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सामान्य सभा:बिना फाइल के पहुंचे इंजीनियर नहीं दे सके जवाब भड़के पार्षद, ढाई घंटे में सिर्फ दो एजेंडों पर निर्णय

जांजगीर11 दिन पहले
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सामान्य सभा की बैठक में तनातनी व बहस करते पार्षद। - Dainik Bhaskar
सामान्य सभा की बैठक में तनातनी व बहस करते पार्षद।
  • 10 महीने बाद हुई बैठक, एक घंटे की देर से हुई शुरू, 4 घंटे में 10 मुद्दों पर की गई चर्चा
  • विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर लगाया राजनीति का आरोप, अध्यक्ष का नाम सुन भड़के पार्षद

नगर पालिका में सोमवार को 10 माह बाद सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई। बैठक में रखे गए ज्यादातर विषय स्पष्ट नहीं थे, तो वहीं इंजीनियर बिना फाइल लिए सदन में पहुंचे। चर्चा के दौरान जनप्रतिनिधियों के सवालों पर इंजीनियर व विभाग प्रमुख जवाब नहीं दे सके। इससे बहस लंबी चली। शुरुआती दो विषयों में ढाई घंटे से ज्यादा समय बीत गया। विपक्ष ने एस्टीमेट व फंड के व्यवस्था के बिना विषय एजेंडे में शामिल नहीं होने से नाराजगी जाहिर की। साथ ही 6 वार्डों के तालाब सौंदर्यीकरण के विषय पर विपक्ष ने अध्यक्ष पर दलगत राजनीति का भी आरोप लगाया।

बैठक एक घंटे की देरी से शुरु हुई। सदन शुरू होने से पहले विपक्ष के पार्षदों ने पिछली बैठक की कार्रवाई के संबंध में रजिस्टर अधूरा होने पर आपत्ति दर्ज कराई और बैठक का विरोध किया। सीएमओ ने इस पर कर्मचारी को फटकार लगाते हुए ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की चेतावनी दी। इसके बाद सभी सदस्यों को बजट की प्रतियां दी गई। बजट की कॉपी मिलने पर वार्ड नंबर 9 के पार्षद सुधीर अग्रवाल ने बजट का विरोध किया और नियम अनुरूप बैठक के तीन दिवस पहले देने की बात की। वहीं वार्ड नंबर 16 के पार्षद हितेश यादव ने एजेंडे में एक भी हितग्राही मूलक विषय नहीं होने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। किसी तरह उन्हें शांत कराते हुए 1.5 बजे प्रभारी सीएमओ अशोक शर्मा ने सदन की कार्रवाई शुरू की। चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट का विषय रखा। बजट इस पर सबसे पहले सुधीर अग्रवाल ने आपत्ति दर्ज कराते हुए बजट को 10 मिनट में समझना मुश्किल बताया। हितेश यादव इसे अंकों का गणित बताते हुए जमकर विरोध किया। लेखापाल को बजट में उल्लेखित सभी आंकड़े स्पष्ट करने और जनहित के कार्यों को स्पष्ट करने की बात कही गई। पार्षदों के विरोध के बाद सदन ने बजट में सुधार कर तीन दिन बाद विशेष सम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया। इस पूरे मुद्दे पर सवा घंटे से ज्यादा बीत गया।

चार घंटों में सिर्फ इन 10 विषयों पर हुई चर्चा

  • चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट के लिए विशेष सम्मेलन बुलाने का निर्णय।
  • स्वीमिंग पुल निर्माण में देरी और दोषियों के लिए पांच पार्षदों की जांच कमेटी।
  • नैला बस स्टैंड की दुकानों के आंवटन पूरी सटीक जानकारी के साथ अगली बैठक में रखने निर्णय।
  • प्राथमिकता के आधार पर वार्डों में सामुदायिक भवन निर्माण पर सहमति।
  • वार्डों में सीसी रोड, नाली व बीटी सड़क का प्रस्ताव शासन को भेजने पर सहमति।
  • 15 वें वित्त के तहत पूरे 25 वार्डो में आवश्यक विकास कार्यों के प्रस्ताव पर सहमति।
  • नगर में कहचरी चौक से खोखसा आरओबी, व अन्य प्रमुख मार्गो के लिए गौरव पथ पर सहमति।
  • नहर से खड़फड़ी तालाब में जल भराव के लिए पाइप लाइन विस्तार कार्य पर सहमति।
  • राज्य परिवर्तित योजना में 6 तालाबों की बजाए नगर के सभी 15 सौंदर्यीकरण का पर सहमति।
  • प्रमुख मार्गों की नालियों को अतिक्रमण के मुद्दा कार्य योजना के साथ अगली बैठक में रखने का निर्णय

पार्षद ने इंजीनियर को बताया दोषी
एजेंडे में दूसरे नंबर अधूरे स्वीमिंग पुल था। स्वीमिंग पुल के ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के उद्देश्य से रखा गया था, लेकिन सदन में पार्षदों की दलीलों और लापरवाह इंजीनियरों के कारण पार्षदों का पलड़ा भारी दिखा। पार्षद जितेंद्र देवांगन ने ठेकेदार से ज्यादा इंजीनियरों को दोषी बताया। साथ ही देरी के पीछे पालिका द्वारा एक साल विलंब से स्थल चयन और इंजीनियरों द्वारा ड्राइंग डिजाइन में देरी को कारण बताया। निर्माण की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शेष भुगतान की बात पार्षदों ने कही।

विपक्ष ने लगाया दलगत राजनीति का आरोप
सदन में राज्य परिवर्तित योजना अंतर्गत नगर के विभिन्न वार्डों के तालाबों के सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव पर पार्षद हितेश यादव ने इंजीनियर नारायण आदित्य से मौके पर ही तालाबों के नाम पूछे, उन्होंने सिर्फ छह तालाबों के प्रस्ताव होने की बात कही। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने अध्यक्ष पर दलगत राजनीति का आरोप लगाया। और सभी 25 वार्डों के 15 तालाबों का सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव तैयार होने पर सहमति की बात कहते हुए आपत्ति
दर्ज कराई।

लापरवाह कर्मचारियों पर अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग
बैठक में वार्ड 17 के पार्षद सत्तापक्ष के सभापति विवेक सिसोदिया ने चौंकाने वाला आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को कर्मचारी और अधिकारी मजाक समझते हैं। कर्मचारी हमेशा खुद को काम के बोझ में दबा हुआ बताते हैं, लेकिन नगर में ऐसा कोई कार्य या विकास दिख नहीं रहा है। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर उन्होंने अध्यक्ष से परिषद के नियम अनुरूप कार्रवाई की भी बात कही।

नाम लेने पर भड़के पीडब्ल्यूडी सभापति रामविलास
सदन में नालों के अतिक्रमण के विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष के पार्षद सुधीर अग्रवाल ने अध्यक्ष का नाम लेते हुए भगवान दास भैय्या कह दिया। इस बात से पीडब्ल्यूडी विभाग के सभापति रामविलास राठौर भड़क गए। उन्होंने पार्षद को सदन की मर्यादा और गरिमा का ख्याल रखने की हिदायत तक दे डाली, लेकिन विपक्ष के पार्षद अपने साथी का पक्ष लेते हुए उनसे भिड़ गए और एक दूसरे पर आरोप लगाए। अपनी सफाई ने सुधीर अग्रवाल ने भैय्या कहने की बात कही। किसी तरह आखिर में दोनों पक्षों के पार्षद शांत हुए।

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