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विश्व हाथी दिवस:मां के साथ हाथी के बच्चे की मस्ती, केलों को फुटबॉल बनाया; आईएएस अफसर ने शेयर किया वीडियो, लिखा- बचपन

रायपुरएक महीने पहले
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छत्तीसगढ़ की आईएएस अफसर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडेयाे शेयर किया है। इस वीडियो में हाथी का एक बच्चा अपनी मां के साथ मस्ती कर रहा है।
  • वन विभाग के क्षेत्र में मादा हाथी और उसके बच्चे को केला खाने के लिए दिया गया था
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने ट्वीटर हैंडल पर पोस्ट किया है

आज यानी 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस है। छत्तीसगढ़ में अक्सर हाथी और मानव संघर्ष की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसे में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हाथी का एक बच्चा अपनी मां के साथ मस्ती कर रहा है। इस वीडियो को आईएएस अफसर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है।

करीब 34 सेकेंड के इस वीडियो में वन विभाग के परिक्षेत्र में मादा हाथी और उसके बच्चे को खाने के लिए केले दिए गए थे। इस दौरान पहले तो हाथी का बच्चा केला खाने का प्रयास करता है। जब केले की डली लुढ़क कर सड़क किनारे चली जाती है, तो उसके पीछे दौड़ता है, फिर अपनी मां के पास आकर मस्ती करना शुरू कर देता है। इसके बाद एक बार फिर केले की डली से खेलने लगता है।

पांच सालों में 36 से ज्यादा हाथी, 300 से ज्यादा लोगों की जान गई
प्रदेश में करीब 17 जिले हाथियों से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा सरगुजा क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही है, लेकिन सबसे ज्यादा हाथियों का उत्पात धरमजयगढ़, तोमर पिंगला में है। पांच वर्षों में 36 से अधिक हाथियों और करीब 300 लोगों की जान गई है। वन विभाग के अनुसार सरगुजा में 114, बिलासपुर में 107, रायपुर में 19 सहित प्रदेश में 240 से ज्यादा जंगली हाथी हैं।

हाथी प्रभावित क्षेत्र में एलिफेंट टूरिज्म
ओडिशा और आंध्रप्रदेश के जंगलों से भी यहां हाथी आ जाते हैं, इसके चलते हाथियों की संख्या बढ़ जाती है। इसको देखते हुए पिछले साल जहां वन विभाग ने तमोर पिंगला, लेमरू, धरमजयगढ़ क्षेत्र में एलिफेंट टूरिज्म बनाने का निर्णय लिया थ। वहीं कोरबा के 450 वर्ग किमी घनघोर जंगलों वाले लेमरू वन परिक्षेत्र में एलिफेंट रिजर्व बनाने का भी प्रस्ताव था। हालांकि अभी यह भी ठंडे बस्ते में है।

केंद्र भी चाहता है एलिफेंट रिजर्व
केंद्र सरकार ने वर्ष 2007 में कोरबा के लेमरू वन परिक्षेत्र को एलिफेंट रिजर्व करने की घोषणा की थी, लेकिन पूर्व राज्य सरकार का रूख सकारात्मक नहीं रहा। यही वजह है कि एलिफेंट रिजर्व अधिसूचित नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी हाथियों की समस्या को लेकर गंभीर हैं। वे लेमरू वन परिक्षेत्र को एलिफेंट रिजर्व घोषित करने के पक्ष में हैं। अधिसूचना का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।

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