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कोरोना का असर:मार्च में पंजीयन करा चुके 5500 भक्तों की मनोकामना जोत पर फिर कोरोना का संकट क्योंकि अब तक कोई तैयारी नहीं

रायपुर12 दिन पहले
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  • अब एक माह ही शेष, लेकिन गाइडलाइन जारी नहीं हुई इसलिए संशय बरकरार

शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू हो रही है। इस बार आस्था के जोत मंदिरों में जगमगाएंगे या चैत्र नवरात्र की तरह मां का दरबार सूना रह जाएगा, इसे लेकर संशय बरकरार है। वो इसलिए क्योंकि अब सिर्फ एक माह ही शेष हैं और प्रशासन ने इसे लेकर कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। लिहाजा, मंदिरों में भी तैयारियां शुरू नहीं की गई हैं। यही वजह है कि महामाया मंदिर में मार्च से पंजीयन करवा चुके 55 सौ भक्तों की मनोकामना जोत पर एक बार फिर कोरोना का संकट मंडराने लगा है। दरअसल, चैत्र नवरात्र 25 मार्च से शुरू होनी थी और इससे दो दिन पहले 23 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद मंदिरों पर ताला लग गया। शहर में सबसे ज्यादा साढ़े 10 हजार के करीब जोत पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में जलाए जाते हैं। तब मंदिर ट्रस्ट ने घोषणा की थी कि 55 सौ भक्तों की जोत का पंजीयन रद्द करने के बजाय इन्हें वे शारदीय नवरात्र में जलाएंगे। वहीं, शहर के बाकी मंदिरों ने जोत न जलाने की घोषणा करते हुए भक्तों की पंजीयन राशि लौटा दी थी। भक्तों को अक्टूबर का इंतजार था ताकि शारदीय नवरात्र में वे मां के दरबार में मनोकामना जोत जलवा सकें, लेकिन गाइडलाइन के अभाव में मंदिरों ने अब तक पंजीयन शुरू नहीं किया है।

परेशानी: जितनी ज्यादा जोत जलंेगी, उतने ज्यादा सेवादार-भक्त आएंगे तैयारी: 5 माह में सीख चुके- महामारी से बचने क्या इंतजाम जरूरी हैं दरअसल, रायपुर में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। जिन मंदिरों में जितने ज्यादा जोत जलते हैं, वहां उतने ज्यादा सेवादारों की जरूरत पड़ती है। दूसरी बड़ी परेशानी यह है कि नवरात्रि के दौरान जो भक्त जोत जलवाते हैं वे पूरे परिवार के साथ उस जोत के दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसे में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल होगा। हालांकि, मंदिर ट्रस्टों ने साफ कर दिया है कि इन साढ़े 5 महीनों में कोरोना से बचाव के लिए काफी तैयारियां की जा चुकीं हैं। प्रशासन से अनुमति मिलती है तो पहले के मुकाबले आधे सेवादारों की मदद से ही 9 दिन तक जोत की देखरेख की जाएगी। मंदिरों में सैनिटाइजर टनल और दूसरे जरूरी उपाय भी पहले ही किए जा चुके हैं।

^ चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिरों में कोरोना से बचाव के जरूरी इंतजाम नहीं थे। इसलिए लॉकडाउन की घोषणा के बाद सभी ने जोत नहीं जलाने के आदेश पर अपनी सहमति दी। साढ़े 5 महीनों में सारे जरूरी इंतजाम किए जा चुके हैं। जब बाजार और अन्य गतिविधियों के लिए अनुमति दी जा रही है तो शासन-प्रशासन को चाहिए कि जोत जलाने की अनुमति भी दें। यह न सिर्फ मंदिर ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि भक्तों की भी मांग है। डीके दुबे, काली मंदिर, आकाशवाणी चौक ^ चैत्र नवरात्रि में जिन भक्तों ने जोत के लिए पंजीयन राशि जमा करवाई थी, उन्हें उनका पैसा लौटा दिया गया था। लॉकडाउन के बाद से ही मंदिर में भक्तों की आवाजाही कम हो गई है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्था और संचालन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि मंदिर का बिजली बिल चुकाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। सरकार को चाहिए हमारी मदद करें। रवि तिवारी, बंजारी मंदिर, रविवि

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