डॉक्टर साहब ये ठीक नहीं:चीफ मेडिकल अफसर ने ही तोड़ दिया कोविड प्रोटोकॉल, संक्रमित पाए जाने के 8वें दिन पहुंच गए पदभार ग्रहण करने

जगदलपुर7 महीने पहले
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तस्वीर जगदलपुर के नए सीएमओ जीपी शर्मा की है। शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था अब इनके जिम्मेदार कंधों पर है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर जगदलपुर के नए सीएमओ जीपी शर्मा की है। शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था अब इनके जिम्मेदार कंधों पर है।

मामला जगदलपुर का है। सीएमएचओ आरके चतुर्वेदी को हटाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने जीपी शर्मा जिम्मा सौंपा इस दौरान जीपी शर्मा कोरोना पॉजिटिव होकर होम आइसोलेशन पर थे। मगर ऑर्डर जारी होते ही खुद की और दूसरों की सेहत से ज्यादा इन साहब को पद की चिंता सताने लगी। क्वारेंटाइन नियमों को दरकिनार करते हुए वो 8वें दिन ही पद भार करने दफ्तर पहुंच गए। होम क्वारेंटाइन में संक्रमित मरीज को 17 दिनों तक रहना होता है।

आम आदमी होता तो FIR दर्ज होती
ये सब कुछ शहर के सीएमएचओ दफ्तर में शनिवार को हुआ। जीपी शर्मा चुपके से पहुंचे थे। मगर उनकी इस हरकत की वजह से अब दूसरे कर्मचारियों पर भी संक्रमित होने का खतरा है। इनकी जगह पर कोई आम आदमी होता तो कलेक्टर के आदेश पर उस पर FIR तक हो जाती। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले 15 दिनों में 2 लोगों पर होम क्वारेंटाइन नियम का उल्लंघन करने पर FIR दर्ज की गई है। मगर जीपी शर्मा के इस लापरवाही पर कुछ भी कहने से जिम्मेदार बच रहे हैं।

मेरी रिपोर्ट निगेटिव है
इस सबंध में नवनियुक्त सीएमएचओ जीपी शर्मा से बात की गई। 8 दिनों में होम क्वारेंटाइन नियम तोड़ने के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि मैंने 12 अप्रैल को अपना सैंपल दिया, 14 अप्रैल को मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद से वे होम आइसोलेशन पर चल रहे थे। 23 अप्रैल को कोरोना की फिर से जांच कराई गई। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद नई जिम्मेदारी संभालने पहुंचा था। इस बीच जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को भी जानकारी दी थी।

सरकार व आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक होम क्वारैंटाइन में रह रहे मरीज को कम से कम 17 दिन तक आइसोलेट रहना जरूरी है। यह नियम बीच में रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी जारी रहती है। इस बीच वह बाहर निकलता है तो उसके उपर महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।

अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा
क्योंकि कोरोना संक्रमित होने के आठ दिन बाद ही नव नियुक्त सीएमएचओ अपना पदभार ग्रहण करने कार्यालय पहुंच गए हैं। ऐसे में कार्यालय के कर्मचारियों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। यह खतरा यहीं नहीं थम रहा बल्कि कोविड के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के जिलेभर के स्वास्थ्य अधिकारियों, कलेक्टर व अन्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में व बतौर स्वास्थ्य प्रमुख शामिल होंगे। ऐसे में इन सभी में भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

क्या कहता है नियम
दरअसल हाल ही में राज्य सरकार द्वारा जो गाइडलाइन जारी की है। उसके मुताबिक प्रत्येक कोरोना संकमित मरीज जो होम आइसोलेशन पर हैं, उन्हें कम से कम १७ दिन क्वारंटाइन रहना है। पिछले आदेश में दिनों की संख्या १४ थी। इस बीच वह बाहर नहीं निकल सकता। यदि वह इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके उपर महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। लेकिन अधिकारी सरकार के आदेश को ही दरकिनार कर रहे हैं।

आम आदमी और सरकारी अधिकारी का फर्क
दरअसल जिले में पिछले एक साल में कई ऐसे मामले हैं जब कोविड नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ मामले बनाये गए। लेकिन, यही गलती एक अधिकारी द्वारा किए जाने पर प्रशासन मौन हैं। ऐसे में फिर स आम व्यक्ति और शासकीय अधिकारी में फर्क पैदा हो गया है। शासकीय अधिकारियों को नियमों तोड़ निकालने या फिर इसकी अवहेलना मिलने की विशेष छुट कैसे मिल जाती है। जबकि यह कुछ दिन बाद ज्वाइनिंग करने पर भी कोई विशेष फर्क नहीं पड़ जाता।

क्या कहना है अधिकारी कहा
इस संबंध में नवनियुक्त सीएमएचओ जीपी शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने १२ अप्रैल को अपना सैंपल दिया था। जिसके बाद १५ अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी। इसके बाद से वे होम आइसोलेशन पर चल रहे थे। २3 अप्रैल को कोरोना की फिर से जांच कराई। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद नई जिम्मेदारी संभालने पहुंचा था। इस बीच जिला प्रशासन के आला अधिकारियों का मार्गदर्शन भी लिया गया है।

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