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कृषि वैज्ञानिकों की सलाह:फसल में भूरा माहो, धान को बचाने मुंदरी तक भरें पानी ताकि अंडे ही खत्म हो जाएं

जांजगीर2 महीने पहले
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  • खेत को बाहर से न देखें, अंदर उतर कर देखेंगे तो पता चलेगा रोग का
  • तना छेदक, बैक्टिरियल लीफ ब्लाइट बीमारियों के बाद अब भूरा माहो व पनिकल माइट की समस्या

धान की फसल अब गर्भोट अवस्था में पहुंच गई है। अर्ली वेरायटी की फसल अब छटक भी गई है। किसान तना छेदक, बैक्टिरियल लीफ ब्लाइट जैसी बीमारियों के बाद अब किसान भूरा माहो व पनिकल माइट जैसे कीट व बीमारी से जूझ रहे हैं। धान की फसलों में बालियां आने के साथ भूरा माहो व पनिकल माइट की समस्या भी आने लगी है।
ऐसे समझिए भूरा माहो के लाइफ साइकिल काे - कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक राजीव दीक्षित ने बताया कि अभी के मौसम व धान की जो अवस्था में भूरा माहो का आक्रमण होता है। उन्होंने बताया भूरा माहो की प्रौढ़ अपने अण्डे धान की निचली सतह पानी से थोड़ा ऊपर धान की पत्ती जिसे वैज्ञानिक भाषा में लीफ ब्लेड कहते हैं। भूरा माहो 2 से 12 समूह में अण्डे देती है। समूह में 250-300 अण्डे होते हैं। 3-4 दिन में शिशु बाहर आ जाते हैं और पौधे में आक्रमण चालू करते हैं। ये प्रारंभिक अवस्था में सफेद दिखाई देते हैं जो धान पौधे से चिपके रहते है।

इसलिए केवल मेड़ के ऊपर से न करें खेतों का निरीक्षण
केवीके के वैज्ञानिक डॉ. दीक्षित के अनुसार किसान केवल खेतों को मेड़ के ऊपर से न देखें बल्कि खेत के अंदर जाकर निरीक्षण करें जिससे वास्तविक स्थिति का पता चले। ऐसा नहीं करने के कारण ही भूरा माहो का आक्रमण तब समझ में आता है जब खेतों में कुछ हिस्सा जला हुआ सा दिखाई देता है। जिसे वैज्ञानिक भाषा मे होपर बर्न कहते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।

छाया वाली जगह में पहले हमला करते हैं माहो
डॉ. दीक्षित के अनुसार भूरा माहो का आक्रमण धान के खेत में सर्वप्रथम छाया वाली जगह में या जहां गोबर खाद का ढ़ेर गर्मी में डम्प किया गया होता है, वहां के धान काफी हरे-भरे होते हैं वहां या धान का निचला क्षेत्र जैसे मुही वाला क्षेत्र वहां होता है।

भूरा माहो से 40 से 60% तक फसलों को नुकसान, संतुलित खाद का करें उपयोग
भूरा माहो से 40 से 60% तक नुकसान हो सकता है। इसे रोकने हेतु यदि पानी व्यवस्था हो तो धान के प्रथम नोड जिसे मुंदरी कहते है वहां तक पानी भरें फिर खाली कर दें जिससे माहो के अण्डे खत्म हो जाएंगे व उनके शिशु बाहर नहीं आएंगे। नतीजतन खाद का अधिक इस्तेमाल न करें, संतुलित खाद का प्रयोग करें। गर्भोट की अवस्था मे अंतिम यूरिया के छिड़काव के समय बराबर मात्रा में पोटाश का भी उपयोग कंरे। सिंथेटिक पृथ्रोइड्स रसायनों का उपयोग कम से कम करें।

भूरे माहो से बचाव के लिए इन दवाओं का उपयोग करें

  • भूरे माहो से बचाव हेतु इन दवाओं का उपयोग करें
  • डाइन्यूटे फेरोन 20% 70 ग्राम प्रति एकड़
  • फ्लूसिमिकैमाइड 50% 60 ग्राम प्रति एकड़
  • डाइमेटोजीन 120 ग्राम प्रति एकड़
  • थइयोमाथाएग्जाम 40-60 ग्राम प्रति एकड़

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