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रिवर्स पलायन:लॉकडाउन में तकलीफ झेलकर लौटे थे, अनलॉक के बाद फिर जा रहे दूसरे राज्य, मालिकों ने हवाई जहाज की टिकट भेज बुलाया

दानसरा2 दिन पहले
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जहाज में बैठे दंपती। गोड़ा के श्रमिक ऐसे गए बस से।

संदीप शर्मा | अप्रैल से जुलाई तक पैदल, साइकिल, किराए की गाड़ी से, ट्रकों में लिफ्ट लेकर लौटते लोगों की तस्वीर दिखी थी। दूसरे राज्यों में रोजगार छूटा, खाने का संकट हो गया तो जिले में 25 हजार से अधिक प्रवासी लौटे थे। कुछ ने कभी बाहर नहीं जाने की बात कही थी लेकिन जीवन बुरी यादों को भूलकर आगे बढ़ने का नाम है। तब जिन लोगों ने कामगारों को भूखा छोड़ दिया था अब उन्हें हवाई जहाज की टिकट भेज रहे हैं। कोई बस तो कोई दूसरे इंतजाम कर रहा है।
सरकारी प्रयास भी हो रहे हैं- जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 19 हजार 815 प्रवासियों के लिए इंतजाम किए गए। सबसे अधिक 10 हजार 842 प्रवासी सारंगढ़ से हैं। पहले सारंगढ़ में 5341 लोगों के जॉब कार्ड थे। कोरोनाकाल में वापसी के बाद 3221 लोगों के जॉब कार्ड बनाए गए हैं और 995 के नाम जोड़े गए हैं। जिले में हर साल 25 हजार से अधिक श्रमिक काम के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं।

राजमिस्त्री दंपती पहुंचे जम्मू 60 हजार का कर्ज उतारा
सारंगढ़ के गोड़ा गांव के मदन सुंदर साहू राजमिस्त्री हैं। लॉकडाउन में जम्मू के ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए। भूखों मरने की नौबत आई तो गांव लौटे। संकट में 70 हजार रुपए का कर्ज हो गया। जम्मू से फोन आया, बताया काम शुरू हो गया है आ जाओ। खाते में 14 हजार रुपए डाले। 7 अगस्त को मदन अपनी पत्नी सावित्री के साथ गांव से झारसुगुड़ा एयरपोर्ट पहुंचा । वहां हवाई जहाज का टिकट लिया। दिल्ली और फिर जहाज से ही जम्मू पहुंचा । दो महीने में 60 हजार जमा किए और अपना कर्ज चुकाया। मदन ने भास्कर को बताया, मुझे 700 और पत्नी को 500 रुपए रोजाना मिलते हैं, रहने और खाने की व्यवस्था अलग है। गांव में इतने रुपए एक साल में भी नहीं जोड़ पाता।

डेली काम मिलता है, फसल कटते ही दिल्ली जाउंगा
ग्राम रेंगालमुड़ा के उमेश साहू कहते हैं, दिल्ली के फ्रेंड्स कालोनी में निर्माण के क्षेत्र में ही काम करते हैं। रोजाना 500 रुपए की मजदूरी मिलती है। काम पर लौटने के लिए मुझसे लगातार संपर्क किया जा रहा है। फसल कटाई के बाद जाउंगा।

140 से अधिक जा चुके
अब तक लगभग 140 लोगों के दूसरे राज्यों में जाने की जानकारी मिली है। बैगीनडीह के लगभग 25 और घोराघाटी के 15 लोग तेलंगाना के अलग-अलग शहरों में गए हैं। वहीं गोड़ा गांव से ही 100 लोग दिल्ली, आंध्र प्रदेश, जम्मू समेत दूसरे राज्य गए हैं।

मर्जी से बाहर जाए तो कैसे रोकें
"अनलॉक के बाद गांव के करीब 100 लोग वापस दूसरे राज्यों में चले गए हैं। हमने गांव पर ही रह काम करने एवं सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए समझाया। फिर भी मनमाफिक काम नही मिलने की बात कहकर चले गए।''
-सत्यवान साहू, सरपंच, गोड़ा

यहां उनकी पसंद का काम नहीं
"झारा जनजाति के शिल्पकार बैंगीनडीह से करीब 25 एवं घोराघाटी से करीब 15 लोग काम के लिए दूसरे राज्य में गए हैं। ये बेलमेटल कलाकृतियां बनाते हैं। कुछ सालों से डिमांड कम हुई तो ये बाहर जाने लगे। कोरोना के वक्त लौटे थे, अब फिर गए हैं।''
- जितेंद्र पटेल सरपंच, बैगीनडीह

मजदूरी देना हमारी पहली प्राथमिकता
"जिला पंचायत के निर्देशन में हमने गांवों का सर्वे कराया है। जहां काम कराए जा सकते हैं वहां मनरेगा के तहत काम करा रहे हैं। एक व्यक्ति को 194 रुपए की दैनिक मजदूरी दी जाती है, साल में 150 दिन तक काम मिलता है। कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को काम के लिए बाहर जाना ना पड़े।''
-अभिषेक बैनर्जी, सीईओ, जपं, सारंगढ़

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