नदी के दुर्गम मार्ग को पार करने को मजबूर:जान जोखिम में डालकर रेपी नदी के दुर्गम मार्ग को पार करने को मजबूर ग्रामीण

देवरीएक वर्ष पहले
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बीलखेड़ा डांग पंचायत क्षेत्र के मध्यप्रदेश बॉर्डर पर घने वन क्षेत्र में बसे कोटरा गांव में सौ फीसदी सहरिया परिवार निवास करते हैं। कोटरा गांव के लोगों का बारिश में निकलना मुश्किल हो जाता है। बारिश में रेपी नदी में पानी की आवक होने के बाद कोटरा गांव टापू बन जाता है।रेपी नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण ग्रामीण सहरिया जान जोखिम में डालकर रेपी नदी में होकर निकलते हैं। बारिश के दौरान करीब छह माह तक गांव में आने-जाने के लिए आवागमन के साधन भी नहीं पहुंच पाते। क्योंकि कोटरा गांव में प्रवेश करने से पहले नदी पड़ती है। नदी पर पुलिया नहीं है। बारिश के मौसम में नदी में पानी भरा रहता है। अन्य मौसम में भी लोग नदी में होकर आते-जाते हैं। शाहाबाद ब्लॉक का यह गांव अंतिम छोर पर बसा हुआ है।गांव में अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं आता है। जिस कारण लोगों का संपर्क भी नहीं होता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऊंचाई पर या पेड़ पर चढ़ने के बाद मोबाइल में नेटवर्क आता है, तब जाकर बात हो पाती है। जागृत महिला संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने पीडब्ल्यूडी विभाग को अवगत करवाकर नदी पर पुलिया निर्माण करवाने की मांग की है।

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