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कोरोना वारियर्स:सीनियर कैडे्टस के बाद मास्क नहीं थे, इसलिए जूनियर ने आंखों की सुरक्षा के लिए आई शील्ड, हर्बल सैनिटाइजर व मास्क बनाए

जांजगीर9 महीने पहले
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  • 7 सीजी बटालियन के अफसरों के नेतृत्व में संक्रमण के खिलाफ जंग में उतरे एनसीसी कैडेट्स

शहर के शाउमा विद्यालय क्र 1 के जूनियर कैडेट्स ने कपड़े का मास्क, आई शील्ड एवं हर्बल सैनिटाइजर बनाए और सीनियर को उनके ड्यूटी स्थल पर भेंट की गई। इसे बनाने में अजय देवांगन, अजय पटेल, राहुल विजय, श्रीनाथ गिरोलकर, दुर्गेश सूर्यवंशी, सौरभ गढ़वाल, राजेश विजय ने अपना योगदान दिया। 
कोविड-19 के लिए मैदान पर एनसीसी के सीनियर कैडेट्स ड्यूटी कर रहे हैं। उनके द्वारा डिस्पोजेबल मास्क का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही कई नये कैडेट्स के पास आई शील्ड एवं सैनिटाइजर नहीं है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जूनियर कैडेट्स  अजय देवांगन, अजय पटेल, राहुल विजय, श्रीनाथ गिरोलकर, दुर्गेश सूर्यवंशी, सौरभ गढ़वाल, राजेश विजय ने कपड़े का मास्क, आंखों की सुरक्षा के लिए आई शील्ड एवं हर्बल सैनिटाइजर का निर्माण किया गया है। मास्क, आई शील्ड एवं सैनिटाइजर को जूनियर कैडेट्स द्वारा सीनियर को उनके ड्यूटी स्थल पर भेंट दी गई। इन दौरान 7 सीजी बटालियन के कमान अधिकारी कर्नल रजनीश मेहता, एडम ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल भरत क्षत्रीय, एनसीसी अधिकारी मनीराम बंजारे, दिनेश चतुर्वेदी, सूबेदार रतन सिंह, रवि यादव, अश्वनी कुमार उपस्थित थे।
मल्टीयूजर कपड़े का मास्क 
मास्क बनाने वाले कैडेट अजय देवांगन ने बताया कि सूती कपड़ा व सिल्क को मिलाकर मास्क तैयार किया है। सूती कपड़े के साथ शिफॉन मिलाकर बनाया गया मास्क भी हवा में ड्रॉप लेट्स यानी तरल कणों को भी रोकता है।

आयुर्वेदिक पत्तियों से बनाया हर्बल सैनिटाइजर
कैडेट राहुल विजय ने बताया कि हर्बल सैनिटाइजर को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद आसान है। आसपास उपलब्ध वनस्पति एवं गोमूत्र का इसमें उपयोग किया गया है।। इसमें मुख्य रूप से नीम, अमरूद, तुलसी, एलोविरा के पत्ते, अदरक, कपूर, फिटकरी का प्रयोग किया गया है। 10 लीटर हर्बल सैनिटाइजर तैयार करने में 2 किलो नीम की पत्ती, 250-300 ग्राम तुलसी का पत्ता, अमरूद की पत्तियां 500-500 ग्राम, 100 ग्राम फिटकरी, कपूर के साथ-साथ करीब सवा लीटर गोमूत्र का उपयोग किया गया है। इसके बाद इसे एक बर्तन में पानी के साथ मिलाकर 48 घंटे लिए छोड़ दिया गया था। एक लीटर पानी में करीब 100 ग्राम अर्क मिलाकर सैनिटाइजर बनाया गया।
प्लास्टिक एवं इलास्टिक का आई शील्ड
कैडेट श्रीनाथ गिरोलकर को एनसीसी अधिकारी दिनेश चतुर्वेदी ने आई शील्ड निर्माण की जिम्मेदारी दी थी। गत्ते, प्लास्टिक एवं इलास्टिक का प्रयोग कर आंख एवं चेहरे की सुरक्षा के लिए आई शील्ड बनाया है। 

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