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बदला मौसम:छत्तीसगढ़ के आसमान में छाए बादल, बूंदाबादी भी हुई, आज-कल में हो सकती है हल्की बरसात

रायपुर2 महीने पहले
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प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। रायपुर में सुबह हल्की बुंदाबादी भी हुई। - Dainik Bhaskar
प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। रायपुर में सुबह हल्की बुंदाबादी भी हुई।
  • 24 घंटे में 1 से 3 डिग्री बढ़ गई गर्मी, रायपुर के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबादी

छत्तीसगढ़ के आसमान में बादल लौट आए हैं। बिलासपुर-पेण्ड्रा और उससे लगे कुछ हिस्सों को छोड़कर शेष छत्तीसगढ़ का आसमान हल्के और मध्यम आकार के बादलाें से ढका है। इसकी वजह से न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस वृद्धि दर्ज की गई है। रायपुर के कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबादी हुई। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है, कुछ क्षेत्रों में आजकल में बेहद हल्के से हल्के स्तर तक की बरसात हो सकती है।

रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया, प्रदेश में उत्तर की ओर से ठंडी हवा आ रही है। वहीं दक्षिण-पूर्व से नमी युक्त अपेक्षाकृत गर्म हवा का आना भी जारी है। इसकी वजह से अपलिफ्ट मिल रहा है और बादल बन रहे हैं। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया, अनुमान है कि कुछ हिस्सों में बेहद हल्की बरसात होगी। सरगुजा संभाग, बिलासपुर और पेण्ड्रा-मरवाही के कुछ हिस्सों में कल हल्की बरसात की संभावना जताई जा रही है।

इन बादलों की वजह से राजधानी रायपुर के तापमान में डेढ़ डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज हुई है। बुधवार को रायपुर का न्यूनतम तापमान 19.0 डिग्री सेल्सियस था। गुरुवार सुबह यह 20.5 डिग्री सेल्सियस मापा गया है। यह सामान्य से 7.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। 24 घंटे में सबसे बड़ा अंतर जगदलपुर में दर्ज हुआ। वहां बुधवार को न्यूनतम तापमान 15.9 डिग्री सेल्सियस था। आज सुबह इसे 19.5 डिग्री सेल्सियस मापा गया है।

10 जनवरी से लौटेगी ठंड

बरसात के बाद आसमान साफ होगा तो ठंड फिर लौटेगी। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि 10 से 13 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। अधिकतम तापमान में भी एक से दो डिग्री की गिरावट संभावित है। उसके बाद तापमान का पारा फिर से चढ़ने लगेगा।

ऐसे ही हवाओं से बनती है बिजली

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक विपरीत दिशाओं से आ रही हवाओं की वजह से बादलों में बिजली बनती है। सर्दी के मौसम में घने बादलों के बीच बिजली का बनना अधिक खतरनाक होता है, यानी उसके धरती पर गिरने की संभावना ज्यादा होती है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा बताते हैं अभी जितनी उंचाई पर बादल बने हैं, उसमें बिजली बनने और गिरने की संभावना नहीं के बराबर है।

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