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काफी उत्साह:ग्रामीण क्षेत्र में गूंजने लगे हैं प्रकृति पर्व कर्मा के गीत

देवरी9 दिन पहले
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झारखण्ड के प्रमुख त्योहारों में शुमार प्रकृति पर्व करमा को लेकर देवरी प्रखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में काफी उत्साह है। करमा को लेकर गाये जा रहे भैया हमर जियब हजार साल ये करम देव दियो दियो है कर्म गोसाई दियो आशीष आदि गीत गांव कस्बों गूंज रहे है सुबह शाम करमा का गीत सुनाई देता है। शुक्रवार को नहाय खाय के साथ यह त्योहार शुरू हुआ और करम एकादशी के अवसर पर यह पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। बताते चले कि करमा पर्व आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है। हालांकि इस पर्व को अन्य वर्ग के लोग भी बड़े ही धूमधाम व उत्साह के साथ मानते है।

पौराणिक परम्परा के अनुसार इस पर्व को महिलाओं द्वारा नैहर में आयोजन किया जाता है। वहीं कुंवारी कन्याएं भी अपने भाई की लंबी उम्र की कामना को लेकर विधिवत उत्साह के साथ मनाया जाता है। पर्व भादो माह की एकादशी के अवसर पर मनाया जाता है। इसकी शुरुआत एकादशी के नो दिन पहले की जाती है और एकादशी के एक दिन पूर्व महिलाएं व युवतियों नहाय खाय की रस्म अदा करती है। एकादशी को दिन भर उपवास के पश्चात शाम को अपने नजदीकी जलाशयों में स्नान करने जाती है उसके बाद तालाब से बालू व मिट्टी साथ मे लाकर पंच देवता की मूर्ति बना कर करम डाली के पास जावा डाली रख पूजन करती है।

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