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कोरोना का असर:जानलेवा गड्ढे और धूल से भरी 62 सड़कों पर सफर करना बनी लोगों की मजबूरी

जांजगीरएक महीने पहले
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  • सीएमजीएसवाय की सड़कों की मरम्मत के लिए भेजे इस्टीमेट को अब तक नहीं मिली मंजूरी

ग्यारह माह पहले नवंबर 2019 में सीएमजीएसवाय के तहत बनी जिले की 62 सड़कों को चिह्नांकित करते हुए उनकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। उम्मीद थी कि फंड मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की इन सड़कों की मरम्मत होने पर गांव के लोगों को आवागमन में सहुलियत मिलेगी, लेकिन इतनी लंबी अवधि बीतने के बाद भी राज्य सरकार से फंड की मंजूरी नहीं मिल पाई है, जिसके कारण सड़कों की स्थिति और खराब हो रही है। बारिश से पहले ही सड़कों की हालत खराब थी, इसके बाद और बदतर हो गई है। पूरा देश काेरोना से लड़ रहा है। प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर आए हैं। उनकी व्यवस्था, रहने खाने से लेकर कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर निशुल्क इलाज, क्वारेंटाइन सेंटर में खाना सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने में ही सरकार पर बड़ा वित्तीय भार पड़ा है, ऐसी स्थिति में अभी इन सड़कों की मरम्मत के लिए सरकार फंड देगी, इसकी संभावना फिलहाल तो कम है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से सरकार ने प्रमुख मार्गों से गांवों को जोड़ा है। सड़कों के बनने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा तो मिली है, किंतु सड़कें अब पुरानी होने के कारण टूटने लगी है। सड़कों को मरम्मत की आवश्यकता है। चूंकि सड़क बनने के तीन साल तक किसी भी प्रकार की टूट होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। यह बांडेड पीरियड भी अधिकांश सड़कों का खत्म हो गया है, जिसके कारण छोटे छोटे मरम्मत भी नहीं कराए जा सके। अब वहीं छाेटी टूटी सड़क की स्थिति लगातार दबाव के कारण और खराब हो गई है।

पीएमजीएसवाय की सड़कें बनना हुईं शुरू
जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की भी सड़कें है। इनकी भी मरम्मत की दरकार थी। केंद्र सरकार द्वारा जिले की 15 सड़काें की मरम्मत के लिए स्वीकृति दे दी है। इन सड़कों की मरम्मत की प्राथमिक तैयारी भी शुरू हो गई है। फिलहाल 15 सड़कों के 154 किमी का निर्माण कराया जाएगा।

सभी सड़कें छह-सात साल पुरानी निर्माण की गारंटी अवधि भी खत्म
जिन 62 सड़कों की खराब स्थिति के कारण मरम्मत का प्रस्ताव भेजा है, उनमें 54 सड़कें 2014 में बनाई गई थीं। यानि इन सड़कों का ठेकेदार द्वारा दिया गया गारंटी पीरियड छह साल पहले खत्म हो गई है, वहीं पांच एसी सड़कें है तो सात साल पहले 2013 में बनी थीं। उनकी मरम्मत भी जरूरी है, जबकि 3 सड़कें 2015 की हैं। यानि इन तीन सड़कों को भी पांच साल हो गए। इस तरह ठेकेदारों द्वारा मरम्मत की निर्धारित अवधि सभी सड़कों की खत्म हो चुकी है,अब इन सड़कों को दोबारा बनाने की जरूरत है।

मंजूरी का है इंतजार
"पिछले साल नवंबर माह में 62 सड़कों की मरम्मत व रिनोवेशन के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है , पर अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है, इसलिए अभी तक कोई काम शुरू हो सका है।''
-केएन राठौर, ईई सीएमजीएसवाय, जांजगीर

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