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नवरात्रि विशेष:अन्नधरी मां की कृपा से पहरिया पहाड़ के जंगल में लकड़ी सुरक्षित

बलौदाएक महीने पहले
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  • मान्यता...लकड़ी घर ले जाने पर कोई अनहोनी की आशंका,कई पेड़ टूटे पड़े हैं लेकिन कोई इस लकड़ी का उपयोग नहीं करता अब सिर्फ पहरिया पहाड़ का ही जंगल बचा हुआ

पहाड़ में विराजित मां अन्नधरी दाई पहरिया पाठ का दर्शन करने के लिए नवरात्रि में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण शासन के दिशानिर्देशो का पालन करते हुए मंदिर में दर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंदिर के पुजारियों को पूरे पर्व भर मंदिर में है रहने की गाइड लाइन जारी की है। मंदिर परिसर के आसपास मेला ठेला लगाने की पूरी तरह मनाही है। इसके कारण पहरिया पाठ में नवरात्रि में रौनक नही दिख रही है। जिला जांजगीर चांपा के बलौदा ब्लाक के पहरिया में माँ अन्नंधरी दाई पहरिया पाठ पहाड़ में विराजमान है। पहरिया पाठ के संदर्भ में कोई इतिहास तो नही फिर भी बुद्धजीवी के अनुसार मंदिर उस समय बनाया गया जब पहरिया रतनपुर राज्य के अंतर्गत आने वाला पहाड़ी गांव था। पहरिया पहाड़ों से घिरा हुआ है। मां अन्नंधरी दाई की कोई पुराना चमत्कारिक इतिहास तो नहीं है फिर भी जो है, वह कोई कम नहीं ।अंचल के लोग देवी के चमत्कार व महिमा से अभिभूत है। अन्नधरी दाई पहाड़ पर बने मंदिर में विराजमान है। पहाड़ पर साल के बड़े बड़े वृक्ष लगे हुए है, कई वृक्ष टूटे पड़े है,लेकिन कोई इस लकड़ी का उपयोग नहीं करता। पहाड़ में छायादार वृक्ष करोड़ों की संपत्ति होगी, जो आज भी सुरक्षित है। पहाड़ के जंगल की लकड़ी को कोई नहीं काटता। ,वहां का एक तिनका उठाकर कोई भी बाहर नहीं ले जा सकता। मां अन्नधरी मां की कृपा से यहां की हरियाली बनी हुई है।सड़क किनारे जंगल में आंधी या प्राकृतिक आपदा से पेड़ के गिर जाने पर भी कोई उसकी लकड़ियां नहीं उठाता।

देवी के संबंध में यह है मान्यता
मान्यता है कि यहां की लकड़ी घर ले जाने पर कोई अनहोनी घटना हो सकती है। क्षेत्र पूरा पहाड़ और जंगलों से घिरा था पर अब सिर्फ पहरिया पहाड़ के ही जंगल बचा हुआ है क्योंकि यहां मां अन्नधरी दाई की कृपा है। यहां के लोगों ने समिति बनाकर अन्नधरी दाई के विकास के लिए अनेकों कार्य कराए और मंदिर का निर्माण भी कराया। आसपास के लोगों का मां अन्नंधरी दाई के प्रति अपार श्रद्धा है
कोरोना गाइडलाइन का हो रहा पालन
पहरिया पाठ सेवा समिति के अध्यक्ष आनंद नामदेव ने बताया कि शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार में ही बांस का बेरीकेट लगाकर बंद कर दिया है तथा इसका प्रचार-प्रसार कर दिया गया है कि इस बार देवी के दर्शन नहीं हो पाएंगे। मां अन्नधरी देवी के भक्तों ने इस बार तेल ज्योति 500 ,घृत कलश 28 ,तेल जवां कलश 23 व घृत श्रृंगार 25 दीएं जलाएं हैं।

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