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  • To Celebrate Indradevata, The Villagers Got Married For Both Of Them, Wedding Cards Were Printed, The Procession Arrived With A Melody; 3 Thousand People Attended

छत्तीसगढ़ में मेंढक-मेंढकी की शादी, VIDEO:इंद्र देवता को मनाने के लिए रचाया दोनों का ब्याह, शादी के कार्ड छपे, बैंड के साथ पहुंचे बाराती; 3 हजार लोग हुए शामिल

रायगढ़7 दिन पहले
दोनों की शादी के लिए गांववालों ने कार्ड छपवाया था।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा इलाके में दो गांवों के लोगों ने मेंढक और मेंढकी की शादी कराई है। आदिवासी मान्यता है कि इस तरह की शादी से इंद्रदेव प्रसन्न हो जाएंगे और अच्छी बरसात होगी। शादी के लिए बकायदा कार्ड छपवाए गए। आस-पास के गांव के लोगों को न्योता भी दिया गया। 700 से ज्यादा बाराती गाजे-बाजे के साथ नाचते-गाते बारात लेकर दूसरे गांव पहुंचे। कुल मिलाकर इस शादी में 12 गांव के 3 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए।

ये पूरा मामला लैलूंगा के सोनाजोरी गांव और बेसकीमुड़ा गांव का है। शनिवार को सोनाजोरी गांव के सैकड़ों लोग दूल्हे मेंढक राना टिग्रिना की बारात लेकर बेसकीमुड़ा पहुंचे। दोपहर में पंडितों ने वैदिक रीति-रिवाज के साथ दुल्हन रानी जाननी बेंग से राजा की शादी कराई, शाम को मेंढकी की विदाई कर दी गई।

मिट्‌टी के बर्तन में मेढ़क और मेढ़की।
मिट्‌टी के बर्तन में मेढ़क और मेढ़की।

गांववालों को उम्मीद, अब अच्छी बारिश होगी
दरअसल, इस साल पूरे प्रदेश में पिछले साल की अपेक्षा कम बारिश हुई है। यही हाल रायगढ़ जिले में भी है, हालांकि लैलूंगा ब्लॉक में ही सबसे अधिक बारिश हुई है, लेकिन ग्रामीणों ने पूरे जिले में अच्छी बारिश के लिए इंद्र देव को मनाने के लिए मेढ़क और मेढ़की की शादी रचाई है। गांववालों को उम्मीद है कि जिले में जरूर अच्छी बारिश होगी।

वैदिक रीति-रिवाज से हुई शादी।
वैदिक रीति-रिवाज से हुई शादी।

1978 में भी इसी तरह कराई गई थी शादी
बेसकीमुड़ा के देवाधि प्रसाद बेहरा ने बताया कि 1978 में सूखे की स्थिति के कारण आदिवासी मान्यता और परंपरा के मुताबिक मेंढक-मेंढकी का शादी कराई गई। बारात बेसकीमुड़ा से सोनाजोरी गई थी। इसके बाद खूब बारिश हुई और सूखा दूर हुआ। इस बार गांव वालों ने तय किया कि सोनाजोरी का दूल्हा बारात लेकर बेसकीमुड़ा आएगा। शादी के लए गांव वालों ने आपस में फंड इकट्‌ठा किया था।

गांव के लोगों ने शादी के दौरान इस तरह से आदिवासी पारंपरिक नृत्य किया।
गांव के लोगों ने शादी के दौरान इस तरह से आदिवासी पारंपरिक नृत्य किया।

मेंढकी जाननी बेंग को हल्दी लगाई गई
देवाधि प्रसाद ने बताया कि भुइयांपानी के संतोष पंडा और जनार्दन पंडा ने वैवाहिक रस्म को पूरा कराया। मिट्‌टी के बर्तन में भरे पानी में तैरते मेंढक और मेंढकी के फेरे कराए गए। दूल्हा-दुल्हन फुदककर भाग न जाएं इसलिए उनकी निगरानी की जा रही थी। बेसकीमुड़ा में बारात के पहुंचने से पहले मेंढकी जाननी बेंग को हल्दी लगाई गई थी। वहीं बारात पहुंचने पर घरातियों ने कन्यदान भी किया। इससे इकट्ठा चार हजार रुपए भी मेंढकी को विदाई के वक्त दे दिए गए। गृहस्थी शुरू करने बर्तन, श्रृंगार सामग्री और कपड़े दिए। शाम को विदाई के मुहूर्त पर जाननी अपने पति राजा टिग्रिना के साथ ससुराल गई।

मेंढक और मेंढकी को इस तरह से मिट्‌टी के बर्तन में रखा गया था।
मेंढक और मेंढकी को इस तरह से मिट्‌टी के बर्तन में रखा गया था।

पंडित से निकलवाया गया मुहूर्त
गांव वालोंं ने बताया कि शादी के लिए हमने कार्ड पहले ही छपवा लिए थे, जिसमें पूरे कार्यक्रम का विवरण दिया गया था। पंडितों से शादी के लिए मुहूर्त भी निकलवाए गए थे। कार्ड भी घर-घर जाकर दिए गए थे। बारात लेकर सोनाजोरी और आसपास के गांव के लगभग 700 लोग चार किलोमीटर दूर नाचते-गाते बारात लेकर बेसकीमुड़ा पहुंचे। डीजे पर बाराती झूमते दिखे। मेंढक की एक प्रजाति का अंग्रेजी नाम राना टिग्रिना है, इसीलिए शादी कार्ड में मेंढक का नाम राना टिग्रिना रखा गया था। शादी में छातासरई, होरोगुड़ा, भुइंयापानी, मुगडेगा, ढोरोबीजा, चिरईखार, करवारजोर और सियारधार गांव के लोग भी शामिल हुए थे।

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