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कोरोना विश्लेषण:राजधानी में कोरोना की पहली लहर ने ली लोगों की जान, इनमें 579 सिर्फ अक्टूबर तक

रायपुर14 दिन पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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राजधानी में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इनडोर स्टेडियम को भी कोविड अस्पताल मेें बदल दिया गया था। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
राजधानी में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इनडोर स्टेडियम को भी कोविड अस्पताल मेें बदल दिया गया था। (फाइल फोटो)
  • सितंबर-अक्टूबर भारी पड़े राजधानी पर, सिर्फ सितंबर में ही मिले थे 22495 पॉजिटिव

रायपुर में कोरोना मौत का आंकड़ा 800 के पार पहुंच गया है। प्रदेश में कोरोना मौत के मामले में इस आंकड़े पर पहुंचने वाला रायपुर पहला जिला बन गया है। 18 मार्च को राजधानी में ही प्रदेश का पहला केस मिला था। अब ठीक 11 माह बाद, 18 फरवरी को मौतों का आंकड़ा 800 पर पहुंच गया।

हालांकि राजधानी को सबसे ज्यादा नुकसान कोरोना की पहली लहर यानी मार्च से अक्टूबर के बीच ही हुआ। इस पहली लहर यानी मार्च से अक्टूबर के बीच शहर में कोरोना के 41,365 केस मिले और इस दौरान 579 लोगों की जान इसी संक्रमण से हुई। अगर नवंबर से दूसरी लहर की शुरुआत मानी जाए, तो इस लिहाज से 15 नवंबर से 18 फरवरी के बीच राजधानी में महज 11,623 संक्रमित ही मिले हैं। इस दौरान मौतें भी 221 हुईं, अर्थात दूसरी यानी मौजूदा लहर के मुकाबले राजधानी पर पहली लहर संक्रमण के मामले में चार गुना और मौतों के मामले में दोगुना घातक रही है।

कोरोना काल के पूरे 11 महीने में सितंबर के महीने में राजधानी में सबसे ज्यादा 22495 पॉजिटिव केस मिले। इसी महीने में सबसे ज्यादा अधिक 281 मौत भी हुई है। अक्टूबर के महीने में 7536 केस मिले, लेकिन मौत का आंकड़ा 151 रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. अंबेडकर के क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. ओपी सुंदरानी ने भास्कर के पाठकों के लिए रायपुर में 800 मौत होने का विश्लेषण किया है। ओपी सुंदरानी की कलम से पढि़ए ये पूरा विश्लेषण...

सितंबर ही सबसे ज्यादा घातक
राजधानी में जैसा हम सबने देखा मार्च में पहला केस मिलने के बाद से जून तक की स्थितियां काफी नियंत्रित रही। चाहे मौत हो या कोरोना के नए केस इस दौरान स्थितियां काफी कंट्रोल में दिखी। जुलाई के बाद से ही केस बढ़े और धीरे धीरे फिर मौत के आंकड़े भी बढ़ने लगे। हम सभी ने देखा कि जून में अनलॉक होने के बाद से स्थितियों में तेजी से बदलाव आया, लोगो की आवाजाही भी बढ़ी और इससे संक्रमण का फैलाव भी तेजी हुआ।

इस दौरान जो मौत दर्ज हुई उसमें सबसे ज्यादा ऐसे मरीजों की मौत रही जिनकी उम्र 50 से 60 के बीच रही, उन्हें कोरोना के साथ दूसरी अन्य गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, शुगर, हार्ट की दिक्कत रही। हम सबने महसूस किया है कि पहले संक्रमण का फैलाव बहुत तेजी से होता था, एक ही घर में कई सारे पॉजिटिव मिल जाते थे। लेकिन नंवबर के बाद से स्थितियों में बदलाव आते रहा, कोरोना अब तेजी से नहीं फैल रहा है।

800 मौत चिंताजनक स्थिति
रायपुर में अब तक 800 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। कोरोना या अन्य गंभीर बीमारियों के साथ मृत्यु दर का प्रतिशत करीब 1.45 प्रतिशत रही है। रिकवरी रेट यानी ठीक होने की दर 98.55 के आसपास है।

रायपुर में हुई 800 मौतों में से करीब 45 प्रतिशत ऐसी हैं, जिनमें लोगों ने देर से जांच करवाई और तब तक उनकी स्थिति बिगड़ चुकी थी। हालांकि कोमॉर्बिडिटी के मामले कहीं न कहीं उनके साथ जुड़े रहे। सितंबर-अक्टूबर में करीब-करीब हर आयुवर्ग के लोगों की कोरोना से जान गई। इनमें 30-40 साल वाले युवा भी थे, तो 50 पार वाले भी।

जानिए लहर में कैसी रही रायपुर की स्थिति

  • मार्च की शुरुआत से अक्टूबर के बीच
  • पहली लहर रायपुर में कुल केस - 41,365
  • इस दौरान मौत - 579
  • पहली लहर का पीक
  • सितंबर अक्टूबर में कुल केस - 30028
  • कुल मौत - 432

दूसरी लहर में अभी तक ऐसी स्थिति

  • 15 नवंबर से अब तक कुल केस - 11623
  • कुल मौत - 167
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