सरपंच की हत्या में 7 गिरफ्तार:सरकारी जमीन पर कब्जा का विरोध करने पर लाठी-डंडे और रॉड से पीट कर की थी हत्या; 5 फरार

​​​​​​​जांजगीरएक महीने पहले
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पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि 5 की तलाश की जा रही है। - Dainik Bhaskar
पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि 5 की तलाश की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर में सरपंच द्वारिका प्रसाद चंद्रा (50) की हत्या के आरोप में पुलिस ने मंगलवार को 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में एक छात्र भी शामिल है। जबकि 5 अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। 26 घंटे चले ग्रामीणों के प्रदर्शन के 20 घंटे बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी है। पूछताछ में आरोपियों ने सरकारी जमीन पर कब्जा का विरोध करने पर लाठी-डंडे और रॉड से पीट-पीट कर मार डाला था।

मालखरौदा क्षेत्र के भुतहा गांव में दबंगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। उस पर फसल भी लगा दी। इसकी शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग ने नोटिस जारी किया था। साथ ही फसल कटवा कर शासन के सुपुर्द करने की जिम्मेदारी सरपंच द्वारिका प्रसाद चंद्रा को सौंपी थी। यह कार्रवाई सोमवार को की जानी थी। इससे एक दिन पहले ही दबंग फसल कटवाने पहुंच गए। सरपंच ने आपत्ति जताई तो उनकी हत्या कर आरोपी फरार हो गए थे।

सरपंच द्वारिका प्रसाद चंद्रा - फाइल फोटो
सरपंच द्वारिका प्रसाद चंद्रा - फाइल फोटो

आरोपियों में पिता-पुत्र, सगे भाई भी शामिल
ग्रामीणों के बढ़ते दबाव को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई। टीमों ने दबिश देकर बोर्रा मधुकर, अमृत मधुकर उसके बेटे संजय, पलटन काठले, बुढगा उर्फ राजकुमार मधुकर, उसके भाई फूलचंद और छात्र लक्ष्मी प्रसाद मधुकर को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपी छोटेरवेली गांव के ही निवासी हैं। वहीं फरार बोर्रा के बेटे सोनू, छतराम काठले, लोकनाथ काठले, गनेश राम और गंगाराम की तलाश की जा रही है।

वीर भाठा चौक पर त्रिपाल लगाकर ग्रामीणों ने 26 घंटे रास्ता बंद रखा।
वीर भाठा चौक पर त्रिपाल लगाकर ग्रामीणों ने 26 घंटे रास्ता बंद रखा।

ग्रामीणों ने सड़क जाम कर 26 घंटे किया था प्रदर्शन
सरपंच द्वारिका प्रसाद चंद्रा की हत्या के विरोध में ग्रामीणों ने 26 घंटे प्रदर्शन किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने मालखरौदा क्षेत्र के वीर भाठा चौक पर ट्रैक्टर खड़ा कर रास्ता बंद कर दिया था। इसके साथ ही बीच चौक पर त्रिपाल लगाकर सड़क पर शव रखकर बैठ गए थे। रविवार दोपहर करीब 2 बजे से ग्रामीण सोमवार शाम तक प्रदर्शन करते रहे। ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। इसके बाद तहसीलदार अश्विनी चंद्रा और डायल 112 के कांस्टेबल को हटा दिया गया।

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