भास्कर एक्सपोज:डीईओ ने एक ही पार्टी को दिया 1 करोड़ 32 लाख रुपए के फर्नीचर का ऑर्डर

जांजगीर9 महीने पहले
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  • डीईओ की सहमति से प्राचार्यों को स्कूल स्तर पर करनी है फर्नीचर खरीदी

राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन द्वारा 2009-10 से लेकर 2011-12 के बीच शुरू हुए जिले के हाईस्कूलों में स्टाफ व विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था के लिए प्रति स्कूल 7 लाख 37 हजार रुपए की दर से फर्नीचर की खरीदी करने की प्रशासकीय मंजूरी इस शर्त पर दी थी कि संबंधित स्कूलों के प्राचार्य डीईओ की सहमति से सीएसआइडीसी से खरीदने कहा था, लेकिन सरकार के इस आदेश की अवहेलना की गई। डीईओ ने आदेश की अनदेखी करते हुए एक ही फर्म को 1 करोड़ 32 लाख रुपए के फर्नीचर सप्लाई का आर्डर दे दिया। इस तरह एक ही फर्म को एकमुश्त सप्लाई के सवाल पर डीईओ का अजीब तर्क है। उनका कहना है कि एक व्यक्ति रायपुर से सूची लेकर आया था। उसी व्यक्ति को डायरेक्टर के आदेश पर सप्लाई के लिए आदेश जारी किया है। राज्य सरकार द्वारा 2009 से लेकर 2011-12 तक जिले में 108 नए हाईस्कूल खोले गए। इन स्कूलों के भवन की मंजूरी के साथ ही यहां के स्टाफ व स्टूडेंट्स की बैठक व्यवस्था के लिए फर्नीचर की खरीदी के लिए भी प्रति स्कूल 7 लाख 37 हजार रुपए की स्वीकृति दी थी। वह फंड अब सरकार जारी कर रही है। स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जांजगीर में संचालित 18 स्कूलों के लिए पैसे दिए हैं। सभी प्राचार्यों को तय मानकों के अनुरूप 28 फरवरी तक खरीदी और सीएसआईडीसी द्वारा गुणवत्ता सर्टिफिकेट मिलने के बाद 31 मार्च से पहले अनिवार्य रूप से भुगतान करने को कहा है, लेकिन जिले में ऐसा नहीं हुआ। डीईओ ने रायपुर के एक ही पार्टी को 18 स्कूलों के लिए 1 करोड़ 32 लाख रु. के फर्नीचर सप्लाई की खरीदी का आदेश जारी कर दिया।

31 मार्च नजदीक इसलिए भी पैसों का खेल
भंडार एंव क्रय नियम के अनुरूप स्थानीय सूक्ष्म सीएसआईडीसी रजिस्टर्ड लघु उद्योगों से यह खरीदी की जानी थी। फिलहाल एक ही फर्म द्वारा 31 मार्च तक सभी स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई और गुणवत्ता जांच संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा फर्म को एडवांस पेमेंट कर कागजों में सारी औपचरिकता 31 मार्च से पहले पूरा करने व फंड को खर्च करने का उपाय है।

चेंबर ने की खरीदी आदेश निरस्त करने की मांग
आदेश के बाद शिक्षा विभाग में नियम विपरीत की जा रही खरीदी पर चेंबर ऑफ कॉमर्स चांपा ने आपत्ति जताते हुए क्रय आदेश निरस्त करने की मांग की है। चांपा इकाई के अध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल ने जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पूर्व में भी नियम विपरीत बल्क में इस तरह के खरीदी के आरोप लगाए हैं। साथ ही इस मामले में कलेक्टर व विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की है।

इन सालों में भी हो चुकी है खरीदी
राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन के तहत भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा पूर्व में भी हाई स्कूलों को फर्नीचर उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा साल 2010-11 और 2012-13 में 55 हाई स्कूलों के लिए खरीदी की गई थी। इस खरीदी में भी इसी तरह जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मनमाने ढंग से खरीदी करने का आरोप व्यवसायियों ने लगाया है।

सीधी बात
केएस तोमर, जिला शिक्षा अधिकारी, जांजगीर

सवाल - स्कूल स्तर पर फर्नीचर की खरीदी होनी थी, आपने नियम विपरीत एक पार्टी को बल्क में आर्डर दे दिया?
-आप किस खरीदी की बात कह रहे है, मैं समझा नहीं ।
सवाल - आरएमएसए के माध्यम से 18 स्कूलों में फर्नीचर व्यवस्था के लिए 1 करोड़ 32 लाख रुपए की फर्नीचर खरीदी की?
-हां वो सब रायपुर स्तर पर हो रहा है, उनके कहने पर हमने क्रय आदेश जारी किया है।
सवाल - आदेश एक में स्पष्ट लिखा है कि प्राचार्य द्वारा खरीदी और भुगतान किया जाना है, फिर एकमुश्त खरीदी कैसे कर सकते हैं?
-रायपुर से एक आदमी सूची लेकर आया था, डायरेक्टर के आदेश पर हमने उन्हें क्रय आदेश जारी किया है।
{डायरेक्टर ने लिखित आदेश दिए थे, या फिर आपको मौखिक फोन पर कहा गया था?
{{ऐसा कुछ नहीं है, आदमी आया था, जो राज्य कार्यालय का आदेश था, हमने उसके अनुरूप ही आदेश जारी किया है।
{स्थानीय कारोबारियों से क्यों नहीं खरीदी की गई,एक ही पार्टी को आर्डर दिया 31 मार्च सप्लाई नहीं हुई तो क्या खरीदी रद्द होगी या फिर एडवांस पेमेंट करेंगे?
{{जो ऊपर का आदेश था हमने किया है, उनके द्वारा तय समय पर सप्लाई की बात कही गई है, जब फर्नीचर आएंगे हम पेमेंट करेंगे।

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