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चाॅकलेट डे आज:राजधानी के तीन युवाओं ने 6 महीने रिसर्च कर बनाई शुगर फ्री चॉकलेट, मिला रहे शक्कर से कई गुना मीठा स्टीविया

रायपुर2 वर्ष पहलेलेखक: अनुराग सिंह
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  • अमृत, आनंद और गौरव बना रहे 6 फ्लेवर की चॉकलेट, इसमें ऐसे इंग्रीडिएंट्स जो सेहत के लिए हैं फायदेमंद, इसी खासियत के लिए जीईसी सूरत ने दिया फंड

चॉकलेट डे पर दुनियाभर के लाेग एक-दूसरे को चॉकलेट देकर ये दिन सेलिब्रेट करते हैं। बाजार में अवेलेबल ज्यादातर चॉकलेट्स में शुगर होता है, जो हेल्थ के लिए सहीं नहीं है। मार्केट में मिल रही शुगर फ्री चॉकलेट्स में आमतौर पर केमिकल मिलाया जाता है। शहर के तीन युवाओं गौरव कुमार, अमृत नाहर और आनंद ने मिलकर नेचुरल प्राेडक्ट से शुगर फ्री चॉकलेट बनाने की शुरुआत की है। न सिर्फ चॉकलेट, बल्कि वे 50 परसेंट शुगर फ्री कैंडी भी बना रहे हैं। खास बात यह है कि चॉकलेट और कैंडी बनाने के लिए उन्होंने किसी भी प्रकार का केमिकल यूज नहीं किया है। अमृत नाहर ने बताया कि मिठास के लिए हमने स्टीविया पौधे का उपयोग किया है, जिसका पत्ता शक्कर से कई गुना ज्यादा मीठा होता है।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार ये शक्कर से 45 गुना तो कुछ रिपोर्ट के अनुसार 200 गुना ज्यादा मीठा होता है। चॉकलेट के लिए कोको पाउडर केरल से मंगवा रहे हैं। बाकी सामान बेमेतरा, रायपुर, बस्तर जैसे अलग-अलग जिलों के किसानों से खरीद रहे हैं।

उन्हाेंने दावा किया कि चॉकलेट और कैंडी शुगर फ्री होने के साथ इम्यूनिटी बूस्टर भी है। इंग्रीडिएंट्स की वजह से ये आंख और मेमारी के लिए भी फायदेमंद है। उनके स्टार्टअप जोरको को जीईसी सूरत से शुगर फ्री चॉकलेट बनाने के लिए 1 लाख का फंड भी दिया है। गौरव क्वालिटी, अमृत डेवलपमेंट और आनंद नाहर सप्लाई और मार्केटिंग संभालते हैं।

14 तरह की जड़ी-बूटियों से बना रहे हर्ब्स चाॅकलेट
अमृत ने बताया, इम्यूनिटी बूस्टर चॉकलेट बनाने के लिए हम उसमें अश्वगंधा, तुलसी, बड़ी इलायजी, गिलोय, पिपली, लौंग, दाल चीनी, मुलेठी, जावित्री, काली मिर्ची, जायफल, कस्तूरी हल्दी जैसी 14 जड़ी बूटियों का पाउडर डालते हैं। ये बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी फायदेमंद है। इसे डायबिटिक पेशेंट भी खा सकते हैं।

6 महीने में 25 फेलियर के बाद मिली सक्सेस
उन्होंने बताया, पिछले 6 महीने से हम इस प्राेजेक्ट पर काम कर रहे थे। इस दौरान मिठास के लिए कई प्रकार के पौधों का उपयोग किया। आखिर में स्टीविया की पत्ती का इस्तेमाल सफल रहा। शुरुआत में इसके पत्ते को सुखा कर इस्तेमाल किया।

इससे चॉकलेट में कड़वाहट आ रही थी। इसके बाद पौधे के तना और दूसरे हिस्साें का उपयोग किया। छह महीने में लगभग 25 बार फेल होने के बाद चॉकलेट बनाने में सफल रहे। चॉकलेट बनाने के लिए इसमें कोको पाउडर, मिल्क सॉलिड, नट्स, स्टीविया एस्टेक्स, ड्रायफ्रूट्स के साथ ग्रीन फ्रूड्स एड करते हैं। अमृत नाहर ने बताया कि चॉकलेट लिची, ऑरेंज, हर्ब्स, कच्चा कैरी, मीठा आम और जलजीरा जैसे छह फ्लेवर में बना रहे हैं।

मई में शुरू किया स्टार्टअप, बना रहे 35 प्रोडक्ट
अमृत ने बताया कि किसानों से फसल लेकर हर्बल टी, कैंडी, कॉफी, ड्रिंक्स, लड्‌डू, हर्बल टी मसाले जैसे 35 प्रकार के आर्गेनिक प्रोडक्ट बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि आनंद मेरा भाई है। सिमगा में हुए जीवनविद्या शिविर में हमारी मुलाकात गौरव से हुई। कुछ अलग करने की चाह में हमने आॅर्गेनिक खेती और आयुर्वेद के बारे में रिसर्च की। मई 2020 में काम शुरू किया। चॉकलेट का सैंपल रेडी हो गया है। इसका बड़े स्तर पर प्रोडक्शन लगभग डेढ़ महीने बाद शुरू करेंगे।

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