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पीएम आवास का हाल:2 साल के बाद भी 18562 पीएम आवास का निर्माण अधूरा क्योंकि नहीं मिले पैसे

जांजगीर19 दिन पहले
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  • 9278 लाभार्थी को पहली, 13058 को दूसरी और 15726 को तीसरी किस्त का इंतजार

पीएम आवास योजना के अंतर्गत पिछले तीन सालों के भीतर जिले में 45 हजार 736 मकान को मंजूरी मिली है, लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 27 हजार 274 ही बन सके हैं। शेष मकानों के निर्माण के लिए शासन से फंड नहीं मिलने के कारण दूसरे तीसरे और चौथे किस्तों का भुगतान नहीं हो सका है।

इसलिए 20 हजार आवास अधूरे हैं। लाभार्थी समितियों से उधार ले रहे हैं, तो कुछ ने साहूकारों के पास खेत तक गिरवी रख दिया है।

जिले में बीते 3 सालों के भीतर 2018-19 में 26 हजार 736, 2019-20 में 10 हजार व 2020-21 में 9 हजार आवास मंजूर किए गए। तीन वर्षों में 45 हजार 736 मकानों की मंजूरी दी गई, जिसमें 2018-19 में स्वीकृत आवासों में से 26820 को पूरा बताया जा रहा है। इसके अलावा 2019-20 में भी 654 मकान पूरे हो चुके हैं।

इस हिसाब से 18 हजार 562 पीएम आवास पूर्ण नहीं हो सके है। अब तक 9 हजार 278 लोगों को पहली किस्त का भुगतान नहीं हुआ। वहीं 13 हजार 58 को दूसरी और 15 हजार 726 को तीसरी किस्त का भुगतान नहीं हुआ। इनमें से 21 हजार 726 को चौथी किस्त नहीं मिली है।

खेत गिरवी है किस्त मिले ताे छुड़ाएंगे
ग्राम पंचायत जर्वे (च) निवासी लीलाधर साहू और उसकी पत्नी सविता साहू के नाम पर पीएमआवास की मंजूरी 2019-20 में मिली। नवंबर में उन्हें पहली किस्त 25 हजार रुपए का भुगतान हुआ। इसके बाद उन्हें एक रुपए नहीं मिला। लीलाधर साहू ने बताया कि पैसा नहीं मिलने के कारण आवास को पूरा कराने के लिए 70 हजार रुपए में अपने खेत साहूकार के पास गिरवी रखा है। और 40 हजार समिति से कर्ज लेकर अधूरा निर्माण पूरा कराया।

अधिकांश को मजदूरी भुगतान की जानकारी नहीं
पीएम आवास के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 से नियम में बदलाव किया है। अब पहली किस्त 25 हजार दूसरी और तीसरी किस्त 40-40 हजार और निर्माण पूरा करने के बाद चौथी किस्त 15 हजार रुपए यानी कुल 1 लाख 20 हजार रुपए दी जाती है। प्रत्येक हितग्राही को 190 रुपए के हिसाब से 90 दिन का मजदूरी भुगतान अगल से 17 हजार 100 रुपए भुगतान किया जाता है, लेकिन ज्यादातर पंचायतों में इस पर रोजगार सहायक खेल कर जाते हैं।

10 महीने बाद मिली तीसरी किस्त
बिरगहनी के कन्हैया लाल कुर्रे और राधेश्याम कुर्रे के पीएम आवास की मंजूरी 2018-19 में मिली। उन्हें पहली और दूसरी किस्त समय पर मिली, पर तीसरी किस्त उन्हें 10 महीने बाद मिली। अब वे छत की ढलाई के काम करा रहे हैं। किस्त के भुगतान में देरी के चलते उन्हें समिति से और अपने जान पहचान वालों से 50 हजार रुपए कर्ज भी लेना पड़ा। अब निर्माण के बाद वे मजदूरी और 15 हजार रुपए की चौथी किस्त भुगतान की बात कही गई है।

मजदूरी की राशि नहीं मिली
ग्राम पंचायत जर्वे के ही अजयदास महंत को वर्ष 2017-18 में पीएम आवास को मंजूरी मिली। इसके लिए उन्हें चार किस्तों में 1 लाख 20 हजार रुपए मिले, लेकिन 190 रुपए के हिसाब से 90 दिन का मजदूरी भुगतान 17 हजार 100 रुपए उन्हें अबतक प्राप्त नहीं हुआ है। इसके लिए वे बार-बार गांव के रोजगार सहायक संजय कश्यप के चक्कर लगा रहे हैं। इस तरह के गांव में और भी मामले हैं।

654 को अब तक नहीं मिली चौथी किस्त
साल 2019-20 में जिले में 10 हजार पीएम आवास का लक्ष्य रखा था। इसके अनुरूप स्वीकृत हितग्राहियों के मकानों की जियो टैगिंग की प्रकिया पूरी होने के बाद इनमें से सिर्फ 9 हजार 725 को पहली किस्त का भुगतान नंवबर 2020 में किया गया। इसके दूसरी किस्त 66 सौ और तीसरी किस्त 47 सौ आवेदकों को मिला। इनमें से 654 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, लेकिन चौथी किस्त का भुगतान उन्हें अब तक नहीं किया गया है।

फंड नहीं मिला है, इसलिए भुगतान में हो रही देरी
शासन से जितना फंड आया था, हमने हितग्राहियों के खातों में भुगतान कर दिया है। पिछले दो वित्तीय वर्ष से फंड नियमित नहीं मिले हैं। इस वजह से ज्यादातर लोगों को दूसरी और तीसरी किस्त का भुगतान नहीं हो सका है। जैसे ही जिले को पीएमजीएसवाई के लिए फंड मिलेगा हम हितग्राहियों के खाते में भुगतान करेंगे।''
गजेंद्र सिंह, सीईओ जिला पंचायत जांजगीर

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