्यांकन का फार्मेट उन्हें दिया जाएगा।

जो ज्यादा बच्चों को पढ़ा रहे हैं उन्हें प्रशंसा पत्र
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 100 या इससे अधिक बच्चों लगातार जनवरी माह तक मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को प्लेटिनम प्रशंंसा पत्र दिया जाएगा। इसी तरह 75 से 100 तक बच्चों का मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को गोल्ड प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। 50 से 75 बच्चों का मूल्यांकन करने वाले टीचर को सिल्वर प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह 25 से 50 बच्चों को लगातार पढ़ाकर उनका मूल्यांकन करने वालों को ब्राॅन्ज व 10 से 20 बच्चों का मूल्यांकन करने वाले साधारण प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रशंसा पत्र फरवरी के पहले सप्ताह में जनवरी तक के मूल्यांकन के लिए दिया जाएगा।

मोहल्लों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर होगा लागू
राज्य के कई इलाकों में जहां ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित नहीं हो रही हैं, वहांं शिक्षक स्थानीय लोगों की मदद से लाउड स्पीकर के माध्यम पढ़ाई करा रहे हैं। यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू होगा। वे पढ़ाई करने वाले बच्चों का मूल्यांकन करेंगे।

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