बच्चों की मस्ती शुरू:स्कूली बच्चों की हुई छुट्टी, क्रिकेट व मस्ती से काट रहे दिन

दानसरा2 महीने पहले
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सारंगढ़ क्षेत्र के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टी होते ही घरों में बच्चों की मस्ती शुरू हो गई है। पिछले 2 साल से कोविड 19 के दौर में घरों पर समय काटने वाले बच्चे इस वर्ष अपनी मस्ती के फुल शबाब में नजर आ रहे हैं। गर्मी के इन दिनों घरों से कन्नी काट कर गांव एवं खेत का रूख खेलकूद के साथ इनकी मस्ती में पैरेंट्स की बेचैनी को काफी बढ़ा दिया है। इस बार समय से पहले अत्यधिक गर्मी के मद्देनजर समय से पहले ही सरकार के द्वारा स्कूल की छुट्टियां दे दी गई ताकि बच्चों का गर्मी में परेशानी न हो।

कोविड दौर के बाद एक तरह की आजादी मिलने से बच्चे फुल मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं। बच्चों का इस तरह गर्मी और धूप में खेलने से पेरेंटस की चिंता बढ़ गई है। बच्चे कहीं खेलकूद और मस्ती के चलते बीमार न पड़ जाएं। बच्चों को बड़ दिनों बाद आजादी मिली है। जिसका पूरा फायदा बच्चे ले रहे हैं।बदमाशी भी ऐसी कर रहे हैं कि गुस्सा आने के बजाय हंसी आती है। बच्चे कहीं पर प्लास्टिक के बने बाजे को पीटकर खेल रहे हैं तो कहीं प्लास्टिक और मिट्टी के बने पुतले से पारिवारिक खेल खेल रहे हैं।तो कुछ गर्मी के इन दिनों में भी गांव के मैदान खेत में मैदानों में क्रिकेट खेलने निकल जा रहे हैं।

घर में टीवी और मोबाइल देखने की जिद

पैरेंट्स गोपाल पटेल, हरिचरण पटेल का कहना है कि जो बच्चे मोबाइल और टीवी देखने की जिद कर रहे हैं। अगर टीवी देखनी है तो अपने मन से ही कार्टून जैसे चैनल लगाकर देख रहे हैं। बिजली चली जाने पर मोबाइल में कार्टून देखने की जिद कर रहे हैं। अगर कार्टून देखने से मना करें तो मोबाइल गेम खेलने की जिद कर रहे हैं। बच्चे इन दिनों देर रात आईपीएल क्रिकेट भी देख रहे है। मोबाइल नहीं देने पर खाना नहीं खाना और रोना-धोना शुरू कर दे रहे हैं।

घर में खाने की चीजों की बढ़ी डिमांड
पैरेंट्स का कहना है कि बच्चे स्कूल जाते थे तो टिफिन बॉक्स लेकर जाते थे और आने पर होमवर्क मिलने से ध्यान पढ़ाई में रहता था लेकिन अभी बच्चे पूरी तरह से खाली हैं न पढ़ाई की चिंता बच्चे अपने मम्मी से दादी से नए-नए पकवान घर में बनाने की जिद कर रहे हैं। न बनाने पर दुकान से चिप्स, बिस्किट, चॉकलेट जैसे चीजों की डिमांड करने लगे हैं, जिससे रोजमर्रा खर्च बढ़ गया है।

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