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ये हैं कर्मवीर:कोरोना मृतकों के अपने दूर इसलिए ये करते हैं अंतिम संस्कार

बलौदाएक महीने पहले
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पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार करते कर्मी। - Dainik Bhaskar
पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार करते कर्मी।
  • जिला अस्पताल, कोविड केयर सेंटर या अन्य अस्पतालों से आए डेडबॉडी का कोिवड नियमों के साथ किया अंतिम संस्कार

कोरोना का नाम सुनते ही मनुष्य के मन में डर हो जाता है। खासकर जब यह कहा जाता है कि किसी की मौत हो गई तो स्थिति और डरावनी हो जाती है। लेकिन नगर पंचायत के कर्मी, पटवारी, पंचायतों के सचिवों ने प्रारंभ में डरने के बाद यह मान लिया कि आखिर किसी न किसी को तो ऐसे संक्रमित लोगों का अंतिम संस्कार करना ही है तो हमें मौका मिला तो क्यों न करें इस मानवीय भावना से इसे एक कर्तव्य भी मान लिया है।

अब तक इन लोगों ने ऐसे सात डेड बॉडी का जो जिला अस्पताल, कोविड केयर सेंटर या अन्य अस्पतालों से आए उनका अंतिम संस्कार पीपीई किट पहन कर किया। एक ओर जहां पूरे देश प्रदेश में कोरोना के कहर से सिहरे लोग अपने अपने घरों में घुसकर रह रहे हैं। कोरोना के डर से बार बार हाथ धो रहे हैं, किसी से मिल नहीं रहे हैं। तमाम तरह की कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुये अपने घर में परिवार के साथ लॉकडाउन का पालन करते हुये रह रहे हैं। दूसरी ओर बड़ी तादाद में शासकीय कर्मचारी विशेषकर पुलिस विभाग, पंचायत सचिव, नगरपंचायत के कर्मचारी, कोटवार आदि इस महामारी में दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं। उनको भी इस बीमारी की चपेट में आने का डर है, क्योंकि ये कर्मचारी फ्रंटलाइन में आकर काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों में सबसे अधिक खतरे का कार्य करने वालों में नपं के चार सफाई कर्मचारी हैं।

जो संक्रमित डेड बाडी को पकड़कर, उठाकर श्मशान में ससम्मान अंतिम संस्कार करते हैं। इन सफाई कर्मचारियों में रमेश बघेल, मंगल सिंह, रामकुमार बिछवानी व कृपाल सिंह शामिल हैं। इनके अलावा नपं के सहायक राजस्व निरीक्षक दीपांकर यादव, पटवारी बलौदा परमलाल कुम्हार, आरएचओ तिरीथ राम पटेल व परदेशी पटेल हैं। जिनका कार्य है अधिकारियों के आदेश पर कोरोना से मृत व्यक्ति के शव को जिला अस्पताल,कोविड सेंटर या अन्य शासकीय अस्पतालों से वाहन में लाकर उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था कर सफाई कर्मचारियों को सौंपना है।

अब तक सात का कर चुके हैं अंतिम संस्कार
सहायक राजस्व निरीक्षक दीपांकर यादव का कहना है कि उनकी टीम ने अब तक आदेश पर अस्पतालों से तीन डेडबाडी, व होम आइसोलेशन में मृत चार लोगों की डेड बाडी को अस्पताल के अधिकारियों के कहने पर अंतिम संस्कार किया है।

किसी को तो करना ही है यही सोचकर कर रहे काम
दीपांकर यादव व पटवारी परमलाल कुम्हार का कहना है कि जब उनकी ड्यूटी लगाई गई तो उनका मन सशंकित व भयभीत था। पर उन्होंने सोचा कि आखिर किसी न किसी को तो ये काम करना ही पड़ेगा तो क्यों न हम ही करें।

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